Aaj Ka Rashifal 18 August 2026: कर्क, सिंह और कुंभ राशि वालों के पूरे होंगे अटके काम, बढ़ेगी सुख-समृद्धि, जानें आज क्या कहते है आपके सितारे
Aaj Ka Rashifal 18 August 2026: कर्क, सिंह और कुंभ राशि वालों के पूरे होंगे अटके काम, बढ़ेगी सुख-समृद्धि, जानें आज क्या कहते है आपके सितारेकानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे, निर्माण गुणवत्ता पर फिर उठे गंभीर सवाल, पुल में आईं गहरी दरारें
Kanpur-Lucknow Expressway: हाल ही में यातायात के लिए खोले गए 63 किलोमीटर लंबे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य पर लगातार उंगलियां उठ रही हैं. करीब 4,200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनी इस आधुनिक सड़क पर उद्घाटन के एक महीने के भीतर ही कई गंभीर खामियां उजागर हो चुकी हैं. ताजा मामला गंगा एक्सप्रेसवे के करीब एक पुल में आई लंबी और गहरी दरारों का है, जिसने सफर की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं.
पुल में दरार और उखड़ती सतह
एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 55.4 पर स्थित एक पुल के जॉइंट (जोड़) के पास सड़क के किनारे वाले कंक्रीट हिस्से में खतरनाक दरारें देखी गई हैं. यह दरार कई जगहों पर आधा से एक इंच तक चौड़ी और काफी गहरी है. इसके साथ ही दरारों के आस-पास की ऊपरी सतह भी कई जगहों से उखड़नी शुरू हो गई है. इंजीनियरों और जानकारों का मानना है कि इस मामले की तुरंत तकनीकी जांच होनी चाहिए. उनका कहना है कि यदि यह दरार केवल ऊपरी सतह पर है, तो इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है, लेकिन अगर इसके पीछे कोई संरचनात्मक (स्ट्रक्चरल) कारण है, तो यह भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है.
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पहले भी सामने आ चुकी हैं कई खामियां
बारिश ने इस नए नवेले एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता की पोल खोलकर रख दी है. क्रैश बैरियर दरकने और तारकोल उखड़ने जैसी कई घटनाएं पहले ही दर्ज हो चुकी हैं. मात्र एक महीने के भीतर करीब 15 जगहों पर सड़क धंसने और 24 स्थानों पर मिट्टी खिसकने (स्लिपेज) की शिकायतें मिली हैं. जुलाई के अंत में उन्नाव के पास सड़क की ऊपरी परत करीब 40 मीटर तक खिसक गई थी. इसके अलावा तेज बारिश के दौरान सड़क के किनारों और निचले हिस्सों से पानी रिसने के मामले भी सामने आए हैं, जो निर्माण में इस्तेमाल हुई सामग्री और इंजीनियरिंग पर सीधा सवाल उठाते हैं.
एनएचएआई का एक्शन और सुधारात्मक कदम
लगातार मिल रही शिकायतों के बीच नुकसान को कम करने के लिए प्रशासन द्वारा कुछ सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं. भविष्य में लेन बढ़ाने के लिए सड़क के किनारे छोड़े गए कच्चे हिस्से (ग्रीन फील्ड) को अब पक्का किया जाएगा. यहां कच्ची मिट्टी पर बजरी और रोड़ी बिछाकर उस पर सीमेंट का लेप लगाया जाएगा. इसका मुख्य उद्देश्य बारिश के पानी को सड़क के बेस (निचली मिट्टी) तक पहुंचने से रोकना है.
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मरम्मत के बावजूद राहत नहीं
बीते 26 जुलाई को किलोमीटर 64 के पास सड़क धंसने की पहली बड़ी घटना सामने आई थी. इसके बाद एनएचएआई ने करीब 100 मीटर के हिस्से को पूरी तरह उखाड़कर नए सिरे से बनवाया था. हालांकि, यह भारी-भरकम मरम्मत भी ज्यादा काम नहीं आई और महज तीन दिन बाद 29 जुलाई तक यह एक्सप्रेसवे पांच अन्य जगहों पर भी धंस गया. आधुनिक सुविधाओं और तेज यातायात के वादे के साथ बनाए गए इस हाई-स्पीड कॉरिडोर का शुरुआती दौर में ही ऐसा हाल होना प्रशासन और निर्माण कंपनियों की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान है.
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