निःसंतान दंपतियों को लूटने वाले गिरोह का पर्दाफाश, चार महिलायें गिरफ्तार, नकदी और जेवर बरामद
भोपाल की देहात पुलिस ने एक ऐसा गिरोह पकड़ा है जो निसन्तान दंपतियों को ठगते थे। इस गिरोह की महिलायें पहले रेकी करती और फिर उस घर को अपना निशाना बनाती जिस घर में शादी के बाद लंबे समय से दंपति को बच्चे पैदा नहीं होते थे, यह गिरोह संतान सुख दिलाने, बीमारी दूर करने और घरेलू परेशानियां खत्म करने का झांसा देकर घर की महिलाओं को आसानी से अपना शिकार बना लेता था।
इस तरह बनाया शिकार
दरअसल पूरा मामला ग्राम झिरनिया नई बस्ती का है, यहां रहने वाली 32 वर्षीय बबीता बाई गौड़ की शादी को 10 साल हो चुके थे बबीता को कोई संतान नहीं थी। संतान नहीं होने के कारण वह मानसिक रूप से परेशान थी। एक दिन दोपहर वह घर पर अकेली थीं। इसी दौरान दो महिलाएं उनके घर पहुंचीं और बबीता से कहा कि उन्हें कमजोरी, चक्कर और टीबी जैसी बीमारी है, फिर दावा किया कि विशेष पूजा और उतारा कराने से उनकी बीमारी, घरेलू परेशानियां और संतान न होने की समस्या दूर हो जाएगी।
नकदी और जेवर लेकर फरार
महिलाओं ने बबीता को भावनात्मक रूप से पहले अपने वश में किया और फिर पूजा के लिए 1100 रुपए मांगे और दवा बताकर दो पुड़ियां भी दीं, जब बबीता ने पैसे नहीं होने की बात कही तो आरोपी महिलाओं ने उसका उतारा करने का बहाना बनाकर उसका चांदी का मंगलसूत्र, पायल और बिछिया मांगे, उन्होंने बबीता को भरोसा दिलवाया की कि पूजा पूरी होने के बाद सभी जेवर वापस कर दिए जाएंगे, लेकिन जेवर लेकर चारों महिलाएं वहां से फरार हो गई, बबीता देर तक इंतजार करती रही, जब महिलायें वापस नहीं आई तो बबीता ने पति को सारी बातें बताई, तब उन्हे एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हुई है। महिलायें बबीता को बेवकूफ बनाकर न सिर्फ जेवर बल्कि नकदी लेकर भी फरार हो गई है।
पूछताछ जारी
बबीता और उसके पति की शिकायत के बाद पुलिस थाने पहुँचें दंपति ने शिकायत दर्ज करवाई, पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन टीम को ऐक्टिव किया और आरोपी महिलाओं को इलाके में ही गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने महिलाओं से सख्ती से पूछताछ की तो सामने आया कि महिलायें रेकी के बाद ऐसे घरों को अपना निशाना बनाती थी। जांच में सामने आया है कि आरोपी महिलाएं फेरी लगाकर जड़ी-बूटी बेचने का काम करती थीं। इसी बहाने वे लोगों के घरों में जाकर उनकी पारिवारिक और निजी परेशानियों की जानकारी जुटाती थीं और अंधविश्वास का फायदा उठाकर ठगी की वारदात को अंजाम देती थीं। पुलिस ने चारों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। चारों ही महिलाएं गांधीनगर थाना की गौड बस्ती के रहने वाली है। महिलाओं का अब तक कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। फिलहाल पुलिस चारों महिलाओं से पूछताछ कर रही है कि उन्होंने और कितने लोगों को ठगा है।
पंजाब की मान सरकार ने फीस रेगुलेशन ऑर्डिनेंस-2026 किया लागू, जानें छात्रों को क्या मिलेगा फायदा
पंजाब में 32 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों और उनके परिवारों को बड़ी राहत देते हुए सीएम भगवंत सिंह मान की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने 'पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) ऑर्डिनेंस, 2026' जारी करके निजी स्कूलों की फीस को सख्त रेगुलेटरी ढांचे के अधीन लाई है.
यह ऑर्डिनेंस सालाना फीस बढ़ोतरी को 5 प्रतिशत तक तय करता है. उन मामलों में फीस रिफंड को अनिवार्य करता है, यहां बीते तीन वर्षों में फीस की बढ़ोतरी 15 प्रतिशत से ज्यादा हुई है. ट्रांसपोर्ट और बिल्डिंग फीस समेत सभी शुल्कों को ट्यूशन फीस भाग मानता है. नियमों के उल्लंघन पर मान्यता रद्द करने समेत कड़ी सजाओं का प्रावधान है.
रिकॉर्ड को अपलोड करने का निर्देश
इस बात को दोहराते हुए शिक्षा को व्यापार बनने की इजाजत नहीं दी जा सकती है. सीएम ने कहा कि उपायुक्तों की अध्यक्षता वाली रेगुलेटरी कमेटियां फीस वृद्धि की बारीकी से जांच करने वाली है. वहीं सभी निजी स्कूलों को अगले 10 दिनों के अंदर तय पोर्टल पर बीते चार सालों में फीस में किसी तरह की बढ़ोतरी का रिकॉर्ड अपलोड करने का आदेश दिए गए हैं.
अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस देने होगी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम भगवंत सिंह मान ने राज्य सरकार की ओर से लाए गए इस ऑर्डिनेंस को अपनी स्वीकृति देने को लेकर राज्यपाल का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि यह आज से ही लागू हो गया है." आज से हर निजी शैक्षणिक संस्थान को बीते चार वर्षों के दौरान एकत्रित की गई फीस का पूरा विवरण 10 दिनों के अंदर पोर्टल पर अपलोड करना होगा. उन्होंने कहा कि जैसे ही यह समय सीमा खत्म होगी, इसके बाद अगर कोई संस्थान विद्यार्थियों से ज्यादा फीस वसूलने में शामिल होता है तो उससे वसूली गई अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस देने होगी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने निजी शैक्षणिक संस्थानों को विद्यार्थियों और अभिभावकों पर अनावश्यक फीस थोपने की छूट दी हुई थी, जिससे शिक्षा प्रणाली को भारी नुकसान पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान विभिन्न खातों के माध्यम से फीस एकत्र करके शिक्षा के नाम पर मुनाफा नहीं कमा सकते.
वास्तविक फीस का पता लगाने के लिए फोरेंसिक ऑडिट करवाया
उन्होंने कहा, "इन संस्थानों द्वारा किसी भी माध्यम से एकत्रित की गई वास्तविक फीस का पता लगाने के लिए एक फोरेंसिक ऑडिट करवाया जाएगा. निजी अन-एडेड स्कूलों द्वारा फीस में मनमाने ढंग से की जाने वाली बढ़ोतरी पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए पंजाब सरकार ने 'पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) ऑर्डिनेंस, 2026' अधिसूचित किया है."




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