Mangla Gauri Vrat 2026: आज जरूर करें ये 5 उपाय, दांपत्य जीवन में बढ़ेगा प्रेम और मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद!
सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। सावन के सोमवार जहां महादेव को समर्पित होते हैं, वहीं मंगलवार का दिन माता गौरी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इसी वजह से सावन के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। 18 अगस्त 2026 को सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा और कुछ विशेष उपाय करने से अखंड सौभाग्य, वैवाहिक सुख और परिवार में खुशहाली की कामना की जाती है।
माता गौरी को अर्पित करें सुहाग की सामग्री
मंगला गौरी व्रत के दिन सुहागिन महिलाएं माता पार्वती की पूजा करते समय सुहाग की सामग्री अर्पित कर सकती हैं। इसमें सिंदूर, कुमकुम, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी और लाल चुनरी शामिल हैं। पूजा के बाद माता गौरी से पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करें।
लाल फूल और मिठाई का लगाएं भोग
माता पार्वती की पूजा में लाल रंग के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही पूजा में गुड़, फल और मिठाई का भोग लगाया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा से माता गौरी प्रसन्न होती हैं और परिवार में सुख-शांति का आशीर्वाद देती हैं।
पति-पत्नी साथ करें शिव-पार्वती की पूजा
अगर संभव हो तो इस दिन पति-पत्नी को साथ बैठकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए। सबसे पहले शिवलिंग पर जल अर्पित करें और इसके बाद माता पार्वती की पूजा करें। दोनों मिलकर परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में प्रेम व आपसी समझ बनाए रखने की प्रार्थना कर सकते हैं।
पति की लंबी उम्र के लिए जलाएं दीपक
मंगला गौरी व्रत के दिन सुहागिन महिलाएं माता गौरी के सामने पति के नाम से दीपक जला सकती हैं। दीपक जलाते समय पति की अच्छी सेहत, दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की कामना करें। इसे दांपत्य सुख से जुड़ा एक शुभ उपाय माना जाता है।
सुहागिन महिला को करें सुहाग सामग्री का दान
इस दिन किसी जरूरतमंद सुहागिन महिला को सुहाग की सामग्री दान करना भी शुभ माना जाता है। अपनी क्षमता के अनुसार सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी या अन्य सुहाग सामग्री दी जा सकती है। मान्यता है कि इससे सौभाग्य और सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है।
मंगला गौरी व्रत का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी वजह से मंगला गौरी व्रत को दांपत्य सुख और अखंड सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से माता गौरी की पूजा कर सकती हैं।
नोट: यहां बताए गए उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें आस्था और परंपरा के रूप में ही लें।
Kalki Jayanti 2026: आज है कल्कि जयंती, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और घर पर पूजा करने की सही विधि
Kalki Jayanti 2026: हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार माने जाने वाले कल्कि भगवान की जयंती का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि कलियुग के अंतिम चरण में जब अधर्म अपने चरम पर होगा, तब भगवान विष्णु कल्कि रूप में अवतार लेकर अधर्म का नाश और धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे। हालांकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कल्कि अवतार अभी होना बाकी है, लेकिन उनके भावी अवतरण की स्मृति में हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को कल्कि जयंती मनाई जाती है। इस बार कल्कि जयंती 18 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाई जा रही है। आइए जानते हैं इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और भगवान कल्कि से जुड़ी खास बातें।
आज मनाई जा रही है कल्कि जयंती
पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 17 अगस्त को शाम 5 बजे शुरू हुई और 18 अगस्त को शाम 5:50 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर कल्कि जयंती 18 अगस्त को मनाई जा रही है।
कल्कि जयंती पर भगवान विष्णु के कल्कि स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है। पूजा के लिए शाम 4:21 बजे से 5:50 बजे तक का समय शुभ बताया गया है।
भगवान कल्कि कौन हैं?
धार्मिक ग्रंथों में भगवान कल्कि को भगवान विष्णु का दसवां अवतार बताया गया है। मान्यता है कि वर्तमान कलियुग के अंतिम चरण में भगवान विष्णु कल्कि रूप में पृथ्वी पर अवतरित होंगे।
श्रीमद्भागवत महापुराण समेत कई धार्मिक ग्रंथों में कल्कि अवतार का वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कल्कि का जन्म संभल ग्राम में एक ब्राह्मण परिवार में होगा।
उनके स्वरूप को एक दिव्य योद्धा के रूप में बताया गया है। मान्यता है कि वे सफेद घोड़े पर सवार होकर हाथ में तलवार धारण करेंगे और अधर्म का अंत कर धर्म की स्थापना करेंगे।
घर पर ऐसे करें कल्कि भगवान की पूजा
अगर किसी कारण से मंदिर जाना संभव नहीं है तो घर पर भी भगवान विष्णु के कल्कि स्वरूप का ध्यान करके पूजा की जा सकती है। इसके लिए सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद एक चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की तस्वीर स्थापित करें। यदि कल्कि भगवान की तस्वीर उपलब्ध नहीं है तो भगवान विष्णु की तस्वीर रखकर पूजा की जा सकती है। सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें। इसके बाद भगवान विष्णु और कल्कि भगवान का स्मरण करते हुए पूजा का संकल्प लें।
पूजा में ये चीजें करें अर्पित
- जल और पंचामृत
- पीले फूल
- अक्षत
- चंदन
- तुलसी दल
- पीले वस्त्र या पीले पुष्प
- धूप और दीप
पूजा के दौरान भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए मंत्र जाप और आरती करें। अंत में भगवान से परिवार की सुख-शांति और जीवन में धर्म के मार्ग पर चलने की प्रार्थना करें।
कल्कि जयंती का धार्मिक महत्व
कल्कि जयंती केवल भगवान विष्णु के भावी अवतार की स्मृति का पर्व नहीं है, बल्कि इसे धर्म, सत्य और सदाचार के प्रति आस्था से भी जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान कल्कि का अवतार कलियुग के अंत में अधर्म का नाश करने और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए होगा।
नोट: कल्कि अवतार और उनसे जुड़ी बातें धार्मिक ग्रंथों एवं मान्यताओं पर आधारित हैं।
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