MP के सरकारी स्कूलों में 29 जुलाई तक मनाया जाएगा गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा, भाषण, निबंध, योग, पौधरोपण जैसे कई कार्यक्रम होंगे आयोजित
मध्य प्रदेश के सभी शासकीय विद्यालयों में बुधवार से गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा 2026 की शुरुआत हो गई है। दरअसल पहले दिन स्कूलों में मां सरस्वती और गुरु वंदना के साथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। यह अभियान 15 जुलाई से 29 जुलाई तक चलेगा। वहीं इस दौरान प्रदेशभर के स्कूलों में रोज अलग-अलग गतिविधियां कराई जाएंगी। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजन करने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल इस पखवाड़े के दौरान विद्यार्थियों के लिए भाषण प्रतियोगिता, निबंध लेखन, गुरु वंदना, भजन प्रस्तुति, योग, ध्यान, स्वास्थ्य जागरूकता, करियर मार्गदर्शन और प्रेरक व्याख्यान जैसी गतिविधियां रखी गई हैं। इसके अलावा मेरे जीवन में गुरु विषय पर निबंध प्रतियोगिता भी होगी। इसके साथ ही विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी कार्यक्रम इस तरह आयोजित किए जाएंगे ताकि नियमित कक्षाएं प्रभावित न हों और हर गतिविधि तय समय में पूरी की जा सके।
गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा 2026 में कब होगी कौन-सी गतिविधि?
वहीं शिक्षा विभाग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार 16 जुलाई से 27 जुलाई के बीच हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों के विद्यार्थियों को नजदीकी सांदीपनि विद्यालयों का शैक्षणिक भ्रमण कराया जाएगा। यहां छात्र आधुनिक शिक्षण पद्धति, विज्ञान प्रयोग, प्रोजेक्ट आधारित पढ़ाई और डिजिटल तकनीक से जुड़ी गतिविधियों को देख सकेंगे। इसके साथ ही विद्यार्थियों और शिक्षकों द्वारा किए गए नवाचारों की भी जानकारी दी जाएगी।
27 जुलाई को स्वच्छता अभियान को लेकर जनजागरूकता रैली
दरअसल 24 जुलाई को ‘एक गुरु एक वृक्ष’ अभियान चलाया जाएगा। वहीं इस दिन स्कूल परिसर और आसपास पौधरोपण होगा। प्रत्येक पौधे को किसी शिक्षक के नाम समर्पित किया जाएगा और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी विद्यार्थियों को दी जाएगी। छोटे बच्चों द्वारा गुरु सम्मान संदेश और नेम प्लेट भी तैयार की जाएंगी। जबकि 25 जुलाई को पालक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) आयोजित होगी, जिसमें छात्रों की पढ़ाई, उपस्थिति और शैक्षणिक प्रगति पर चर्चा की जाएगी। बेहतर परीक्षा परिणाम देने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों का सम्मान भी किया जाएगा। 27 जुलाई को स्वच्छता अभियान और जनजागरूकता रैली निकाली जाएगी, जबकि 28 जुलाई को गुरु-शिष्य प्रेरणा संवाद कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें वरिष्ठ शिक्षक और पूर्व विद्यार्थी अपने अनुभव साझा करेंगे।
सांदीपनि विद्यालयों में होंगे विशेष आयोजन
वहीं गुरु पूर्णिमा पखवाड़े के दौरान प्रदेश के सांदीपनि विद्यालयों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यहां आने वाले विद्यार्थियों को विज्ञान प्रदर्शनी, विज्ञान के प्रयोग, प्रोजेक्ट आधारित गतिविधियां, डिजिटल और एआई आधारित प्रस्तुतियां दिखाई जाएंगी। इसके अलावा विद्यार्थियों और शिक्षकों के नवाचारों की जानकारी भी दी जाएगी। मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान करने का भी कार्यक्रम रखा गया है। इन आयोजनों का उद्देश्य दूसरे स्कूलों के विद्यार्थियों को भी सांदीपनि विद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों से परिचित कराना है।
29 जुलाई को होगा समापन
दरअसल इस पखवाड़े का समापन 29 जुलाई को होगा। समापन समारोह में भाषण, निबंध, योग, पौधरोपण और अन्य प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कार दिए जाएंगे। जिला स्तर पर 90 प्रतिशत या उससे अधिक परीक्षा परिणाम देने वाले प्राचार्यों और शिक्षकों का सम्मान किया जाएगा। विद्यालय स्तर पर सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी सम्मानित किया जाएगा। शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि सभी कार्यक्रमों में विद्यालय प्रबंधन समिति, अभिभावक, पूर्व विद्यार्थी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि आयोजन व्यापक स्तर पर सफल हो सके।
पंजाब- फरार हत्यारे की जगह चली DSP की फोटो:एक जैसा नाम होने से फंसे मलोट के अफसर; तस्वीर देख रिश्तेदारों के आने लगे फोन
पंजाब के चर्चित जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड के दोषी और पैरोल मिलने के बाद फरार हुए पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह के 'नाम' का खामियाजा अब मलोट के वर्तमान डीएसपी जसपाल सिंह को भुगतना पड़ रहा है। केवल नाम की समानता के कारण सोशल मीडिया और कई चैनलों पर मलोट के डीएसपी जसपाल सिंह धालीवाल की फोटो को जसवंत सिंह खालड़ा के हत्यारे के रूप में दिखाया जा रहा है। इससे आहत डीएसपी मलोट ने स्पष्ट किया है कि वह इस मानहानि को लेकर केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और संबंधित चैनल्स को कानूनी नोटिस भेजेंगे। उनका कहना है कि फोटो लगाकर उनको बदनाम किया गया है और कई लोग तो उन्हें ही हत्यारा समझने लगे हैं। डीएसपी मलोट ने क्या क्या कहा जानिए... पैरोल पर आया, फिर नहीं लौटा जसपाल मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहा पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह नाभा की ओपन एग्रीकल्चरल जेल में बंद था। वह पैरोल पर बाहर आया था, लेकिन समय पूरा होने के बाद भी वापस जेल नहीं लौटा और फरार हो गया। नाभा जेल प्रशासन ने पुलिस को उसे ढूंढने के निर्देश जारी किए हैं। वर्तमान में 'सतलुज' फिल्म को लेकर यह मुद्दा पंजाब की सियासत में बेहद गर्म है, जिस कारण मीडिया में यह खबर प्रमुखता से चल रही है, लेकिन लापरवाही में निर्दोष डीएसपी मलोट की फोटो को दोषी की जगह इस्तेमाल कर दिया गया। फरार जसपाल सिंह पर आरोप फरार पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह पर 6 सितंबर 1995 को मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का अमृतसर स्थित घर के बाहर से अपहरण करने वाली पुलिस टीम का नेतृत्व करने और पूरी साजिश में शामिल होने का आरोप है। आरोप है कि खालड़ा को अगवा कर अवैध रूप से झबाल थाने में रखा गया, जहां उनके साथ अमानवीय शारीरिक प्रताड़ना की गई। बाद में पुलिस हिरासत में ही उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी गई और सबूत मिटाने के लिए शव को हरीके के पास नहर में फेंक दिया गया। इस मामले में नवंबर 2005 में पटियाला की विशेष CBI अदालत ने जसपाल सिंह को अपहरण, हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 2007 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा। इसके अलावा, स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह के रिश्तेदार कुलजीत सिंह धत्त के अपहरण और हत्या की साजिश के मामले में भी 2014 में उसे 5 साल के कठोर कारावास की सजा मिली।




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