West Bengal Congress ने नदिया में नेता व बेटे की हत्या पर पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकाला
कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का आरोप लगाते हुए सोमवार को राज्य पुलिस मुख्यालय तक एक रैली निकाली। यह रैली स्वतंत्रता दिवस पर नदिया जिले में पार्टी नेता अनीसुर रहमान (50) और उनके बेटे अबू सूफियान (24) की हत्या के विरोध में आयोजित की गई थी। अलीपुर इलाके में बारिश के बावजूद करीब 500 कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रैली में हिस्सा लिया।
प्रदर्शनकारियों ने पश्चिम बंगाल पुलिस मुख्यालय तक पहुंचने से पहले लगभग एक किलोमीटर की दूरी तय की। पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (डब्ल्यूबीपीसीसी)के अध्यक्ष सुवंकर सरकार ने बांकुड़ा ज़िले में कथित हमले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के एक स्वयंसेवक के पिता की मौत का मुद्दा भी उठाया। सुवंकर ने रैली के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘हमारे नादिया जिले के नेता और उनके युवा बेटे पर बदमाशों ने गोलियां बरसाईं और बेरहमी से काट डाला, जबकि उन्होंने हाल ही में नकाशीपाड़ा पुलिस थाना प्रभारी को अपनी जान को खतरे के बारे में बताया था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसी तरह, कॉजपा के एक स्वयंसेवक के पिता जनाब माफिक की शनिवार रात बर्दवान चिकित्सा महाविद्यालय और अस्पताल में मौत हो गई।
बांकुड़ा में अपने गांव के एक स्कूल को बेहतर बनाने के बारे में बात करने पर कुछ बदमाशों ने उन पर हमला किया था, जिसके दो दिन बाद उनकी मौत हुई।’’ सुवंकर ने कहा, ‘‘एक के बाद एक घटनाएं हो रही हैं। हम पुलिस महानिदेशक और मुख्यमंत्री से तत्काल और सख्त कदम उठाने की अपील करते हैं। अगर सरकार और पुलिस प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो कांग्रेस कार्यकर्ता विरोध में सड़कों पर उतरेंगे।’’ इस बीच, पुलिस ने बताया कि नदिया मामले में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है।
पुलिस ने बताया कि शनिवार रात करीब 9.30 बजे दोनों पीड़ित अपनी कार से घर लौट रहे थे, तभी उनके घर से करीब 200 मीटर दूर नकाशीपाड़ा में नागाडी रेलवे गेट के पास उनकी गाड़ी को रोका गया। अधिकारियों के मुताबिक, हमलावरों ने कथित तौर पर गाड़ी पर गोली चलाई और फिर धारदार हथियारों से उन दो लोगों पर हमला किया। ज़्यादा खून बहने के कारण दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।पुलिस ने बताया कि बांकुड़ा के इंदस में कॉजपा स्वयंसेवक के पिता जनाब माफिक की मौत के मामले में पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ़्तार किया है।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनमें से तीन को पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि पांच लोगों की शिनाख्त परेड कराई जाएगी।
NTA की UGC-NET दोबारा परीक्षा के खिलाफ Delhi में छात्र संगठनों का प्रदर्शन
कई छात्र संगठनों ने सोमवार को यहां प्रदर्शन किया और तीन विषयों के लिए यूजीसी-नेट परीक्षा दोबारा कराने के राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के फैसले के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन करने का ऐलान किया। उनका आरोप है कि बार-बार हुई गड़बड़ियों से छात्रों की पढ़ाई और करियर की योजनाएं खतरे में पड़ गई हैं। ये विरोध-प्रदर्शन परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर एनटीए की लगातार हो रही आलोचना के बीच हो रहे हैं।
एनटीए ने उन उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया है जिन्होंने इस साल जून में अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र की परीक्षा दी थी। एक विशेषज्ञ समिति को प्रश्न-पत्रों में तथ्यों, टाइपिंग, अनुवाद और से जुड़ी कई गलतियां मिली थीं। दोबारा परीक्षाएं नौ और 10 सितंबर को होंगी और उम्मीदवारों को कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं देना होगा।
दोबारा परीक्षा कराने के फ़ैसले की कई छात्र संगठनों ने आलोचना की है, जिनमें स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) शामिल हैं। इन संगठनों ने राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है और मांग की है कि एनटीए को खत्म किया जाए या परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के लिए उसे जवाबदेह ठहराया जाए। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन से संबद्ध आइसा ने सोमवार को ओखला औद्योगिक क्षेत्र में एनटीए मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और एनटीए को खत्म करने की मांग की।
उनका आरोप था कि तीन परीक्षा रद्द होना परीक्षा एजेंसी की एक और नाकामी है। माकपा से संबद्ध एसएफआई ने एक बयान में कहा कि एनटीए के ताजा फैसले ने एक बार फिर निष्पक्ष और त्रुटि-मुक्त परीक्षा आयोजित करने में उसकी विफलता को उजागर कर दिया है। संगठन ने मांग की कि एनटीए को खत्म कर दिया जाए और उसकी जगह एक पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा प्रणाली लाई जाए।
ये विरोध प्रदर्शन, कथित नीट पेपर लीक को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के एक महीने से भी कम समय बाद हो रहे हैं। एसएफआई ने एजेंसी की बार-बार परीक्षा में विफलता और खराब यूजीसी-नेट प्रश्नपत्र से जुड़े हालात की न्यायिक जांच की भी मांग की। केवाईएस ने एनटीए को तुरंत भंग करने की मांग की।
उसने एनटीए के कथित “घोटालों” की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग की और परीक्षा से जुड़ी अवसंरचना के निजीकरण का विरोध किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने भी दोबारा परीक्षा कराए जाने पर चिंता जताई और कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में गंभीर गलतियों ने परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि एनटीए की गलतियों का खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए और उन्होंने प्रश्न-पत्र तैयार करने और परीक्षा के प्रबंधन के हर चरण में जवाबदेही तय करने की मांग की।
सोलंकी ने कहा, “यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में गंभीर गलतियां बहुत चिंताजनक हैं। एनटीए की गलतियों का खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए।” आइसा ने आरोप लगाया कि जब छात्र और युवा एनटीए मुख्यालय पर एकत्र हुए तो पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। छात्र संगठन ने कहा, “हम विरोध कर रहे छात्रों को बेरहमी से हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा करते हैं।” पुलिस की तरफ से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
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