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E20 Fuel से Maruti Suzuki की Grand Vitara Strong Hybrid हो गयी खराब, मारुति और डीलर के खिलाफ उपभोक्ता आयोग ने अपनाया सख्त रुख

देशभर में अनिवार्य रूप से ई20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल की बिक्री शुरू होने के बाद उसके प्रभाव को लेकर चल रही बहस अब एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ पर पहुंच गई है। छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मारुति सुजुकी और उसके डीलर को एक ग्राहक की ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड एसयूवी वापस लेकर उसी मॉडल की नई कार देने का आदेश दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब केंद्र सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि ई20 पेट्रोल से इंजन को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता और इसके खिलाफ चल रहा अभियान भ्रामक तथा राजनीतिक रूप से प्रेरित है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रायपुर निवासी 41 वर्षीय डॉ. प्रेमराज देवता ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस खरीदी थी, लेकिन ई20 पेट्रोल के व्यापक इस्तेमाल के बाद वाहन में बार-बार तकनीकी समस्याएं आने लगीं। उनका आरोप था कि वाहन खरीदते समय उन्हें यह नहीं बताया गया कि उनकी कार पूरी तरह ई20 ईंधन के अनुकूल नहीं है। शिकायत में डीलर नेक्सा मैग्नेटो (स्काई ऑटो मोबाइल) और मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड दोनों को पक्षकार बनाया गया।

इसे भी पढ़ें: Nitin Gadkari का Master Plan: भारत में चलेंगी Flying Buses, ₹22 लाख करोड़ के फ्यूल इम्पोर्ट को कम करने की तैयारी

आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीज की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद निर्माता और डीलर को सेवा में कमी का दोषी माना। आयोग ने आदेश दिया कि दोनों पक्ष 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता की कार वापस लेकर उसी मॉडल की ई20 संगत नई कार उपलब्ध कराएं। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो वाहन की पूरी कीमत, आरटीओ शुल्क और बीमा प्रीमियम सहित कुल 20.50 लाख रुपये लौटाने होंगे। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए एक लाख रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया गया है। निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह ई20 ईंधन की अनुकूलता और वाहन कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं को दी जाने वाली जानकारी के मुद्दे को सीधे केंद्र में ले आता है। यदि ऐसे और मामले सामने आते हैं तो वाहन निर्माताओं और डीलरों की जिम्मेदारियों को लेकर व्यापक बहस तेज हो सकती है।

दूसरी ओर, बढ़ते विवाद के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर ई20 कार्यक्रम का जोरदार बचाव किया है। उन्होंने कहा कि देश 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर चुका है और अब ई20 पेट्रोल लगभग हर पेट्रोल पंप पर उपलब्ध है। यदि कोई उपभोक्ता शुद्ध 100 प्रतिशत पेट्रोल लेना चाहता है तो उसके लिए यह विकल्प उपलब्ध हो सकता है, लेकिन उसे अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभिन्न प्रकार के ईंधन उपलब्ध कराने का अंतिम निर्णय पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।

गडकरी ने ई20 से इंजन खराब होने के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर इस विषय में गलत सूचनाएं फैलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ई10 मानक वाले सभी वाहन ई20 ईंधन पर सुरक्षित रूप से चल सकते हैं और अब तक सरकार को इंजन क्षति की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि वाहन निर्माता कंपनियां भी ई20 का समर्थन कर रही हैं और वाहन वारंटी के साथ अपने उत्पाद बाजार में उतारती हैं। उन्होंने लोगों से समस्याएं होने पर सीधे मंत्रालय को लिखने की अपील की थी, लेकिन अब तक कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई।

माइलेज को लेकर उठ रहे सवालों पर गडकरी ने स्वीकार किया कि एथेनॉल की ऊष्मीय क्षमता पेट्रोल से कम होती है, इसलिए ई20 इस्तेमाल करने पर माइलेज में मामूली कमी आ सकती है। हालांकि उनका कहना है कि शहरों के सामान्य ट्रैफिक में इसका असर लगभग महसूस नहीं होगा और केवल हाई-स्पीड ड्राइविंग के दौरान ही थोड़ा अंतर दिखाई दे सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी वाहन का वास्तविक माइलेज सामान्य उपभोक्ता स्वयं सटीक रूप से नहीं माप सकता, इसके लिए अधिकृत परीक्षण की आवश्यकता होती है।

एथेनॉल नीति को लेकर अपने परिवार के चीनी उद्योग से जुड़े होने के कारण उठे हितों के टकराव के आरोपों को भी गडकरी ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनके पुत्रों का कारोबार स्वतंत्र रूप से संचालित होता है और एथेनॉल उसका केवल छोटा हिस्सा है। एथेनॉल की कीमत केंद्र सरकार का मंत्रिमंडल तय करता है, इसलिए इसमें उनका कोई प्रभाव नहीं है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एथेनॉल उत्पादन अब केवल गन्ने तक सीमित नहीं है, बल्कि मक्का, चावल, फसल अवशेष और बांस जैसे स्रोतों से भी किया जा रहा है, जिससे किसानों को लाभ और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है।

हम आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने एक अप्रैल से देशभर के पेट्रोल पंपों पर ई20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य कर दी है। सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, किसानों की आय बढ़ेगी और प्रदूषण कम होगा। वहीं, कुछ वाहन मालिकों और विशेषज्ञों ने पुराने वाहनों की अनुकूलता, इंजन प्रदर्शन और माइलेज पर इसके असर को लेकर चिंता जताई है। इन आशंकाओं के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय हाल ही में 10 बिंदुओं का विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर चुका है, जिसमें वैज्ञानिक परीक्षणों, नियामकीय सुरक्षा उपायों और अंतरराष्ट्रीय अनुभवों का हवाला देते हुए कहा गया है कि ई20 कार्यक्रम सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल है।

बहरहाल, रायपुर उपभोक्ता आयोग का ताजा फैसला और केंद्र सरकार का अडिग रुख इस बहस को और तेज कर सकता है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि वाहन कंपनियां इस आदेश पर क्या रुख अपनाती हैं और क्या भविष्य में ई20 अनुकूलता को लेकर उपभोक्ताओं को अधिक स्पष्ट जानकारी देना उद्योग के लिए अनिवार्य मानक बनता है। फिलहाल तो यह मामला संसद के मॉनसून सत्र में उठाने की विपक्ष पूरी तैयारी कर चुका है। ऐसे में देखना होगा कि क्या विपक्ष के हमलों के बाद सरकार कोई राहत देती है या नहीं।

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Tirupati Temple में 24 घंटे के अंदर 97 Crore का महादान, New Policy लागू होने से पहले मची दानवीरों में होड़

तिरुमाला के तिरुपति बालाजी मंदिर में दान देने वालों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे देवस्थानम बोर्ड ने 24 घंटों में रिकॉर्ड 96.98 करोड़ रुपये जमा किए। यह अचानक आई तेज़ी कोई इत्तेफ़ाक नहीं थी। यह होड़ इसलिए मची थी ताकि 15 जुलाई की आधी रात को नई दानकर्ता नीति लागू होने से पहले ही दान दिया जा सके। नई नीति में न केवल दानकर्ताओं को मिलने वाली सुविधाओं और विशेषाधिकारों में बड़े बदलाव किए गए हैं, बल्कि उन आजीवन लाभों को भी खत्म कर दिया गया है जो दानकर्ताओं को अब तक मिलते थे। पुराने दानकर्ताओं (यानी जिन्होंने 15 जुलाई से पहले दान दिया था) को आजीवन लाभ मिलते रहेंगे। यही वजह है कि मंगलवार को रात के 12 बजने से ठीक पहले दान में इतनी भारी बढ़ोतरी देखी गई।

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तिरुपति को 97 करोड़ रुपये का दान

डेक्कन क्रॉनिकल की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को 2,460 दानदाताओं ने दान दिया। इनमें से 1,212 दानदाताओं ने 1 से 10 लाख रुपये के बीच और 1,246 दानदाताओं ने 10 से 25 लाख रुपये के बीच दान दिया। दो भक्तों ने 1 करोड़ रुपये से ज़्यादा का दान दिया। दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में से एक इस मंदिर में हाल के वर्षों में दानदाताओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसकी कुल संपत्ति लगभग 3.38 लाख करोड़ रुपये है - यह रकम कई छोटे देशों की जीडीपी से भी ज़्यादा है। 2025-26 में, इसकी हुंडी (दान पेटी) में आया दान 1,738 करोड़ रुपये से ज़्यादा रहा, जो औसतन रोज़ाना 4.75 करोड़ रुपये के बराबर है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 1,97,888 रजिस्टर्ड डोनर हैं। इनमें से लगभग 1.5 लाख लोगों ने 1 लाख रुपये या उससे ज़्यादा का योगदान दिया, और करीब 22,000 लोगों ने 10 लाख रुपये से ज़्यादा दान किए। मंदिर का प्रबंधन करने वाले तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) बोर्ड ने कहा कि दान देने वालों की संख्या में बढ़ोतरी के कारण विशेष सुविधा नीति में बदलाव करना ज़रूरी हो गया था। एक मीडीया रिपोर्ट के अनुसार TTD के चेयरमैन BR नायडू ने कहा कि पिछले चार महीनों में सिर्फ़ 10 लाख रुपये दान करने वालों की संख्या में लगभग 3,000 की बढ़ोतरी हुई है... इन बदलावों का मकसद दान के मैनेजमेंट में ज़्यादा पारदर्शिता और एकरूपता लाना है। मंगलवार आधी रात से लागू हुई नई पॉलिसी, दान करने वालों और आम श्रद्धालुओं, दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाती है। TTD का कहना है कि आम तीर्थयात्रियों के लिए दर्शन के मौकों को बेहतर बनाने के लिए दान करने वालों को मिलने वाली कुछ सुविधाओं को कम किया गया है।

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तिरुपति में नई डोनेशन पॉलिसी क्या है?

TTD ने डोनेशन की रेंज-बेस्ड कैटेगरी (स्लैब) को खत्म कर दिया है। इसके बजाय, अब डोनेशन की रकम के आधार पर दान करने वालों को चार कैटेगरी में बांटा जाएगा। नई पॉलिसी में व्यक्तिगत दानदाताओं और संस्थाओं या ट्रस्टों के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। पहले, दानदाताओं को जीवन भर खास सुविधाएं मिलती थीं। इनमें स्पेशल एंट्री दर्शन, सुपाथम एंट्री (गर्भगृह में जाने की सुविधा), ब्रेक दर्शन, सुप्रभातम सेवा (सुबह होने से पहले की पूजा-अर्चना में शामिल होने की सुविधा), कल्याणोत्सवम (भगवान वेंकटेश्वर की प्रतीकात्मक वैदिक शादी जो हर दिन होती है) में शामिल होना, रहने की सुविधा और लड्डू, रेशमी कपड़े, सोने और चांदी के सिक्के जैसे उपहार शामिल थे। नई पॉलिसी के तहत, दानदाताओं को मिलने वाली सुविधाएं व्यक्तियों के लिए 20 साल और संस्थाओं या ट्रस्टों के लिए 15 साल तक ही मान्य होंगी - यह एक बड़ा बदलाव है।

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ENG vs IND: दूसरे ODI का समय बदला, 2 घंटे देरी से होगा शुरू, जानें कहां देख सकते हैं LIVE

ENG vs IND 2nd ODI: भारत बनाम इंग्लैंड के बीच दूसरा वनडे मुकाबला आज खेला जाएगा। भारत इस सीरीज में 1-0 से पहले ही आगे हैं। दूसरे मैच का समय बदल चुका है। आइए जान लेते हैं कब से खेला जाएगा। Thu, 16 Jul 2026 16:02:57 +0530

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