TMC MP Mahua Moitra ने Lok Sabha Speaker Om Birla को विशेषाधिकार नोटिस भेजा
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर स्थित सर्किट हाउस को 14 अगस्त की देर रात खाली करने का आदेश दिए जाने के मामले में तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। सांसद ने अधिकारियों पर गंभीर प्रोटोकॉल उल्लंघन और अवमाननापूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है। लोकसभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमावली के नियम 222 के तहत 16 अगस्त को भेजे गए नोटिस में मोइत्रा ने नादिया के जिलाधिकारी श्रीकांत पल्ली, अपर जिलाधिकारी (एडीएम) नृपेंद्र सिंह और नजारत उप-जिलाधिकारी अनामिका बेरा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कृष्णानगर की सांसद ने आरोप लगाया कि अधिकारियों का यह आचरण उन्हें संसदीय दायित्वों का निर्वहन करने से रोकने के “व्यापक प्रयास” का हिस्सा था। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से बिना किसी भय या उत्पीड़न के अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने के लिए सुरक्षा प्रदान करने का अनुरोध किया है। नोटिस के अनुसार, मोइत्रा ने मानसून सत्र के बाद पश्चिम बंगाल लौटने से पहले 13 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष को अपने निर्वाचन क्षेत्र के दौरे की जानकारी दी थी और सुरक्षा मांगी थी।
उन्होंने बताया कि वह 14 अगस्त की शाम करीब सवा छह बजे नादिया सर्किट हाउस पहुंचीं। हालांकि, रात 9:47 बजे एडीएम ने उन्हें फोन कर परिसर खाली करने को कहा। कारण पूछने पर एडीएम ने कथित तौर पर बताया कि यह आदेश “ऊपर से आए हैं।” अपने नोटिस में मोइत्रा ने गृह मंत्रालय के प्रोटोकॉल क्रम का हवाला देते हुए कहा कि सांसदों का स्थान 21वें क्रम पर है।
उन्होंने कहा कि अपने निर्वाचन क्षेत्र के दौरे पर आए सांसद को सर्किट हाउस में ठहराया जाना चाहिए और जब तक कोई अन्य उच्च अधिकारी मौजूद न हो, तब तक उन्हें वहां से जाने के लिए नहीं कहा जा सकता। मोइत्रा ने यह भी कहा कि उन्होंने एक जुलाई को भाजपा सदस्यों द्वारा कथित तौर पर की गई हिंसा की घटना को लेकर पांच जुलाई को कृष्णानगर के पुलिस अधीक्षक और अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बिरला से नवीनतम नोटिस पर तत्काल संज्ञान लेने और जिले के तीनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए इसे विशेषाधिकार समिति को भेजने का आग्रह किया।
Hemant Soren ने JSSC-CGL परीक्षाएं रद्द कीं, 2014 से हुई टीडीपीएल की परीक्षाएं भी निरस्त
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ अभ्यर्थियों द्वारा किये जा रहे प्रदर्शन के बीच,मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और 2014 से आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। यह फैसला सोरेन की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की एक लंबी बैठक में लिया गया। सोरेन ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा, ‘‘सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तर (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है, जो प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांगों में से एक थी।
हमने आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल (टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा जारी नतीजों को भी रद्द करने का फ़ैसला किया है।’’ उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक परीक्षा सुधार समिति के गठन की भी घोषणा की। सोरेन ने कहा कि सरकार छात्रों के आंदोलन को लेकर चिंतित है और उसने ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए पहले ही ‘झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम और निवारण) अधिनियम’ लागू कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘सीआईडी और विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से परीक्षा में हुई अनियमितताओं की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
अभी इनका खुलासा नहीं किया जा सकता।’’ सोरेन ने आरोप लगाया कि झारखंड में काम कर रही कई कंपनियां एक बड़े परीक्षा गिरोह में संलिप्त प्रतीत होती हैं। राज्य में अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ ने हालांकि कहा है कि जब तक केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई)से जांच कराने की उनकी मांग नहीं मानी जाती, आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच, जेएसएससी-सीजीएल उत्तीर्ण करके सरकारी नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों ने झारखंड सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
उनका कहना है कि अगर परीक्षा रद्द की जाती है, तो लगभग 2,000 लोगों की नौकरी जा सकती है। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ गत 16 दिनों से अनशन कर रहे देवेंद्र महतो ने कहा कि वह जल्द ही अपना अनशन समाप्त करेंगे। सरकारी नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे थे।
अभ्यर्थियों का आंदोलन सोमवार को 24वें दिन भी जारी था। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार ने रांची में कहा कि आंदोलनकारी छात्रों से अपील की जा रही है कि वे अपना प्रदर्शन समाप्त कर दें क्योंकि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगें मान ली हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिन अभ्यर्थियों की परीक्षा को निरस्त किया है वे कानूनी रास्ता अपनाने को स्वतंत्र हैं।
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