BJP का दावा: Odisha Mining Bill से बढ़ेगा ओडिशा का राजस्व, बीजेडी का आरोप खारिज
ओडिशा में सत्तारूढ़ भाजपा ने सोमवार को दावा किया कि हाल में पारित खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 से राज्य को किसी तरह के राजस्व का नुकसान नहीं होगा। पार्टी ने कहा कि इसके बजाय अधिक प्रतिस्पर्धी खनन बाजार से राज्य को लाभ मिलेगा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज्य इकाई का बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी पार्टियां बीजद और कांग्रेस इस विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू करने की तैयारी कर रही हैं।
उनका आरोप है कि यह विधेयक ओडिशा की वित्तीय स्वायत्तता को कमजोर करेगा और खनिज संपदा से भरपूर क्षेत्रों पर राज्य के अधिकारों को कम करेगा। बीजू जनता दल (बीजद) अध्यक्ष नवीन पटनायक और ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने विधेयक के राज्य की अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक और विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। बीजद ने दावा किया है कि यदि यह कानून लागू होता है, तो ओडिशा को सालाना करीब 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।
भाजपा प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा, ‘‘नया संशोधन ओडिशा के राजस्व में किसी भी तरह एक रुपये की भी कमी नहीं करेगा, बल्कि प्रतिस्पर्धी बाजार में राज्य को अधिक राजस्व मिलेगा।’’ बिस्वाल ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान 2013 में ओडिशा को खनन रॉयल्टी से करीब 5,000 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि 2015 में खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) (एमएमडीआर) अधिनियम में संशोधन के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के तहत यह राशि बढ़कर सालाना 48,000 करोड़ रुपये हो गई। उन्होंने कहा, ‘‘राज्य को खनिज संसाधनों की पारदर्शी तरीके से नीलामी से अप्रत्याशित रूप से भारी लाभ मिला, जो पहले केंद्र में कांग्रेस शासन के दौरान संभव नहीं था।’’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पंचानन कानूनगो ने हालांकि भाजपा के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस शासन के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में लौह अयस्क की कीमत केवल 200 से 300 रुपये प्रति टन थी।
बाद में यह बढ़कर 3,000 से 4,000 रुपये प्रति टन हो गई। इसलिए खनिज रॉयल्टी से होने वाले राजस्व में बढ़ोतरी कोई हैरानी की बात नहीं है।
BJP की नई टीम में Vasundhara Raje बनीं उपाध्यक्ष, सतीश पूनिया बने महासचिव
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों को बधाई देते हुए सोमवार को कहा कि भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा घोषित नयी टीम ‘‘अनुभव, समर्पण और संगठनात्मक कौशल का संगम’’ है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया है, जबकि भाजपा की राजस्थान इकाई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य सतीश पूनिया को राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया है। उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत को भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।
वहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता राजेश मंगल को राष्ट्रीय संयुक्त कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। मदन राठौड़ ने कहा कि नयी राष्ट्रीय टीम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि नवनियुक्त पदाधिकारी ‘राष्ट्र प्रथम, संगठन सर्वोपरि और अंत्योदय’ की भावना से काम करते हुए पार्टी को नयी ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
राठौड़ ने कहा कि पदाधिकारियों का संगठनात्मक अनुभव देशभर के साथ-साथ राजस्थान के पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए भी लाभकारी साबित होगा। वसुंधरा राजे ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में संगठन की सेवा का एक और अवसर देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का आभार जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में नई टीम को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि सभी मिलकर विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में सफल होंगे।
भाजपा की राजस्थान इकाई के 2019 से 2023 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे सतीश पूनिया ने कहा कि पार्टी ने उन्हें अब तक जो भी जिम्मेदारी सौंपी, उसे उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि नयी भूमिका में भी संगठन की अपेक्षाओं को पूरा करने और सकारात्मक परिणाम देने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम करेंगे।
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