SEBI का निवेशकों को अलर्ट: Social Media पर लाइव ट्रेडिंग सलाह के आधार पर फैसले न लें
बाजार नियामक सेबी ने सोमवार को निवेशकों को सोशल मीडिया मंचों पर पेश की जा रही ‘लाइव ट्रेडिंग’ रणनीतियों के आधार पर निवेश संबंधी फैसले लेने को लेकर आगाह किया। नियामक ने कहा कि ऐसे सत्रों में बिना पंजीकरण के निवेश सलाहकार सेवाएं दी जा सकती हैं। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा कि उसके संज्ञान में आया है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग ‘लाइव ट्रेडिंग’ सत्रों के जरिये शेयर बाजार में निवेश के लिए वास्तविक समय में सुझाव दे रहे हैं।
सेबी ने बयान में कहा, ‘‘ये लोग खुद को प्रतिभूति बाजार का विशेषज्ञ बताते हैं और कब निवेश करना है, कब बाहर निकलना है, किन रणनीतियों का पालन करना है तथा बाजार सूचकांकों में कौन-सी स्थिति लेनी है, इसका विस्तृत विश्लेषण देते हैं।’’ नियामक ने कहा कि इनमें से कुछ लोग वास्तविक समय में कारोबार करने का दावा करते हैं और अपने कारोबार के प्रदर्शन, प्रत्यक्ष आंकड़ों पर आधारित बाजार के रुख तथा अपेक्षित लक्ष्य भी दिखाते हैं। सेबी ने यह भी कहा कि ऐसे ‘लाइव ट्रेडिंग’ सत्रों को बड़ी संख्या में लोग देख रहे हैं और इनके साथ ‘लाइव चैट’ की सुविधा भी होती है। इसमें कथित तौर पर गैर-पंजीकृत निवेश सलाहकार की सेवाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है।
नियामक ने मई में जारी अपने परिपत्र में कहा था कि निवेशकों की शिक्षा और जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों के लिए बाजार कीमत संबंधी आंकड़े केवल 30 दिन के अंतराल के साथ साझा किए जा सकते हैं और इसके लिए प्रतिभागियों को कोई मौद्रिक प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिए। सेबी ने कहा, ‘‘केवल शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति को किसी प्रतिभूति के पिछले 30 दिन के बाजार मूल्य संबंधी आंकड़ों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, न ही भविष्य की कीमत का संकेत देना चाहिए या किसी प्रतिभूति अथवा प्रतिभूतियों के संबंध में सलाह या सिफारिश देनी चाहिए।’’ सेबी ने स्पष्ट किया कि बाजार के वास्तविक समय के आंकड़े सिवाय प्रतिभूति बाजार के व्यवस्थित संचालन से जुड़े उद्देश्यों या नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करने के मामलों को छोड़कर किसी भी संस्था द्वारा साझा नहीं किए जा सकते। इस संदर्भ में सेबी ने निवेशकों को सावधानी बरतने और सोशल मीडिया पर ‘लाइव’ या वास्तविक समय में कारोबार की रणनीतियां देने वाले लोगों के दावों पर भरोसा नहीं करने की सलाह दी है।
नियामक ने कहा, ‘‘निवेशकों को ऐसे लोगों के सुझावों पर भरोसा नहीं करना चाहिए और ऐसे ‘लाइव ट्रेडिंग’ सत्रों के आधार पर निवेश संबंधी फैसले नहीं लेने चाहिए। उन्हें केवल सेबी में पंजीकृत मध्यस्थों के साथ ही कारोबार करना चाहिए।’’ सेबी ने निवेशकों से प्रतिभूति बाजार में लेनदेन करते समय सतर्क रहने और निवेश संबंधी सलाह के लिए गैर-पंजीकृत व्यक्तियों या संस्थाओं पर निर्भर रहने से बचने को कहा।
Reliance Jio 300 रुपये में लाएगा Jio Prime मेंबरशिप, 1 साल तक नहीं बदलेंगी प्लान की कीमतें
दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल की तरफ से कम कीमत वाले अनलिमिटेड रिचार्ज प्लान बंद कर दिए जाने के बीच प्रतिद्वंद्वी कंपनी रिलायंस जियो 10 साल पुराने ‘प्राइम’ सदस्यता कार्यक्रम को फिर से लाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक, जियो प्राइम सदस्यता वाले ग्राहकों को अगले एक साल तक शुल्क या प्लान में बदलाव नहीं होने की गारंटी देगी।
यह सदस्यता मौजूदा प्रीपेड और पोस्टपेड ग्राहकों के लिए 300 रुपये के शुल्क पर उपलब्ध होगी। इसके अलावा, जियो ने अपने 299 रुपये वाले प्लान के लाभ बढ़ाने की भी तैयारी की है। इस प्लान में प्रतिदिन 1.5 जीबी डेटा मिलता है।
जियो यह कदम एयरटेल के 1.5 जीबी डेटा वाले 299 रुपये समेत कई प्लान बंद किए जाने के बाद उठाने जा रही है। सूत्र ने कहा, ‘‘जियो प्राइम सदस्यता कार्यक्रम मूल रूप से जियो के पहले 10 करोड़ ग्राहकों के प्रति आभार जताने के लिए शुरू किया गया था। अब इसे कीमत की गारंटी और कई अतिरिक्त लाभ देने के लिए एक बार फिर शुरू किया जा रहा है।’’ वहीं, दूसरे नेटवर्क के ग्राहक जियो में अपना नंबर पोर्ट कराकर या नया जियो कनेक्शन लेकर प्राइम सदस्यता ले सकेंगे।
कंपनी 299 रुपये वाले प्लान में जियो हॉटस्टार की सदस्यता, गूगल क्लाउड पर 5,000 जीबी स्टोरेज और गूगल के एआई इंजन ‘प्रो गूगल जेमिनी’ की मुफ्त सुविधा जोड़ने की योजना बना रही है। इस संबंध में जियो को भेजे गए सवालों का कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया है। एयरटेल ने पिछले सप्ताह प्रतिदिन 1.5 जीबी डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग वाले 299, 319, 579, 619 और 649 रुपये के प्रीपेड प्लान बंद कर दिए थे।
इससे अब एयरटेल ग्राहकों के पास अधिक कीमत वाले और ज्यादा दैनिक डेटा वाले प्लान चुनने का ही विकल्प बचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एयरटेल का यह कदम दूरसंचार उद्योग में शुल्क बढ़ने की संभावित दिशा को दर्शाता है। दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियां अपना प्रति ग्राहक औसत राजस्व (एआरपीयू) बढ़ाने पर जोर दे रही हैं।
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