पुरी जगन्नाथ रथयात्रा में भगदड़! 1 श्रद्धालु की मौत की खबर, 100 से ज्यादा घायल, प्रशासन ने कहा – ‘भारी भीड़ से बिगड़े हालात’
ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान भारी भीड़ के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दरअसल पहांडी रस्म के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ रथों की ओर बढ़ने लगे जिससे यात्रा मार्ग पर दबाव बढ़ गया। शुरुआती रिपोर्टों में एक श्रद्धालु की मौत और 100 से ज्यादा लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया कि स्थिति भगदड़ जैसी नहीं थी बल्कि अत्यधिक भीड़ के कारण कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ गई।
दरअसल घटना के समय पुरी में तेज बारिश भी हो रही थी लेकिन इसके बावजूद लाखों श्रद्धालु रथयात्रा में शामिल थे। बताया गया कि शाम करीब 5 बजे भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए लोग तेजी से आगे बढ़ने लगे। मौके पर मौजूद स्वयंसेवक और सुरक्षाकर्मी भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश करते रहे लेकिन कुछ देर के लिए हालात बिगड़ गए। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका इलाज जारी है।
भीड़ बढ़ने से बिगड़े हालात!
वहीं प्रशासन के अनुसार ग्रैंड रोड पर मारिचीकोट चौक के पास भारी भीड़ जमा होने से कुछ श्रद्धालुओं को सांस लेने में परेशानी हुई। एक श्रद्धालु की पहचान क्योंझर निवासी अनिल दास के रूप में हुई जिन्हें अस्पताल ले जाने पर मृत घोषित कर दिया गया। प्रशासन ने यह भी बताया कि एक अन्य अलग घटना में 35 वर्षीय युवक की हार्ट अटैक से मौत हुई। वहीं कई श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। वहीं इस दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ तय क्रम में आगे बढ़ते रहे। भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ आगे बढ़ने के बाद यात्रा को निर्धारित समय के अनुसार विराम दिया गया। देवी सुभद्रा का देवदलन रथ भी यात्रा मार्ग पर आगे बढ़ा। रथयात्रा का अगला चरण निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे जारी रहेगा। प्रशासन लगातार श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील कर रहा है।
जगन्नाथ रथयात्रा में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत
दरअसल पुरी की रथयात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिनी जाती है जहां हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर इंतजाम किए गए हैं। ओडिशा पुलिस के अनुसार पूरे आयोजन में 19 आईपीएस अधिकारियों समेत करीब 13 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा सीआरपीएफ, आरएएफ और अन्य केंद्रीय बलों की कंपनियां भी अलग-अलग स्थानों पर मौजूद हैं। भीड़ पर नजर रखने के लिए एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी और कंट्रोल सेंटर सक्रिय किए गए हैं।
फर्जी प्रमाणपत्र मामले में मंत्री प्रतिमा बागरी को क्लीन चिट, कांग्रेस ने छानबीन समिति के फैसले का किया विरोध, हाई कोर्ट जाएगी
फर्जी एससी जाति प्रमाणपत्र के आरोप झेल रही प्रदेश सरकार की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के मामले को देख रही राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने क्लीन चिट दे दी है यानि समिति ने उनके प्रमाणपत्र को एस सी जाति का ही माना है, समिति ने कांग्रेस के आरोपों को ख़ारिज कर दिया हालाँकि कांग्रेस ने छानबीन समिति के फैसले को गलत बताया है और कहा हिया कि वो इस मामले को लेकर हाई कोर्ट जाएगी
दरअसल मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाणपत्र की वैधानिकता पर सवाल उठाये हैं उनका दावा है कि प्रतिमा बागरी ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाया है वे अनुसूचित जाति यानि SC वर्ग से नहीं आती वे राजपूत समाज यानि सामने वर्ग से आती हैं उन्होंने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर एससी के लिए सुरक्षित सिर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
मामले की शिकायत के बाद सरकार ने राज्य स्तरीय छानबीन समिति का गठन किया और मामले से जुड़े दस्तावेज और सखी जुटाए, पिछले दिनों राज्य स्तरीय समिति ने प्रतिमा बागरी को उनके अनुसूचित जाति का होने का दस्तावेजी प्रमाण लेकर 6 जुलाई को अनुसूचित जाति विकास आयुक्त कार्यालय में पेश होने के निर्देश दिए थे, प्रतिमान बागरी ने प्रमाण दिखाए जिसके बाद समिति ने उन्हें क्लीन चिट दे दी।
मंत्री बागरी को छानबीन समिति ने दी क्लीन चिट
मंत्री बागरी ने समिति के सामने 110 वर्ष पुरानी खसरा खतौनी की नक़ल प्रस्तुत की जिसमें बागरी को कहीं भी राजपूत नहीं बताया गया और न ही उप जाति का कोई उल्लेख है, मंत्री ने कांग्रेस के आरोपों पर जवाब देते हुए समिति को बताया कि कांग्रेस द्वारा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पन्ना जिले की गुनौर विधानसभा सीट से महेंद्र बागरी और काशी बागरी को प्रत्याशी बनाया गया है। सतना जिले की रैगांव सीट से (जहां से प्रतिमा विधायक हैं) उनके दादा जुगल किशोर बागरी विधायक रहे। समिति ने ऊ नके दस्तावेज देखने के बाद क्लीन चिट दे दी यानि उनके जाति प्रमाणपत्र को सही माना।
समिति के फैसले के हाई कोर्ट जाएगी कांग्रेस
शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार ने 430 पेज के दस्तावेज समिति को सौंपे और कहा कि इसमें बागरी जाति के रहन सहन और सभी राज्यों में सामान्य वर्ग का होने का उल्लेख है हालाँकि समिति ने उनका तक ख़ारिज कर दिया, एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ से बात करते हुए प्रदीप अहिरवार ने छानबीन समिति के फैसले को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए दुखद घटना बताया, उन्होंने कहा प्रतिमा बागरी का जाती प्रमाणपत्र फर्जी है, वे फर्जी मंत्री हैं और हम ऐसे फर्जी मंत्री को ज्यादा दिनों तक सरकार में रहने नहीं देंगे, हम छानबीन समिति के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट जायेंगे।




Mp Breaking News











/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)






