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Explainer: क्या होता है मानसून सत्र? बाकी सेशन से कैसे होता है अलग

What Is Monsoon Session: भारतीय संसद में आमतौर पर हर साल तीन सत्र होते हैं। बजट सत्र, मानसून सत्र, शीतकालीन सत्र। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर किसी बड़े या आपात राष्ट्रीय मुद्दे पर राष्ट्रपति विशेष सत्र भी बुला सकते हैं। आज हम बात करेंगे मानसून सत्र की। यह क्यों खास होता है और बाकी सत्रों से कैसे अलग होता है। 

संसद में आगामी 20 जुलाई 2026 से मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है, यह 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। सत्र के सुचारू संचालन और सरकार के विधायी एजेंडे पर चर्चा के लिए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई है।

मानसून सत्र में क्या होता है?

संसद का मानसून सत्र हर साल जुलाई से सितंबर के बीच आयोजित किया जाता है। इस दौरान सरकार नए कानून बनाने के लिए विधेयक पेश करती है और उन पर चर्चा के बाद उन्हें पारित कराने की कोशिश करती है। साथ ही देश से जुड़े अहम मुद्दों, सरकारी नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर भी बहस होती है।

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मानसून सत्र में प्रश्नकाल के दौरान सांसद मंत्रियों से सरकार के कामकाज और फैसलों पर सवाल पूछते हैं। इसके बाद शून्यकाल में सांसद बिना पहले से सूचना दिए जनहित के जरूरी मुद्दे उठा सकते हैं। वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगता है और चर्चा की मांग करता है।

बाकी सत्रों से होता है अलग?

पहला बजट सत्र, जो जनवरी या फरवरी से मई तक चलता है और इसमें सरकार देश का सालाना बजट पेश करती है। दूसरा मानसून सत्र, जो जुलाई से अगस्त या सितंबर तक होता है, जिसमें देश के अहम मुद्दों और मौजूदा हालात पर चर्चा की जाती है। तीसरा शीतकालीन सत्र, जो नवंबर से दिसंबर तक चलता है और इसमें लंबित विधेयकों को पारित करने के साथ सरकार के कामकाज की समीक्षा होती है। संविधान के अनुच्छेद 85 के अनुसार, संसद के दो सत्रों के बीच छह महीने से ज्यादा का अंतर नहीं हो सकता। जरूरत पड़ने पर किसी बड़े या आपात राष्ट्रीय मुद्दे पर राष्ट्रपति विशेष सत्र भी बुला सकते हैं।

इस बार मानसून सत्र में क्या होगा?

मानसून सत्र में सरकार कई अहम विधेयक पेश कर सकती है। इनमें लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन (सीमाओं के नए निर्धारण) और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक शामिल हैं। इसके अलावा, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक राज्यों के अधिकारों और शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता को प्रभावित कर सकता है। वहीं, कांग्रेस अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर भी सरकार से जवाब मांग सकती है।

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मानसून सत्र कब से शुरू होगा?

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अवधि के लिए संसद के दोनों सदनों का सत्र बुलाने की मंजूरी दे दी है। सत्र शुरू होने से एक दिन पहले, 19 जुलाई को सरकार ने सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है, ताकि संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चल सके और सरकार के विधायी एजेंडे पर सभी दलों से चर्चा की जा सके।

संसद सत्र 2026 में कब तक चलेगा?

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। करीब चार सप्ताह चलने वाले इस सत्र में लोकसभा और राज्यसभा की लगभग 19 बैठकें होने की संभावना है। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है और देश से जुड़े अहम मुद्दों पर दोनों सदनों में चर्चा होगी।

मानसून सत्र के प्रमुख कार्य

मानसून सत्र में सरकार नए कानून बनाने और पुराने कानूनों में बदलाव से जुड़े विधेयक पेश करती है, जिन पर चर्चा के बाद उन्हें पारित कराने की कोशिश होती है। इस दौरान सरकार के कामकाज और बजट के बाद देश की आर्थिक व सामाजिक स्थिति की भी समीक्षा की जाती है। साथ ही सांसद अपने क्षेत्र और देश से जुड़े जनहित के मुद्दों को संसद में उठाते हैं और उन पर चर्चा करते हैं।

इतिहास का सबसे लंबा मानसून सत्र कब रहा?

भारतीय संसद के इतिहास में सबसे लंबा मानसून सत्र 2008 में हुआ था। यह 21 जुलाई 2008 को शुरू हुआ और अविश्वास प्रस्ताव (ट्रस्ट वोट) समेत कई अहम मुद्दों पर लंबी चर्चा के चलते अलग-अलग चरणों में चलता रहा। आखिरकार यह 23 दिसंबर 2008 को खत्म हुआ। हालांकि, आमतौर पर संसद का मानसून सत्र 3 से 4 सप्ताह का ही होता है और यह जुलाई से अगस्त या सितंबर के बीच आयोजित किया जाता है।

बाकी सत्रों से कैसे अलग होता है मानसून सत्र?

तीन प्रमुख सत्र होते हैं- बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र। बजट सत्र फरवरी से मई तक चलता है और इसमें राष्ट्रपति का अभिभाषण, केंद्रीय बजट पेश करना तथा सरकार की आय-व्यय और आर्थिक नीतियों पर चर्चा होती है। इसके बाद जुलाई से अगस्त या सितंबर के बीच मानसून सत्र होता है, जिसमें नए विधेयक पेश किए जाते हैं और देश के अहम मुद्दों पर बहस होती है।

साल का आखिरी शीतकालीन सत्र नवंबर से दिसंबर तक चलता है, जिसमें लंबित विधेयकों पर चर्चा और सरकार के कामकाज की समीक्षा की जाती है। भारतीय संसदीय व्यवस्था में ग्रीष्मकालीन सत्र नाम का कोई अलग नियमित सत्र नहीं होता। संविधान के अनुसार संसद के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं हो सकता और जरूरत पड़ने पर किसी बड़े राष्ट्रीय मुद्दे पर सरकार विशेष सत्र भी बुला सकती है।

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पहला मानसून सत्र क्यों था खास?

जानकारी के अनुसार, भारत की संसद का पहला मानसून सत्र 13 मई 1952 को पहले आम चुनाव (1951-52) के बाद शुरू हुआ। इसी दौरान नवगठित लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों ने शपथ ली। इस सत्र में डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन पहले उपराष्ट्रपति चुने गए। जीवी मावलंकर लोकसभा के पहले अध्यक्ष (स्पीकर) बने, जबकि एम अनंतशयनम आयंगर उपाध्यक्ष चुने गए। सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के अभिभाषण से हुई, जिसमें उन्होंने नई सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं की जानकारी दी।

 

 

 

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‘भगवान कृष्ण मुसलमान और 5 वक्त के नमाजी थे’ मौलाना जरजिस अंसारी के विवादित बयान पर मचा बवाल

भगवान श्रीकृष्ण पर मौलाना जरजिस अंसारी ने विवादित बयान दे दिया है. उन्होंने भगवान कृष्ण को मुसलमान बताया है. यहां तक की उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण पांच वक्त के नमाजी थे और अपने दीन यानी इस्लाम का प्रचार करते थे. अंसारी के बयान पर हिंदू पक्ष ने आपत्ति जताई है. हिंदू पक्ष ने मौलाना की गिरफ्तारी की मांग की है.

जानें क्या बोले थे मौलाना

मौलाना जरजिस अंसारी इटावा के रहने वाले हैं. उन्होंने अपनी तकरीर में कहा, 'हमारे भाई, अगर बुरा न मानें, तो कृष्ण जी भी पांचों वक्त की नमाज पढ़ा करते थे. यकीन न आए तो श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय का 10वां श्लोक देख लीजिए- योगी युञ्जीत सततमात्मानं एकाकी… जिसमें कृष्ण जी अर्जुन से कह रहे हैं कि हे अर्जुन, ईश्वर की पूजा करो तो पूरे शरीर का योग करो. यानी पूजा सिर्फ खड़े होकर नहीं, बल्कि पूरे शरीर के साथ होनी चाहिए.' 

मौलाना ने आगे कहा, 'आज हिंदू धर्म में चले जाइए, लोग सिर्फ ऐसे हाथ उठाएंगे- ओम नमः शिवाय, बस हो गई पूजा. ये हिंदू-मुस्लिम का विषय नहीं है. अगर ये अपनी किताबें पढ़ लें. योगी जी बड़े भक्त बनते हैं राम के और अगर अपनी किताबें पढ़ लें, तो यकीन मानिए इस्लाम से मोहब्बत करने लगेंगे. क्योंकि इस्लाम सिर्फ मुसलमानों का धर्म नहीं है. ये उनका भी धर्म है.' मौलाना ने आगे दावा किया कि इसी दीन और इसी धर्म को रामचंद्र जी ने भी पेश किया है, कृष्ण जी ने भी पेश किया है. ये सिर्फ मुसलमानों का नहीं है.

श्लोक का असली अर्थ क्या है?

जिस श्लोक का मौलाना ने गलत अर्थ निकाला, उस श्लोक में श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि योगी (साधक) को चाहिए कि वह एकांत स्थान में रहकर, अकेले, अपने मन और इंद्रियों को वश में रखते हुए, बिना किसी इच्छा और संग्रह की भावना के, निरंतर अपने मन को योग (ध्यान) में लगाए.

साधु-संतों ने जताया आक्रोश

साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास ने कहा कि देखिए, मैं इस कट्टरपंथी मौलवी से पूछना चाहता हूं कि यह बात कहां लिखी है? उन्हें अपनी इन आधारहीन और बेतुकी टिप्पणियों को वापस लेना चाहिए. अन्यथा, सनातनियों में उनके खिलाफ भारी आक्रोश पैदा होगा. जब तक वे समाज और सनातनी समुदाय से माफी नहीं मांग लेते, हम इस मामले को ऐसे ही नहीं छोड़ेंगे. मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए.

 

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