Responsive Scrollable Menu

रक्षाबंधन पर बदलें स्टाइल गेम, सूट-साड़ी छोड़ ओल्ड साड़ी से बनवाएं इंडो प्लेसूट

Raksha Bandhan 2026 Outfit: रक्षाबंधन पर नया आउटफिट खरीदने के बजाय मम्मी की पुरानी साड़ी से बनवाएं Trendy Playsuit। देखें बनारसी से स्टोन साड़ी रीक्रिएट करने के आइडियाज।

Continue reading on the app

ऑपरेशन सिंदूर में शहीद के परिवार ने नहीं लिया सम्मान:पलवल में मूर्ति के ₹1.90 लाख के बिल अटके; अनावरण में विधायक-प्रशासन नहीं पहुंचे

ऑपरेशन सिंदूर के शहीद लांस नायक दिनेश शर्मा के परिजनों ने स्वतंत्रता दिवस पर मिलने वाला सम्मान लेने से इनकार कर दिया। परिवार का आरोप है कि शहीद की मूर्ति बनवाने में करीब 1.90 लाख रुपए खर्च किए गए, लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी इस राशि के बिलों का भुगतान नहीं हुआ। परिवार का कहना है कि प्रशासन की ओर से जल्द भुगतान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक उन्हें केवल अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। परिवार ने शहीद के सम्मान में आयोजित कार्यक्रमों को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि 7 मई को शहीद की मूर्ति का अनावरण होना था। इसके लिए होडल के BJP विधायक हरेंद्र रामरतन को घर जाकर कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुलाया गया था, लेकिन न विधायक पहुंचे और न ही प्रशासन का कोई बड़ा अधिकारी आया। परिवार का सवाल है कि जब शहीद की मूर्ति के अनावरण में प्रशासन और जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचे तो स्वतंत्रता दिवस पर मिलने वाला सम्मान लेने का क्या मतलब है। पत्नी बोली- CM की दो घोषणाएं भी पूरी नहीं हुई शहीद की पत्नी सीमा ने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सैनी ने 15 मई 2025 को परिवार से मुलाकात के दौरान गांव मोहम्मदपुर का नाम बदलकर दिनेशपुर करने और शहीद के नाम पर पार्क बनाने की घोषणा की थी। दोनों घोषणाएं अब तक पूरी नहीं हुई हैं। परिवार ने स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखने और गांव के प्रवेश द्वार पर उनका नाम लिखने की भी मांग की थी। इनमें से केवल स्कूल का नाम बदला गया है। DC के PA बोले- भुगतान की प्रक्रिया अंतिम चरण में DC डॉ. जयेंद्र छिल्लर के पीए ने बताया कि मूर्ति के बिलों के भुगतान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जिला परिषद की ओर से बिलों का भुगतान किया जाना है। डीसी कार्यालय से फाइल जिला परिषद के सीईओ के पास भेज दी गई है। जल्द ही सभी बिलों का भुगतान कर दिया जाएगा। वहीं, शहीद परिवार के सम्मान लेने से इनकार करने की जानकारी होने से होडल SDM बलीना राणा ने इनकार किया। उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यह शहीद के परिवार के लोग ही बता सकते हैं। विधायक हरेंद्र रामरतन ने कहा कि मैंने अपने निजी कोष से परिवार को 40 लाख रुपए की सहायता की। जिस दिन मूर्ति के अनावरण का प्रोग्राम था, उस दिन मेरे कहीं और प्रोग्राम पहले से तय थे। दूसरा, मुझे टाइम शेड्यूल का नहीं पता था। इसलिए मैं पहुंच नहीं पाया था। अब जानिए कौन है दिनेश शर्मा और कैसे शहीद हुए…. पलवल के मोहम्मदपुर गांव के रहने वाले पलवल की होडल विधानसभा के गांव मोहम्मदपुर में 30 जनवरी 1993 को दिनेश शर्मा का जन्म हुआ था। वह 15 सितंबर 2014 को भारतीय सेना की 5 एफडी रेजीमेंट में भर्ती हुए। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटे और एक बेटी हैं। सबसे छोटे बेटे की उम्र 10 साल है। दिनेश अपने परिवार में पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके दो छोटे भाई कपिल और हरदत्त भी सेना में अग्निवीर हैं। एक भाई पुष्पेंद्र पढ़ाई कर रहा है, जबकि विष्णु खेती में पिता का साथ देते हैं। शहीद की पत्नी सीमा देवी को हरियाणा सरकार ने शिक्षा विभाग में क्लर्क की नौकरी दी है। यह नौकरी शहीद परिवार को मिलने वाली सरकारी सहायता के तहत दी गई है। इससे पहले वह वकालत करती थीं। 7 मई को पुंछ में शहीद हुए दिनेश शर्मा दिनेश शर्मा जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके में एलओसी पर तैनात थे। 7 मई 2025 को भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर के तहत की गई एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान की ओर से सीमा पर गोलीबारी की गई। पाकिस्तान की ओर से फायरिंग शुरू होने पर दिनेश अपने साथियों के साथ जवाबी कार्रवाई कर रहे थे। इसी दौरान पाकिस्तानी तरफ से एक बम उनके सामने गिरा। ब्लास्ट में दिनेश और उनके चार साथी घायल हो गए। बाद में अस्पताल में दिनेश ने दम तोड़ दिया। शहादत से कुछ समय पहले ही उन्हें लांस नायक के पद पर प्रमोशन मिला था। श्रद्धांजलि सभा के खर्च को लेकर भी विवाद शहीद का पार्थिव शरीर 8 मई को उनके गांव पहुंचा था, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। 20 मई को श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। शहीद के पिता का आरोप है कि श्रद्धांजलि सभा के खर्च के नाम पर सरपंच कुमार युगपुरुष के पिता भूपराम पाठक ने उनसे कुल 52 हजार रुपए लिए। पिता के मुताबिक 17 मई को उन्होंने घर पर 22 हजार रुपए नकद दिए। इसके बाद अलग-अलग समय पर 10 हजार, 5 हजार और 15 हजार रुपए लिए गए। उन्हें बताया गया था कि बाद में पंचायत के बजट से यह राशि दे दी जाएगी। हालांकि भूपराम पाठक ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी से कोई पैसा नहीं लिया और श्रद्धांजलि सभा का पूरा खर्च अपनी जेब से किया। पार्क और गांव का नाम बदलने पर क्या हुआ शहीद का अंतिम संस्कार जिस जमीन पर हुआ, वहीं शहीदी स्थल और पार्क बनाने की बात कही गई थी। सरपंच भूपराम पाठक के मुताबिक यह 4 कनाल 11 मरले जमीन है और जिस स्थान पर पार्क बनाने की घोषणा हुई है, वह जोहड़ के नाम पर दर्ज है। उनका कहना है कि पंचायत वहां पार्क नहीं बना सकती। इस संबंध में पंचायत ने प्रस्ताव डीसी को भेजा था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिली। गांव का नाम बदलने के लिए 29 जुलाई को अधिकारियों की देखरेख में ग्राम सभा की बैठक हुई। गांव की आबादी करीब 1,200 है और 620 वोटर हैं। बैठक में 152 लोग शामिल हुए। BDPO नरेश के मुताबिक ग्राम सभा में प्रस्ताव रखा गया, लेकिन गांव का नाम मोहम्मदपुर से दिनेशपुर करने पर सहमति नहीं बनी। इसके बाद उपस्थित लोगों के हस्ताक्षर लेकर डीसी को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी गई। भाई का आरोप- लाइब्रेरी और स्मारक का काम अधूरा शहीद के भाई पुष्पेंद्र ने बताया कि गांव में बनाई जा रही लाइब्रेरी अधूरी पड़ी है। शहीद स्मारक का काम भी पूरा नहीं हुआ है। गांव के दोनों प्रवेश द्वारों पर दिनेश शर्मा का नाम नहीं लिखा गया और उनके नाम पर गांव के मार्ग का नाम भी नहीं बदला गया। उनका कहना है कि पार्क निर्माण के लिए अभी तक जगह तय नहीं हुई है और गांव का नाम बदलने की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ी है। 13 महीने बाद राष्ट्रीय स्तर पर सामने आया नाम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह जवानों के नाम केंद्र सरकार ने 13 महीने बाद आधिकारिक रूप से सार्वजनिक किए। इन नामों को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की वेबसाइट के 'रोल ऑफ ऑनर' में शामिल किया गया। इनमें पलवल के गांव मोहम्मदपुर निवासी लांस नायक दिनेश कुमार का नाम भी शामिल है। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की 3D वॉल पर 2025 के खंड में भी दिनेश कुमार का नाम अंकित किया गया है। स्मारक के 'त्याग चक्र' में ग्रेनाइट की 16 गोलाकार दीवारें हैं, जिन पर आजादी के बाद देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के नाम, रैंक और यूनिट दर्ज हैं। छह शहीदों में से दो को मरणोपरांत वीरता सम्मान भी मिला है। राइफलमैन सुनील कुमार को मरणोपरांत वीर चक्र और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को वायु सेना मेडल दिया गया।

Continue reading on the app

  Sports

Yashasvi Jaiswal: 2 साल में जितनी बार यशस्वी जायसवाल जीरो पर आउट हुए, उतना कोई बल्लेबाज नहीं हुआ

Yashasvi Jaiswal Duck: गॉल टेस्ट की दूसरी पारी में यशस्वी जायसवाल बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट गए. वो 3 गेंदें खेलने के बाद डक हुए. Tue, 18 Aug 2026 11:30:06 +0530

  Videos
See all

Chhatarpur NagPanchami Kushti Viral Video : नागपंचमी पर छतरपुर में लगा कुश्ती का मेला ! #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-18T04:30:11+00:00

Iran America War Update: ईरान का अमेरिका पर जोरदार हमला? | Hormuz | Mojtaba Khamenei | Trump #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-18T04:30:15+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers