Delhi Voter List से कट सकते हैं 47 लाख मतदाताओं के नाम, 24 अगस्त को जारी होगा मसौदा
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद प्रकाशित होने वाली मसौदा सूची में 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47 लाख से अधिक (करीब 33 प्रतिशत) के नाम कट सकते हैं। बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा मुहैया कराए गए गणना प्रपत्र को भरकर वापस जमा करने की मियाद सोमवार को समाप्त हो गई। हालांकि, जिन मतदाताओं ने अपने प्रपत्र जमा नहीं किए हैं, उन्हें 24 अगस्त को मसौदा सूची प्रकाशित होने के बाद भी दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा।
दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय से जारी आंकड़ों के मुताबिक शहर के 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 97.47 लाख (67.18 प्रतिशत) ने अपने गणना प्रपत्र जमा करा दिये हैं और इन प्रपत्रों को सभी निर्वाचन क्षेत्रों में बीएलओ ने डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक अल्पसंख्यक-बहुल कई निर्वाचन क्षेत्रों में जमा किए गए और सफलतापूर्वक डिजिटलीकृत किए गए प्रपत्रों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रही।
उत्तर-पश्चिम दिल्ली के रोहिणी निर्वाचन क्षेत्र में 1,50,398 मतदाता हैं और यहां सबसे अधिक 83.43 प्रतिशत (1,25,478) प्रपत्रों का डिजिटलीकरण किया गया है जबकि 24,920 प्रपत्रों को ‘एकत्र नहीं किये गए’ के तौर पर चिह्नित किया गया। प्रपत्रों के डिजिटलीकरण के मामले में प्रतिशत के हिसाब से शीर्ष पर रहने वाले अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में शकूरबस्ती (81.26 प्रतिशत), राजौरी गार्डन (79.14 प्रतिशत), मंगोलपुरी (78.76 प्रतिशत) और उत्तम नगर (77.76 प्रतिशत) शामिल हैं। गणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण के मामले में सबसे फिसड्डी तुगलकाबाद (52.15 प्रतिशत) रहा।
इसी निर्वाचन क्षेत्र में ‘एकत्र न किए जा सकने वाले’ प्रपत्रों की संख्या भी सबसे ज़्यादा (47.85 प्रतिशत) रही। अल्पसंख्यक-बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में, चांदनी चौक में प्रपत्रों के डिजिटलीकरण की दर सबसे कम यानी 61.02 प्रतिशत रही। सीईओ के आंकड़ों के अनुसार, जिन अल्पसंख्यक बहुल अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में गणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण का प्रतिशत अपेक्षाकृत अधिक रहा।
इनमें मुस्तफ़ाबाद (71.91 प्रतिशत), मटिया महल (75.5 प्रतिशत), सीलमपुर (76.63 प्रतिशत), बाबरपुर (73 प्रतिशत) और बल्लीमारान (67.35 प्रतिशत) प्रमुख हैं। एक निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं होंगे, उन्हें सीईओ कार्यालय से एएसडीडी (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और नाम के दोहराव) श्रेणी के तहत गड़बड़ियों के लिए नोटिस मिलेंगे।
BJP की नई राष्ट्रीय टीम में Uttar Pradesh से 8 नेताओं को मिली जगह, Smriti Irani बनीं महासचिव
उत्तर प्रदेश में अगले साल के लिए प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी नयी राष्ट्रीय संगठनात्मक टीम में राज्य को सबसे अधिक प्रतिनिधित्व देते हुए प्रदेश के आठ नेताओं को जगह दी है, जो युवा और राजनीतिक अनुभव का संतुलन प्रस्तुत करते हैं। केंद्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से शामिल किए गए आठ नेताओं में दो महिलाएं और दो मुस्लिम प्रतिनिधि शामिल हैं। इन नियुक्तियों में दो राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, दो राष्ट्रीय महासचिव, दो राष्ट्रीय सचिव और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) तथा अल्पसंख्यक मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष शामिल हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और लोकसभा के पूर्व सदस्य हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया है, जबकि पूर्व सांसद रेखा वर्मा और तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। राज्यसभा सदस्य भोला सिंह और संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं, राज्यसभा सदस्य अमरपाल मौर्य ओबीसी मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे, जबकि कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चे की कमान सौंपी गई है।
उत्तर प्रदेश से शामिल चेहरों में स्मृति ईरानी सबसे प्रमुख राजनीतिक नाम हैं। उन्होंने लोकसभा में अमेठी का प्रतिनिधित्व किया था और 2019 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को हराया था, हालांकि 2024 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। केंद्रीय संगठन में उनकी वापसी से पार्टी को उत्तर प्रदेश की राजनीति का लंबा अनुभव रखने वाली एक प्रखर नेता का साथ मिलेगा।
धौरहरा से दो बार सांसद रह चुकीं रेखा वर्मा के पास 2014 और 2019 में सीधे चुनावी जीत का अनुभव है, हालांकि वह 2024 में मामूली अंतर से चुनाव हार गई थीं। संगठन में उनके शामिल होने से भाजपा को मध्य उत्तर प्रदेश की चुनावी गतिशीलता से परिचित एक और महिला नेता मिली हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं प्रोफेसर तारिक मंसूर का राजनीतिक सफर अलग है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़े प्रमुख मुस्लिम चेहरे के रूप में मंसूर को मुस्लिम समुदाय, विशेषकर पसमांदा वर्ग तक भाजपा की पहुंच के प्रयासों के हिस्से के रूप में देखा जाता है। उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने से इस अभियान को संगठनात्मक बल मिलेगा। बस्ती से दो बार सांसद रहे हरीश द्विवेदी पूर्वी उत्तर प्रदेश से संसदीय और संगठनात्मक अनुभव लेकर आते हैं।
उन्होंने 2014 और 2019 में जीत दर्ज की थी, जबकि 2024 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बुलंदशहर से तीन बार के सांसद भोला सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक और मजबूत चेहरा हैं। गोरखपुर के चौरी-चौरा से पूर्व विधायक व वर्तमान राज्यसभा सदस्य संगीता यादव पूर्वी उत्तर प्रदेश से चुनावी अनुभव रखने वाली महिला नेता के रूप में राष्ट्रीय संगठन से जुड़ी हैं।
अमरपाल मौर्य की ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति भाजपा की सामाजिक लामबंदी रणनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्यसभा सदस्य और भाजपा के पूर्व प्रदेश महासचिव मौर्य ने 2022 का विधानसभा चुनाव रायबरेली के ऊंचाहार से लड़ा था और उनके पास व्यापक संगठनात्मक अनुभव है। उत्तर प्रदेश में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे का नेतृत्व कर चुके कुंवर बासित अली विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं तक पार्टी की पहुंच बनाने में सक्रिय रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक मोर्चे का अध्यक्ष बनाए जाने से इस प्रयास को एक राष्ट्रीय मंच मिलेगा। ये आठों नियुक्तियां सामूहिक रूप से उत्तर प्रदेश में भाजपा की राजनीतिक रणनीति के कई पहलुओं - महिला, ओबीसी, मुस्लिम, पूर्वी व पश्चिमी क्षेत्र और चुनावी व संगठनात्मक अनुभव को साधती हैं। यह समय काफी महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था जहां स्मृति ईरानी, रेखा वर्मा और हरीश द्विवेदी सहित कई नवनियुक्त नेताओं को हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा के पश्चिम उत्तर प्रदेश अध्यक्ष जावेद मलिक ने बताया कि बासित अल्पसंख्यक समुदाय के ऐसे तीसरे नेता हैं जिन्हें अल्पसंख्यक मोर्चे की राष्ट्रीय जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले एजाज रिजवी और तनवीर उस्मानी को यह जिम्मेदारी मिली थी।
मलिक ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश से दो अल्पसंख्यक नेताओं को राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है। बासित के अलावा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए तारिक मंसूर पसमांदा समुदाय से आते हैं।’’ इस बीच, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दी हैं। वहीं, भाजपा की उत्तर प्रदेश इकाई के मीडिया प्रभारी यतेंद्र शर्मा ने सोमवार को अपना पदभार संभालने के बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष से मुलाकात की।
एक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने संगठन को मजबूत करने, मीडिया समन्वय में सुधार करने और जनता तक पार्टी की नीतियों व कार्यक्रमों को पहुंचाने पर चर्चा की।
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