Hemant Soren ने JSSC-CGL परीक्षाएं रद्द कीं, 2014 से हुई टीडीपीएल की परीक्षाएं भी निरस्त
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ अभ्यर्थियों द्वारा किये जा रहे प्रदर्शन के बीच,मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और 2014 से आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। यह फैसला सोरेन की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की एक लंबी बैठक में लिया गया। सोरेन ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा, ‘‘सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तर (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है, जो प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांगों में से एक थी।
हमने आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल (टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा जारी नतीजों को भी रद्द करने का फ़ैसला किया है।’’ उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक परीक्षा सुधार समिति के गठन की भी घोषणा की। सोरेन ने कहा कि सरकार छात्रों के आंदोलन को लेकर चिंतित है और उसने ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए पहले ही ‘झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम और निवारण) अधिनियम’ लागू कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘सीआईडी और विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से परीक्षा में हुई अनियमितताओं की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
अभी इनका खुलासा नहीं किया जा सकता।’’ सोरेन ने आरोप लगाया कि झारखंड में काम कर रही कई कंपनियां एक बड़े परीक्षा गिरोह में संलिप्त प्रतीत होती हैं। राज्य में अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ ने हालांकि कहा है कि जब तक केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई)से जांच कराने की उनकी मांग नहीं मानी जाती, आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच, जेएसएससी-सीजीएल उत्तीर्ण करके सरकारी नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों ने झारखंड सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
उनका कहना है कि अगर परीक्षा रद्द की जाती है, तो लगभग 2,000 लोगों की नौकरी जा सकती है। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ गत 16 दिनों से अनशन कर रहे देवेंद्र महतो ने कहा कि वह जल्द ही अपना अनशन समाप्त करेंगे। सरकारी नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे थे।
अभ्यर्थियों का आंदोलन सोमवार को 24वें दिन भी जारी था। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार ने रांची में कहा कि आंदोलनकारी छात्रों से अपील की जा रही है कि वे अपना प्रदर्शन समाप्त कर दें क्योंकि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगें मान ली हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिन अभ्यर्थियों की परीक्षा को निरस्त किया है वे कानूनी रास्ता अपनाने को स्वतंत्र हैं।
Delhi Voter List से कट सकते हैं 47 लाख मतदाताओं के नाम, 24 अगस्त को जारी होगा मसौदा
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद प्रकाशित होने वाली मसौदा सूची में 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47 लाख से अधिक (करीब 33 प्रतिशत) के नाम कट सकते हैं। बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा मुहैया कराए गए गणना प्रपत्र को भरकर वापस जमा करने की मियाद सोमवार को समाप्त हो गई। हालांकि, जिन मतदाताओं ने अपने प्रपत्र जमा नहीं किए हैं, उन्हें 24 अगस्त को मसौदा सूची प्रकाशित होने के बाद भी दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा।
दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय से जारी आंकड़ों के मुताबिक शहर के 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 97.47 लाख (67.18 प्रतिशत) ने अपने गणना प्रपत्र जमा करा दिये हैं और इन प्रपत्रों को सभी निर्वाचन क्षेत्रों में बीएलओ ने डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक अल्पसंख्यक-बहुल कई निर्वाचन क्षेत्रों में जमा किए गए और सफलतापूर्वक डिजिटलीकृत किए गए प्रपत्रों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रही।
उत्तर-पश्चिम दिल्ली के रोहिणी निर्वाचन क्षेत्र में 1,50,398 मतदाता हैं और यहां सबसे अधिक 83.43 प्रतिशत (1,25,478) प्रपत्रों का डिजिटलीकरण किया गया है जबकि 24,920 प्रपत्रों को ‘एकत्र नहीं किये गए’ के तौर पर चिह्नित किया गया। प्रपत्रों के डिजिटलीकरण के मामले में प्रतिशत के हिसाब से शीर्ष पर रहने वाले अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में शकूरबस्ती (81.26 प्रतिशत), राजौरी गार्डन (79.14 प्रतिशत), मंगोलपुरी (78.76 प्रतिशत) और उत्तम नगर (77.76 प्रतिशत) शामिल हैं। गणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण के मामले में सबसे फिसड्डी तुगलकाबाद (52.15 प्रतिशत) रहा।
इसी निर्वाचन क्षेत्र में ‘एकत्र न किए जा सकने वाले’ प्रपत्रों की संख्या भी सबसे ज़्यादा (47.85 प्रतिशत) रही। अल्पसंख्यक-बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में, चांदनी चौक में प्रपत्रों के डिजिटलीकरण की दर सबसे कम यानी 61.02 प्रतिशत रही। सीईओ के आंकड़ों के अनुसार, जिन अल्पसंख्यक बहुल अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में गणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण का प्रतिशत अपेक्षाकृत अधिक रहा।
इनमें मुस्तफ़ाबाद (71.91 प्रतिशत), मटिया महल (75.5 प्रतिशत), सीलमपुर (76.63 प्रतिशत), बाबरपुर (73 प्रतिशत) और बल्लीमारान (67.35 प्रतिशत) प्रमुख हैं। एक निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं होंगे, उन्हें सीईओ कार्यालय से एएसडीडी (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और नाम के दोहराव) श्रेणी के तहत गड़बड़ियों के लिए नोटिस मिलेंगे।
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