NEET UG अभ्यर्थी के EWS सर्टिफिकेट पर तुरंत फैसला ले प्रशासन, Calcutta High Court का निर्देश
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) में सफल एक छात्र के ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जारी करने के अनुरोध पर तुरंत विचार करें। छात्र ने दावा किया था कि एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में उसकी मां का नाम नहीं होने के कारण उसे प्रमाण-पत्र देने से इनकार कर दिया गया। अदालत ने कहा कि एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिले के इच्छुक याचिकाकर्ता प्रियांशु मुखर्जी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में मतदान किया था।
न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने उत्तर 24 परगना के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को मुखर्जी के अनुरोध पर विचार करने और उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि अगर मुखर्जी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) श्रेणी के तहत पात्र पाया जाता है तो उसे सोमवार को ही प्रमाणपत्र जारी किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी।
Rishikesh में टूटकर गिरे तार से मां-बेटी की मौत, UPCL का जेई निलंबित
ऋषिकेश की खदरी ग्रामसभा में तेज वर्षा के बीच टूटी बिजली की तार से फैले करंट की चपेट में आने से एक महिला और उसकी दो वर्षीय बेटी की मौत हो गयी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी अधिकारियों ने बताया कि इस गंभीर संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के एक अवर अभियंता (जेई) शंभू प्रसाद बहुगुणा को सोमवार को निलंबित कर दिया गया। इस बीच, घटना के संबंध में मृतका सुमन जेठूड़ी (32) के पति हरपाल सिंह जेठूडी की ओर से ऋषिकेश पुलिस थाने में यूपीसीएल के अधिशासी अभियंता (ईई) शक्ति प्रसाद, उप खंड अभियंता (एसडीई) शशिकांत सिंह व जेई बहुगणा के विरुद्ध शिकायत दर्ज करायी गयी है।
पुलिस ने बताया कि शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 में मुकदमा दर्ज करके मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस के मुताबिक, घटना रविवार देर शाम हुई जब बारिश और तेज हवा से टूटी एलटी लाइन सड़क पर जलभराव वाले क्षेत्र में गिर गयी। पुलिस के अनुसार इससे पानी में करंट फैल गया जिसकी चपेट में वहां से गुजर रही सुमन और गोद में मौजूद उसकी बेटी सृष्टि आ गए।
पुलिस के अनुसार इस दौरान महिला का 12 वर्षीय बेटा भी था जिसे उसने दूर रहने का इशारा कर उसकी जान बचा ली। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने पीड़ित परिवार के लिए मुआवजा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। स्थानीय निवासी एवं टिहरी गढ़वाल की जिला पंचायत सदस्य पुष्पा रावत ने पीड़ित परिवार के लिए एक करोड़ रुपये की सहायता राशि की मांग की है।
उन्होंने कहा कि प्रथमदृष्टया यह विभागीय लापरवाही का मामला है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता विगत एक वर्ष से एरियल बंचिंग केबल डालने की मांग कर रहे थे और अगर यह केबल डाल दी गई होती तो यह हादसा नहीं हुआ होता। इस बीच, घटना को गंभीरता से लेते हुए यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक प्रकाश चंद्र ध्यानी ने कड़ी कार्रवाई की और प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर रायवाला विद्युत वितरण उपखंड के जेई बहुगुणा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
ध्यानी ने घटना के संबंध में देहरादून में तत्काल आपात बैठक बुलाकर मामले की समीक्षा की और हादसे के कारणों की गहन जांच के आदेश दिए। घटना की विस्तृत जांच के लिए मुख्य अभियंता स्तर के तीन अधिकारियों की जांच समिति गठित की गयी है जिसे तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। यूपीसीएल प्रबंध निदेशक ने स्पष्ट किया कि जांच में जिसकी भी जिम्मेदारी सामने आएगी, उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
ध्यानी ने हादसे के बाद अधिकारियों को प्रदेशभर में बिजली लाइन और अन्य बिजली परिसंपत्तियों की विशेष सुरक्षा जांच तथा निवारक अनुरक्षण अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, जिसके तहत सभी एलटी लाइन की सघन जांच की जाएगी। ज्वाइंट, टर्मिनल, कनेक्शन और अन्य संवेदनशील बिंदुओं की लोड की स्थिति में थर्मल विजन कैमरों से जांच करके संभावित खराबियों और ‘हॉट स्पॉट’ की पहचान की जाएगी। इसमें जलभराव वाले इलाकों, बाजारों, स्कूलों, अस्पतालों, घनी आबादी और सार्वजनिक मार्गों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रबंध निदेशक ने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि विद्युत सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही, देरी या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदारी तय होने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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