जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 में अब सिर्फ 2 दिन बाकी, तैयार हुए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ
विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर ओडिशा के पुरी में धार्मिक माहौल अपने चरम पर पहुंच गया है। रथ यात्रा शुरू होने में अब केवल दो दिन शेष हैं और इसके लिए तीनों विशाल रथ पूरी तरह तैयार हो चुके हैं। मंदिर परिसर और ग्रैंड रोड को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंच रहे हैं और हर ओर “जय जगन्नाथ” के जयकारे गूंज रहे हैं।
रथ यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ, भगवान बलभद्र के तालध्वज रथ और माता सुभद्रा के दर्पदलन रथ को पारंपरिक तरीके से सजाया गया है। कारीगरों ने कई सप्ताह की मेहनत के बाद इन रथों का निर्माण पूरा किया है। अब भक्त उस शुभ घड़ी का इंतजार कर रहे हैं, जब भगवान अपने भाई-बहन के साथ श्रीमंदिर से निकलकर गुंडिचा मंदिर की यात्रा पर रवाना होंगे।
क्यों खास होती है यह परंपरा?
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा भारत के सबसे बड़े और सबसे पुराने धार्मिक आयोजनों में गिनी जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर की यात्रा पर जाते हैं। इस दौरान लाखों श्रद्धालु भगवान के रथ को खींचने का सौभाग्य प्राप्त करने के लिए घंटों इंतजार करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रथ की रस्सी खींचना बेहद पुण्यदायी माना जाता है।
इस यात्रा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं। जो लोग किसी कारण मंदिर के गर्भगृह तक नहीं पहुंच पाते, उन्हें भी भगवान के दर्शन का अवसर मिलता है। यही वजह है कि हर साल देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। रथ यात्रा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का भी प्रतीक मानी जाती है। इस दौरान पूरे शहर में भक्ति, सेवा और उत्सव का अनोखा माहौल देखने को मिलता है।
सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार
रथ यात्रा के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। पुलिस, ट्रैफिक विभाग, स्वास्थ्य सेवाएं, अग्निशमन दल और आपदा राहत टीमें पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग, सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी और कंट्रोल रूम की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पीने के पानी, प्राथमिक उपचार, विश्राम स्थल और हेल्प डेस्क भी बनाए गए हैं।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और अफवाहों से बचें। अधिकारियों का कहना है कि रथ यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ काम कर रहे हैं।
अब पूरे पुरी में सिर्फ उसी ऐतिहासिक पल का इंतजार है, जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा अपने भव्य रथों पर विराजमान होकर भक्तों के बीच आएंगे। जयकारों, भक्ति और आस्था के बीच निकलने वाली यह यात्रा एक बार फिर करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए यादगार बनने जा रही है।
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