IND VS SL: गॉल टेस्ट में श्रीलंका को कितने रनों का लक्ष्य देना चाहेगी टीम इंडिया? पारी घोषित करेगी या होगी ऑलआउट
IND VS SL: गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में भारत और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट मैच खेला जा रहा है. इस मैच में टीम इंडिया ने पहली पारी में 462 रन बनाए और श्रीलंका की पहली पारी 284 के स्कोर पर सिमट गई. इस तरह भारतीय टीम ने पहली पारी के आधार पर ही 178 रनों की बढ़त हासिल कर ली थी और दूसरी पारी में भी टीम इंडिया बल्लेबाजी कर रही है. ऐसे में अब सवाल उठता है कि क्या टीम इंडिया पारी को घोषित करेगी और अगर करेगी तो कितने रन बनाकर घोषित करेगी? या फिर टीम इंडिया ऑलआउट होने का इंतजार करेगी.
क्या टीम इंडिया को घोषित कर देनी चाहिए पारी
श्रीलंका के साथ खेले जा रहे गॉल टेस्ट मैच में अब सभी को इंतजार है कि टीम इंडिया कब पारी घोषित करेगी... या फिर वह ऑलआउट होने तक खेलती रहेगी... ऐसे में सबसे अहम सवाल ये है कि आखिर गॉल टेस्ट मैच में श्रीलंका को कितने रनों का लक्ष्य देकर टीम इंडिया अपनी जीत सुनिश्चित कर सकती है. देखा जाए, तो आज मैच का चौथा दिन है और पांचवें दिन का खेल भी बाकी है. मगर, यहां नोटिस करने वाली बात ये भी है कि श्रीलंका में बारिश भी आ सकती है, जो इस मैच पर असर डाल सकती है. इसलिए पारी घोषित करने से पहले टीम इंडिया के जहन में ये बात भी होगी.
श्रीलंका को कितने रनों का लक्ष्य देना चाहेगा भारत?
गॉल टेस्ट मैच में टीम इंडिया को
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भारत में 2030 तक करीब 62 प्रतिशत लोगों के पास होगा 5जी कनेक्शन
नई दिल्ली, 18 अगस्त (आईएएनएस)। भारत में लगभग 2030 तक 62 प्रतिशत लोगों के पास 5जी कनेक्शन होने की उम्मीद है, यह एशिया प्रशांत क्षेत्र के औसत 50 प्रतिशत से ज्यादा है। यह जानकारी मंगलवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
जीएसएमए की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के साथ-साथ भारत को भी इस क्षेत्र के अग्रणी देशों में गिना जाता है, जहां डिजिटल-इकोनॉमी की ग्रोथ को तेज करने और मोबाइल-इंडस्ट्री की स्थिरता को बनाए रखने के लिए रेगुलेटरी आधुनिकीकरण जरूरी है।
भारत में कनेक्टिविटी की चुनौती अब कवरेज से हटकर इस्तेमाल और अपनाने की ओर बढ़ रही है, क्योंकि दक्षिण एशिया में कवरेज का अंतर लगभग 30 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत से भी कम हो गया है।
इस वजह से मोबाइल इंटरनेट अपनाने में खर्च, डिवाइस तक पहुंच, डिजिटल स्किल्स, भरोसा और ऑनलाइन सुरक्षा मुख्य बाधाएं बन गई हैं।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि 2030 तक मोबाइल टेक्नोलॉजी और सेवाएं एशिया-प्रशांत की अर्थव्यवस्था में 1.4 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देंगी, जो आज के 1 ट्रिलियन डॉलर के मुकाबले 40 प्रतिशत ज्यादा है।
डिजिटल ग्रोथ का अगला दौर इस बात से तय होगा कि सरकारें, ऑपरेटर और टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर चार अहम प्राथमिकताओं पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का तेजी से बढ़ना, डिजिटल भरोसे में कमी, ज्यादा मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग और डिजिटल संप्रभुता में बढ़ती रुचि शामिल हैं।
रिपोर्ट में इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की कोशिशों के उदाहरण के तौर पर भारतनेट और पीएमजीडीआईएसएचए का जिक्र किया गया है। पीएमजीडीआईएसएचए ने 6.4 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण नागरिकों को बुनियादी डिजिटल स्किल्स की ट्रेनिंग दी है।
भारत के लिए डिजिटल भरोसा एक आर्थिक प्राथमिकता बनता जा रहा है। 2026 में इन्फॉर्मेशन-सिक्योरिटी पर खर्च में 11.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जो साइबर-सिक्योरिटी, पहचान, प्राइवेसी और भरोसे से जुड़ी दूसरी सेवाओं की बढ़ती मांग को दिखाता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स संवेदनशील डेटा को स्टोर करने, प्रोसेस करने और मैनेज करने के लिए भरोसेमंद माहौल बनाने की दिशा में योगदान दे रहे हैं। साथ ही, लोकल, ऑडिट-योग्य और सुरक्षित एआई वर्कलोड के लिए सॉवरेन क्लाउड एनवायरनमेंट में भी दिलचस्पी बढ़ रही है।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत उन देशों में भी शामिल है जिन्होंने 6जी स्पेक्ट्रम रोडमैप जारी किया है, जो कनेक्टिविटी और स्पेक्ट्रम प्लानिंग के प्रति इसके लंबे समय के नजरिए को दिखाता है।
--आईएएनएस
एबीएस
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