ईरान और अमेरिका के बीच फिर से भड़की जंग ने दुनिया के आगे एक नया खतरा पैदा कर दिया है। ऐसा खतरा कि जिसकी तबाही पूरी दुनिया में हाहाकार मचाने वाली है। क्योंकि इस बार की जंग सिर्फ ईरान और अमेरिका तक ही सीमित नहीं रहने वाली बल्कि तीसरे विश्व युद्ध की ओर इशारा कर रही है। और इसका सिग्नल अब रूस की धमाकेदार एंट्री ने दिया है। और रूस की एंट्री उन हमलों के बाद हुई है जिसमें अमेरिका ने ईरान के सैकड़ों सैन्य ठिकानों पर भीषण हमले किए हैं। दरअसल ईरान युद्ध के बीच अब रूस की एंट्री हो गई है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने अपने सबसे सुरक्षित हवाई कमांड विमान को तैरान भेज दिया है। जिस टीयू 214 पीयू विमान को रूस ने ईरान भेजा है, वह सामान्य वीआईपी प्लेन नहीं बल्कि यह अपने आप में उड़ता हुआ किला है। यह विमान रूस का स्पेशल एयरब कमांड पोस्ट विमान है। युद्ध के दौरान बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है। इसे संकट या युद्ध जैसी परिस्थितियों में देश के शीर्ष नेतृत्व के लिए तैयार किया गया है। इस हवाई कमांड विमान को प्रलयकारी विमान भी कहा जाता है। यह विमान ऐसे समय में तैरान पहुंचा है जब अमेरिका और ईरान के बीच फिर से सैन्य हमले अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गए हैं।
रूस के विमान की एंट्री ने कैसे अमेरिका में हलचल पैदा कर दी
दरअसल टीयू 2114 पीवी विमान में सुरक्षित संचार, नेटवर्क, सेटेलाइट सिस्टम और आधुनिक कमांड [संगीत] उपकरण लगाए गए हैं। इसके जरिए हवा में ही वह फैसले लिए जा सकते हैं जिसके जरिए किसी देश की बर्बादी तय हो जाए। यह सीधे देश में मौजूद कमांड सेंटर से जुड़ा हुआ रहता है। यह करीब 850 कि.मी./ घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है और लगभग 6500 कि.मी. तक बिना रुके सफर करने की क्षमता रखता है। इस विमान के कुछ एडवांस सैन्य संस्करण भी हैं जिनमें और ज्यादा आधुनिक संचार तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। तो इस तरह से रूस ने अपने डेंजर विमान की तैरान में एंट्री कराकर एक नई हलचल पैदा कर दी है। क्योंकि यह पहली बार है जब रूस ने खुलकर ईरान का सपोर्ट तो किया ही है साथ ही अपने घातक हथियार को उतार दिया है। इसके पीछे की वजह यह भी बताई जा रही है कि रूस को यूक्रेन युद्ध में फंसाने में अमेरिका की बहुत बड़ी भूमिका रही है। ऐसे में रूस भी चाहता है कि जिस तरह से अमेरिका ने उसे फंसाया ठीक उसी तरह ईरान का समर्थन करके ट्रंप को फंसाना है। जिसके बाद खुद ही ट्रंप यूक्रेन पर युद्ध खत्म कराने का दबाव डालने के लिए मजबूर हो जाएंगे। उधर चीन युद्ध में ईरान का समर्थन कर चुका है।
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