वैभव सूर्यवंशी अगली बार कब मैदान पर उतरेंगे? आज ही नोट कर लीजिए डेट और टाइम
Vaibhav Sooryavanshi When Will Play Next Match: इंग्लैंड के साथ खेली गई 5 मैचों की टी-20 सीरीज के दूसरे मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू करने का मौका मिला. एजबेस्टन के मैदान पर 15 साल के वैभव ने डेब्यू किया और इतिहास रचा. वह भारत के लिए इंटरनेशनल मैच खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए. हालांकि, उनकी डेब्यू सीरीज वैसी नहीं रही, जैसी उन्होंने सोची होगी. मगर, अभी ये खिलाड़ी बहुत युवा है और यकीनन वह मजबूती से वापसी करेगा और बड़ी पारी खेलकर टीम इंडिया को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा. तो आइए जानते हैं कि वैभव सूर्यवंशी अगली बार मैदान पर कब उतरेंगे.
वैभव सूर्यवंशी अगली बार कब खेलेंगे?
भारतीय क्रिकेट टीम अभी इंग्लैंड के साथ 3 मैचों की वनडे सीरीज खेल रही है. इस सीरीज का अंत 19 जुलाई को खेले जाने वाले तीसरे वनडे मैच के साथ हो जाएगा. इसके बाद भारतीय टीम जिम्बाब्वे दौरे पर जाएगी, जहां दोनों टीमों के बीच 3 मैचों की टी-20 सीरीज खेली जाएगी, जिसकी शुरुआत 23 जुलाई से हो जाएगी. जिम्बाब्वे दौरे पर चुनी गई भारतीय टीम में वैभव सूर्यवंशी भी शामिल हैं. ऐसे में वह अगली बार वह आपको जिम्बाब्वे दौरे पर एक्शन में नजर आ सकते हैं. हालांकि, उन्हें प्लेइंग-11 में मौका मिलेगा या नहीं, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा.
The start of a special chapter ✨
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A proud moment as Vaibhav Sooryavanshi receives his #TeamIndia cap from Vice-Captain Tilak Varma ????
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डेब्यू सीरीज में वैभव सूर्यवंशी ने खेले 3 मैच
इंग्लैंड के साथ खेली गई 5 मैचों की टी-20 सीरीज में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को दूसरे मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू करने का मौका मिला था. एजबेस्टन में अपने डेब्यू मैच में वैभव कुछ खास नहीं कर पाए थे और महज 14 रन बनाकर विकेट गंवा बैठे थे. फिर अगले मैच में उन्हें खिलाया गया और वह 13 रन बनाकर आउट हुए और फिर अगले मैच में वह 15 रन बनाकर विकेट दे बैठे. ऐसे में लगातार 3 मैचों में जब वैभव प्रदर्शन नहीं कर सके, तो उन्हें प्लेइंग-11 से बाहर किया गया. अपनी डेब्यू सीरीज में 42 रन बनाए थे.
A historic day for Indian cricket ????
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Vaibhav Sooryavanshi makes his #TeamIndia debut at 1️⃣5️⃣ years, 9⃣9⃣ days ????#ENGvIND pic.twitter.com/qwS2hx4RW8
क्या वैभव सूर्यवंशी को जिम्बाब्वे के खिलाफ मिलेगा प्लेइंग-11 में मौका?
भारत और जिम्बाब्वे के बीच 23 जुलाई से खेली जाने वाली टी-20 सीरीज में वैभव सूर्यवंशी को शुरुआती मैचों में प्लेइंग-11 में मौका मिलना मुश्किल है. वह अभी युवा खिलाड़ी हैं और उन्हें अपने दूसरे मौके का इंतजार करना पड़ सकता है. चूंकि, टीम मैनेजमेंट अभिषेक शर्मा और प्रभसिमरन सिंह के साथ जा सकती है और ये दोनों खिलाड़ी पारी की शुरुआत करने मैदान पर उतर सकते हैं. हालांकि, अगर ये खिलाड़ी प्रदर्शन नहीं कर पाए या किसी प्रकार की इंजरी होती है, तो 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को बल्लेबाजी का मौका मिल सकता है.
नोट कर लीजिए जिम्बाब्वे दौरे का शेड्यूल
| मैच | तारीख | दिन | स्थान | समय (IST) |
|---|---|---|---|---|
| पहला टी20 | 23 जुलाई 2026 | गुरुवार | हरारे स्पोर्ट्स क्लब, हरारे | शाम 4:30 बजे |
| दूसरा टी20 | 25 जुलाई 2026 | शनिवार | हरारे स्पोर्ट्स क्लब, हरारे | शाम 4:30 बजे |
| तीसरा टी20 | 26 जुलाई 2026 | रविवार | हरारे स्पोर्ट्स क्लब, हरारे | शाम 4:30 बजे |
जिम्बाब्वे दौरे के लिए टीम इंडिया
श्रेयस अय्यर (कप्तान), वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा (उपकप्तान), ईशान किशन (विकेटकीपर), शिवम दुबे, सूर्यांश शेडगे, रिंकू सिंह, हर्ष दुबे, वरुण चक्रवर्ती, प्रिंस यादव, यश ठाकुर, अशोक शर्मा, मयंक यादव, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर)
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पंजाब सरकार की 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' स्ट्रोक मरीजों का बनी सहारा, 6 महीने में 914 पीड़ितों को मिला मुफ्त इलाज
Punjab News: पंजाब की भगवंत मान सरकार की 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' लाखों लोगों के लिए जीवनदान बन गई है. क्योंकि इस योजना के तहत परिवार को 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है. ऐसे में पिछले 6 महीनों में स्ट्रोक के भी कई मरीजों को इस योजना के तहत उपचार मिला है. जिससे उन परिवारों पर कोई आर्थिक भार नहीं पड़ा जो स्ट्रोक का इलाज कराने में सक्षम नहीं थे. क्योंकि किसी व्यक्ति को स्ट्रोक आने पर पूरा परिवार इसकी मार झेलता है. इसका कारण स्ट्रोक का महंगा इलाज है. लेकिन भगवंत मान सरकार ने मुख्यमंत्री सेहत योजना के जरिए स्ट्रोक समेत सभी बीमारियों में 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज का राज्य के लोगों को तोहफा दिया है.
पल भर में जिंदगी बदल देता है स्ट्रोक
स्ट्रोक एक ऐसी खतनाक बीमारी है जो चंद मिनट में इंसान के जीवन को बदल देती है. क्योंकि एक पल पहले इंसान सामान्य रूप से चल-फिर रहा होता है, बात कर रहा होता है और अपना काम कर रहा होता है; लेकिन अगले ही पल किसी धमनी में रुकावट या मस्तिष्क के ब्लड वेसल फटने से, सामान्य दिन एक गंभीर चिकित्सीय आपातकाल में बदल सकता है. पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत स्ट्रोक उपचार से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि राज्य की स्वास्थ्य योजना सामान्य स्ट्रोक प्रबंधन से लेकर एडवांस्ड इमेजिंग, इंटेंसिव केयर और लंबे समय तक चलने वाले उपचार तक मस्तिष्क संबंधी आपात स्थितियों में मरीजों की सहायता कर रही है.
क्यों आता है स्ट्रोक?
बता दें कि स्ट्रोक, जिसे ‘ब्रेन अटैक’ भी कहा जाता है, तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति रुक जाती है या कोई ब्लड वेसल फट जाता है. ऑक्सीजन की कमी होने पर मस्तिष्क की कोशिकाए मरने लगती हैं. हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली इसकी प्रमुख ज़ोखिम कारकों में शामिल हैं.
पंजाब में 914 स्ट्रोक मरीजों को मिला मुफ्त इलाज
बता दें कि स्ट्रोक का इलाज काफी महंगा हो सकता है, जिसके चलते परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है. राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA), पंजाब के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह महीनों में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 914 स्ट्रोक मरीजों का 4.15 करोड़ रुपये की लागत से मुफ्त इलाज हुआ है. इनमें एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक के 48 मामले दर्ज किए गए हैं, जिन पर 14.27 लाख रुपये से अधिक का खर्च आया है. जिसे पंजाब की मान सरकार ने वहन किया है.
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के रिकॉर्ड के मुताबिक, एक्यूट स्ट्रोक और एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक श्रेणियों में सबसे अधिक मरीजों का इलाज किया गया है. जबकि हेमरेजिक स्ट्रोक के मामले इससे कम रहे. लेकिन प्रति मरीज उपचार लागत अधिक रही. कुल खर्च का बड़ा हिस्सा सीटी/एमआरआई जांच तथा ट्रेकियोस्टॉमी और रक्त चढ़ाने जैसी अतिरिक्त चिकित्सा प्रक्रियाओं पर खर्च हुआ है.
'स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना प्राथमिकता'
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने का अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी परिवार आर्थिक चिंता के कारण इलाज में देरी न करे. उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी स्वास्थ्य योजनाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर समय पर उपचार मिले. स्ट्रोक जैसी आपात स्थितियों में हर मिनट महत्त्वपूर्ण होता है और आर्थिक सहायता इलाज में होने वाली देरी और जीवन बचाने के बीच का अंतर साबित हो सकती है."
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