Andy Burnham को Donald Trump की सहयोगी सूसी विल्स के नाम से मिले फर्जी संदेश
अदिति खन्ना लंदन, 18 अगस्त ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम को कथित तौर पर एक ऐसे व्यक्ति से संदेशों का आदान-प्रदान करने के लिए गुमराह किया गया, जिसने खुद को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का करीबी सहयोगी बताया था। मीडिया में आई एक खबर में यह जानकारी दी गई। अमेरिकी डिजिटल समाचारपत्र ‘पॉलिटिको’ ने बताया कि बर्नहैम ने व्हाइट हाउस की ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ सूसी विल्स होने का दावा करने वाले व्यक्ति से बातचीत की, लेकिन बाद में उन्हें उस व्यक्ति की पहचान पर संदेह हुआ।
ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री ने 20 जुलाई को 10 डाउनिंग स्ट्रीट का कार्यभार संभाला था और बताया जाता है कि उन्होंने अपने नए पद की जिम्मेदारी संभालने से पहले तथा उसके बाद कुछ दिन तक इन फर्जी संदेशों का जवाब दिया। डाउनिंग स्ट्रीट ने कहा, ‘‘हम राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर टिप्पणी नहीं करते।’’ हालांकि, समाचारपत्र ने मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के हवाले से सोमवार को बताया कि ‘‘कुछ संदेशों’’ का आदान-प्रदान हुआ था, लेकिन उनका ‘‘कोई महत्व नहीं’’ था। व्यक्ति ने कहा कि संदेशों के संदिग्ध होने का पता चलते ही इसकी सूचना ‘‘तुरंत’’ संबंधित अधिकारियों को दे दी गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, बर्नहैम और विल्स होने का दावा करने वाले व्यक्ति के बीच संपर्क केवल संदेशों तक सीमित रहा और दोनों के बीच फोन पर कोई बातचीत नहीं हुई। ‘पॉलिटिको’ ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि ब्रिटिश दूतावास इस घटना को लेकर इतना चिंतित था कि उसने यह मामला व्हाइट हाउस के समक्ष उठाया। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘इस घटना का ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ के उपकरणों के हैक होने से कोई संबंध नहीं है।’’ पिछले साल व्हाइट हाउस और संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) ने उस घटना की जांच शुरू की थी, जिसमें अमेरिकी सीनेटरों, गवर्नर और कारोबारी अधिकारियों को एक ऐसे व्यक्ति की ओर से संदेश तथा फोन आया, जो ट्रंप के कार्यालय में ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ होने का दावा कर रहा था।
‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने उस समय खबर दी थी कि विल्स ने अपने सहयोगियों को बताया था कि उनके मोबाइल फोन के संपर्क हैक कर लिए गए थे। उस समय ट्रंप ने कहा था, ‘‘कोई सूसी की नकल नहीं कर सकता। सूसी केवल एक है।’’ ट्रंप की करीबी सहयोगी विल्स को 2024 में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े एक साइबर जासूसी समूह ने भी निशाना बनाया था।
Zamboanga, Philippines में छात्र ने सहपाठी को गोली मारी, खुद की भी जान ली
दक्षिणी फिलीपीन में एक विश्वविद्यालय परिसर के अंदर बने माध्यमिक स्कूल में दो बंदूकें लेकर पहुंचे छात्र ने अपने ही एक सहपाठी की गोली मारकर हत्या कर दी और फिर खुद को भी गोली मार ली। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि घटना के बाद स्कूल से सैकड़ों छात्रों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
जाम्बोआंगा शहर के मेयर खाइमर अदन ओलासो ने कहा कि संदिग्ध ने जाम्बोआंगा विश्वविद्यालय परिसर में स्थित माध्यमिक स्कूल में घटना की ‘लाइव स्ट्रीमिंग’ करने के लिए अपने शरीर पर बॉडी कैमरा पहन रखा था। उन्होंने बताया कि इस घटना में दो अन्य लोग घायल हुए हैं। ओलासो ने ‘डीजेडबीबी’ रेडियो नेटवर्क के अनुसार, संदिग्ध ने शुरू में एक शिक्षक पर गोली चलाई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि शिक्षक को गोली लगी या नहीं।
इसके बाद उसने अपने ही एक सहपाठी को गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। फिर उसने खुद को भी गोली मार ली। गोलीबारी की आवाज सुनाई देने के बाद सैकड़ों छात्रों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
यह घटना माध्यमिक स्कूल की इमारत में हुई। संबंधित परिसर बंदरगाह शहर जाम्बोआंगा में स्थित कैथोलिक विश्वविद्यालय के उस बड़े परिसर से अलग है जहां उसके महाविद्यालय और व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। गोलीबारी के कुछ घंटों बाद पुलिस ने कहा कि हालात काबू में हैं।
इसने छात्रों के माता-पिता और अभिभावकों से शांत रहने तथा बच्चों को ले जाने के लिए स्कूल की सलाह और निर्देशों का पालन करने को कहा। पुलिस प्रमुख जोस मेलेंसियो नार्टाटेज जूनियर ने कहा, ‘‘अधिकारी फिलहाल घटना के कारणों और परिस्थितियों का पता लगा रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि पुलिस जरूरत के मुताबिक सत्यापित जानकारी उपलब्ध कराएगी और लोगों से अपुष्ट खबरें, तस्वीरें या वीडियो साझा करने से बचने की अपील की जिनसे बेवजह चिंता पैदा हो सकती है।’’ नार्टाटेज ने कहा, ‘‘हम स्कूल प्रशासन, माता-पिता, अभिभावकों और समुदाय का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने अधिकारियों की जांच के दौरान धैर्य, सहयोग और समझदारी का परिचय दिया।’’ गोलीबारी की यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पुलिस ने भरोसा दिलाया था कि देश भर के स्कूलों में सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। इससे पहले जून में सेंट्रल टैकलोबन शहर में हुई गोलीबारी में माध्यमिक स्कूल के तीन छात्रों की मौत हो गई थी और कम से कम 20 लोग घायल हो गए थे।
पुलिस ने उस गोलीबारी को अंजाम देने के आरोप में 14 और 15 साल के दो छात्रों को गिरफ्तार किया था। फिलीपीन में बंदूक के इस्तेमाल से जुड़े अपराध की घटनाएं आम हैं। इसकी एक वजह बिना लाइसेंस वाले हथियारों की बढ़ती संख्या है, हालांकि स्कूलों में गोलीबारी की घटनाएं अपेक्षाकृत कम होती हैं।
फिलीपीन में हुई यह गोलीबारी थाईलैंड में एक स्कूल में हुई गोलीबारी की घटना के दो सप्ताह से भी कम समय बाद हुई है। बैंकॉक के पास नोंथाबुरी प्रांत में 14 साल के लड़के द्वारा अपने दादा-दादी, स्कूल के पांच कर्मचारियों और 12 साल की लड़की की हत्या किए जाने की घटना के बाद थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देश में बंदूकों पर नियंत्रण कड़ा करने के लिए कदम उठाए हैं। एशिया में थाईलैंड में बंदूक रखने की दर पाकिस्तान के बाद दूसरे स्थान पर है और यह उसके दक्षिण-पूर्व एशियाई पड़ोसी देशों की तुलना में काफी अधिक है।
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