बिहार में बकरी पालन शुरू करने के लिए मिल रहा है 90% तक का अनुदान, जानें सरकार की इस योजना के फायदे
Bihar Goat Farming Scheme: बिहार में इन दिनों पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन का चलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है. गांव हो या शहर, हर उम्र के लोग अब मुर्गी पालन, गौ पालन और बकरी पालन जैसे व्यवसायों में गहरी रुचि दिखा रहे हैं. युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक का रुझान इस क्षेत्र में बढ़ा है क्योंकि इसमें कम लागत में बेहतर मुनाफा कमाने की अच्छी संभावनाएं हैं. पशुपालन के इसी बढ़ते दायरे को देखते हुए बिहार सरकार भी पूरी तरह से किसानों और इच्छुक पशुपालकों के साथ खड़ी है.
बेहद कम दाम में सरकार उपलब्ध कराती है 3 बकरियां
सरकार की ओर से कई ऐसी योजनाएं चलाई जा रही हैं जिनकी मदद से बहुत ही कम पैसे लगाकर नया व्यवसाय शुरू किया जा सकता है. इन्हीं लाभकारी योजनाओं में से एक सबसे खास योजना है समेकित बकरी एवं भेड़ विकास योजना, जो राज्य के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभा रही है. इस योजना के तहत सरकार बहुत ही कम दाम में लोगों को 3 बकरियां उपलब्ध कराती है.
रोजगार के लिए सरकार देगी भारी सब्सिडी
समेकित बकरी एवं भेड़ विकास योजना बिहार सरकार की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना है. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और लोगों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है. इस योजना के तहत प्रत्येक चयनित लाभार्थी को व्यवसाय शुरू करने के लिए 3 बकरियां दी जाती हैं. सरकार इस योजना में अलग-अलग वर्गों के हिसाब से भारी अनुदान यानी सब्सिडी दे रही है. अगर कोई आवेदक अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग से आता है, तो सरकार उसे 90 प्रतिशत तक का भारी अनुदान देती है.
कुल कीमत का चुकाना पड़ता है 10 प्रतिशत
इसका मतलब यह हुआ कि उन्हें बकरियों की कुल कीमत का सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्सा ही चुकाना पड़ता है. वहीं दूसरी ओर सामान्य वर्ग और ओबीसी श्रेणी के आवेदकों के लिए भी सरकार ने 80 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था की है, जिसके कारण उन्हें बकरियों की कीमत का केवल 20 प्रतिशत हिस्सा देना होता है.
कैसे होता है लाभार्थियों का चयन?
इस बेहतरीन योजना को जमीन पर उतारने के लिए सरकार हर साल राज्य के सभी जिलों के लिए एक खास लक्ष्य तय करती है. इसी तय लक्ष्य के आधार पर जिलों में बकरियां बांटने की प्रक्रिया पूरी की जाती है. जहानाबाद के पशुपालन कार्यालय में कार्यरत अधिकारियों के अनुसार, हर साल इस योजना के तहत जिलेवार लक्ष्य भेजे जाते हैं. जब जिले को लक्ष्य मिल जाता है, तब इच्छुक लोग इस योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन जमा कर सकते हैं.
आवेदन के बाद होती है स्क्रीनिंग
आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभाग की एक विशेष टीम सभी आवेदनों की जांच यानी स्क्रीनिंग करती है. स्क्रीनिंग की प्रक्रिया में जो आवेदक सही पाए जाते हैं, उनका चयन इस योजना के लिए कर लिया जाता है. इसके बाद सरकार द्वारा अधिकृत की गई विशेष एजेंसी के माध्यम से ही चयनित लाभार्थियों को अच्छी नस्ल की बकरियां उपलब्ध कराई जाती हैं.
कितने पैसे में मिलेगी बकरी?
अगर इस योजना के तहत 3 बकरियों की कुल सरकारी कीमत 15000 रुपये तय की जाती है, तो सब्सिडी के बाद लाभार्थियों को बहुत ही मामूली रकम देनी होती है. सामान्य वर्ग के लाभार्थी को 80 प्रतिशत की छूट के बाद केवल 3000 रुपये चुकाने होंगे. वहीं अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लाभार्थी को 90 प्रतिशत की भारी छूट के बाद मात्र 1500 रुपये में 3 बकरियां मिल जाती हैं.
नजदीकी साइबर कैफे में कर सकते हैं आवेदन
वर्तमान समय की बात करें तो वर्ष 2026-27 के लिए अभी नया लक्ष्य जिलों में आना बाकी है, लेकिन बीते वर्ष 2025-26 में जहानाबाद जिले को 85 का लक्ष्य मिला था, जिसमें से बजट आवंटन के अनुसार 56 लाभार्थियों को लाभ देने की योजना आई थी. इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए 39 और सामान्य वर्ग के लिए 17 का लक्ष्य शामिल था. जो भी व्यक्ति इस योजना का लाभ उठाकर अपना खुद का काम शुरू करना चाहता है, वह अपने नजदीकी साइबर कैफे में जाकर या खुद सरकारी विभागीय पोर्टल पर जाकर आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर सकता है.
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Explainer: अर्जेंटीना को फीफा वर्ल्ड कप से बाहर करने की पिटीशन पर 75 लाख हस्ताक्षर, जानें इस विवाद की असली वजह
FIFA World Cup 2026: फीफा वर्ल्ड कप 2026 अब अपने आखिरी पड़ाव पर है. इस टूर्नामेंट में कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले. कुछ कमजोर टीमों ने बड़ा उलटफेर किया, तो वहीं कुछ टीमों ने अपने खेल से सभी को हैरान किया है. हालांकि, फीफा वर्ल्ड कप विवादों से भी खुद को बचा नहीं पाया. फीफा वर्ल्ड कप 2026 में कई विवाद हुए, जिन्होंने दुनियाभर के फुटबॉल फैंस का ध्यान अपनी ओर खींचा. इनमें से सबसे बड़ा विवाद अर्जेंटीना और मिस्र के बीच खेला गया राउंड ऑफ 16 का मैच था. इस मैच में रेफरी के फैसलों को लेकर काफी सवाल उठाए गए और सोशल मीडिया पर काफी हंगामा देखने को मिला. मेसी की कप्तानी वाली अर्जेंटीना का सामना दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड से होगा, लेकिन इस मैच से पहले अर्जेंटीना को टूर्नामेंट से बाहर करने के लिए सोशल मीडिया पर एक ऑनलाइन पिटीशन अभियान भी चलाया जा रहा है. अर्जेंटीना को बाहर करने की मांग को लेकर इस पिटीशन पर 75 लाख से अधिक लोग साइन कर चुके हैं. दरअसल, अर्जेंटीना को लेकर काफी फैंस ने ऐसे आरोप लगाए हैं कि रेफरी उनका साथ दे रहे हैं. तो चलिए जानते हैं कि आखिर इस पिटीशन के पीछे का सच क्या है?
अर्जेंटीना को बाहर करने के लिए क्या 75 लाख लोगों ने किया साइन?
सोशल मीडिया पर अर्जेंटीना को बाहर करने के लिए एक ऑनलाइन प्राइवेट वेबसाइट पर पिटीशन बहुत तेजी से वायरल हुई है, जिस पर 75 लाख से अधिक लोगों के साइन होने का दावा किया गया है. लेकिन आपको बता दें कि यह दावा पूरी तरह से भ्रामक और एक तकनीकी धोखा है, क्योंकि इस पिटीशन का फीफा या किसी भी अन्य आधिकारिक फुटबॉल फेडरेशन से कोई संबंध नहीं है. अर्जेंटीना की टीम टूर्नामेंट से बाहर नहीं होगी. यह टीम इंग्लैंड के खिलाफ अपना सेमीफाइनल मैच खेलेगी.
पिटीशन को साइन करने की क्या है वजह?
बता दें कि फीफा पर लगातार पक्षपात के आरोप लग रहे हैं. फैंस इसे लेकर काफी नाराज हैं और यही वजह है कि ऐसी कैंपेनिंग की जा रही है. इजिप्ट (मिस्र) और अर्जेंटीना के बीच खेला गया राउंड ऑफ 16 का मैच काफी विवादित रहा. फैंस ने तो इसे फीफा वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे विवादित फैसला बताया था. राउंड ऑफ-16 के मैच में अर्जेंटीना ने इजिप्ट के खिलाफ 2-0 से पिछड़ने के बाद आखिरी 13 मिनटों में 3 गोल करके 3-2 से रोमांचक जीत हासिल की थी. अर्जेंटीना ने इंजरी टाइम में गोल कर मैच को अपने नाम किया था. मोहम्मद सालाह पर हुए कथित फाउल के बावजूद अर्जेंटीना के विनिंग गोल को लीगल रखा गया. इतना ही नहीं, मोहम्मद सालाह को पेनाल्टी भी नहीं दी गई थी, जिसके बाद इजिप्ट के कोच होसाम हसन के साथ-साथ फैंस ने भी फीफा और रेफरी पर आरोप लगाते हुए मैच को फिक्स बताया था.
किस बात को लेकर भड़के हैं फुटबॉल फैंस
अब अर्जेंटीना को फीफा वर्ल्ड कप 2026 से बाहर करने के लिए सोशल मीडिया पर जिस वेबसाइट पर कैंपेन चल रहा है, उसका नाम argentinaout.com है. इस कैंपेन का कहना है कि, फीफा और रेफरी हमेशा लियोनेल मेसी और अर्जेंटीना की टीम का पक्ष लेते हैं. जब विनर पहले से ही फिक्स है, तो बाकी दुनिया मैच क्यों खेले? इस बात को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि फीफा ने दिसंबर में जो वर्ल्ड कप ड्रॉ प्रक्रिया बदली थी, उसकी वजह से अर्जेंटीना को सेमीफाइनल तक के लिए क्वालीफाई करने के लिए टॉप-10 रैंकिंग वाली किसी भी बड़ी टीम से मुकाबला नहीं हुआ.
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