झारखंड छात्र आंदोलन: राहुल गांधी के पत्र के बाद सरकार के फैसले पर उमंग सिंघार ने जताया आभार
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राहुल गांधी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आभार जताया है। उमंग सिंघार ने कहा कि राहुल गांधी ने छात्रों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर उनकी आवाज को मजबूती से उठाया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने छात्रों की मांगों को संज्ञान में लेते हुए महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।
उमंग सिंघार ने कहा कि उनके झारखंड के सह-प्रभारी रहते हुए कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने प्रदेश के हित में मिलकर काम किया था और यह सहयोग आज भी आगे बढ़ रहा है। उन्होंने छात्र हित में सरकार की ओर से उठाए गए कदम को सकारात्मक और संतोषजनक पहल बताया।
राहुल गांधी ने लिखा पत्र
14 अगस्त को राहुल गांधी ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि छात्र राज्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं और उनकी मांगें जायज हैं। उन्होंने संविधान प्रदत्त शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लोकतंत्र का मुख्य स्तंभ बताया और कांग्रेस पार्टी का छात्रों को पूरा समर्थन जताया। अपने पत्र में राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से मिलने का सुझाव दिया था। उन्होंने लिखा था कि इससे सरकार की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी। उन्होंने युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए कहा था कि संकट की इस घड़ी में उनकी बात सुनना और समस्याओं का समाधान निकालना जरूरी है। पत्र में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर आरएसएस और भाजपा के कथित कब्जे का भी जिक्र किया था।
सरकार का बड़ा फैसला और आंदोलन का अंत
राहुल गांधी के पत्र और लगातार बातचीत के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने छात्रों की प्रमुख मांगें स्वीकार कर लीं। सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। साथ ही आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल के जरिए 2014 के बाद आयोजित सभी परीक्षाओं को भी रद्द कर दिया गया। अनियमितताओं की जांच के लिए सीआईडी जांच और सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच का प्रावधान किया गया। जेपीएससी-जेएसएससी सुधार के लिए समिति भी गठित की गई।
इन फैसलों के बाद छात्रों ने 16 दिनों की भूख हड़ताल समाप्त कर दी और शांतिपूर्ण आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा की। छात्र नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड सरकार और राहुल गांधी का आभार जताया। हालांकि, सीबीआई जांच जैसी कुछ मांगों पर पूर्ण सहमति नहीं बन सकी थी लेकिन प्रमुख मांगों के स्वीकार होने के बाद आंदोलन को स्थगित कर दिया गया।
उमंग सिंघार ने जताया आभार
इस मामले पर उमंग सिंघार ने राहुल गांधी सीएम सोरेन दोनों को धन्यवाद कहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्र आंदोलन की मांगों को लेकर राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर छात्रों की आवाज को मजबूती से उठाया था। इसे संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री ने छात्रों की प्रमुख मांगों को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि उनके झारखंड के सह-प्रभारी रहते हुए कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने प्रदेश के हित में मिलकर काम किया था और यह सहयोग आज भी निरंतर आगे बढ़ रहा है। छात्र हित में हुई इस सकारात्मक पहल को उन्होंने बेहद संतोषजनक बताया। उमंग सिंघार ने कहा, “छात्रों की आवाज उठाने के लिए आदरणीय श्री राहुल गांधी जी और उनकी मांगों को स्वीकार करने के लिए मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी का हृदय से आभार।”
महाकाल में आकार ले रहा है 1 हजार साल पुराना मंदिर, बनेगा 37 फीट ऊंचा, खुदाई में मिले थे अवशेष
उज्जैन के महाकाल मंदिर में 6 साल पहले खुदाई के दौरान 1000 साल पुराना मंदिर निकला था। अब इस मंदिर के अवशेषों को जोड़कर एक बार फिर उसी शैली में इसका पुननिर्माण किया जा रहा है जिसमें यह कभी हुआ करता था। कारीगरों की पूरी टीम इस मंदिर को फिर से आकार देने में लगी हुई है।
महाकाल मंदिर परिसर में ही इस मंदिर को फिर से बनाया जा रहा है। बता दें कि यह 37 फीट ऊंचा होगा और इसका आधार तैयार कर लिया गया है। 2027 के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रोजाना तकरीबन 28 कारीगर इस मंदिर को आकार देने के काम में लगे रहते हैं।
2020 की खुदाई में मिला था मंदिर
बता दें कि महाकाल मंदिर विस्तारीकरण के पहले चरण में 2020 के दौरान जब खुदाई की जा रही थी। तब मंदिर के सामने 25 से 30 फीट नीचे खुदाई करने पर एक प्राचीन ढांचा सामने आया था। इसमें मंदिर का आधार भाग, शिवलिंग, नंदी, गणेश, मां चामुंडा और शार्दुल की मूर्तियां मिली थी। जब पुरातत्व विशेषज्ञों ने अवशेषों की जांच की तो यह सामने आया कि यह परमार कालीन मंदिर के अवशेष हैं। तभी से इसे वापस से आकार देने की कोशिश चल रही है।
37 फीट ऊंचा होगा मंदिर
बता दें कि महाकाल मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के शिखर के सामने इस मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। प्राचीन शैली के इस शिव मंदिर की ऊंचाई 37 फीट की होने वाली है। इसके निर्माण में 65 लाख रुपए अनुमानित खर्च किया जाने वाला है। मंदिर निर्माण का कार्य पुरातत्व विशेषज्ञों की देखरेख में किया जा रहा है।
जोड़े जा रहे पुराने अवशेष
विशेषज्ञों द्वारा खुदाई में जो स्तंभ, आमलक, कुंभ भाग और अन्य अवशेष मिले थे उनकी एक-एक का नंबरिंग की गई है। नंबरिंग के आधार पर हर एक अवशेष को उसके मूल स्थान के अनुरूप रखकर जोड़ा जा रहा है। इस तरह से प्राचीन अवशेषों को जोड़कर मंदिर को उसके मूल स्वरूप में तैयार किया जाएगा।
राजस्थान से आए कारीगर
इस प्राचीन मंदिर को फिर से आकार देने के लिए राजस्थान से विशेषज्ञ कारीगरों को बुलाया गया है। मंदिर के निर्माण में खुदाई के दौरान मिले पुराने पत्थरों का उपयोग हो रहा है। जिस हिस्से का मूल पत्थर उपलब्ध नहीं है वहां पर राजस्थान से बेसाल्ट पत्थर मंगवाकर उन्हें प्राचीन मंदिर की शैली के अनुरूप आकार देकर लगाया जा रहा है।
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