फिजिकल हेल्थ- बांहों पर रेत जैसे बारीक खुरदरे दाने:ये ‘चिकन स्किन’ हो सकती है, डॉक्टर से समझें इसका कारण, इलाज और बचाव के टिप्स
कई बार स्किन पर छोटे-छोटे खुरदरे दाने दिखाई देते हैं। ये न पिंपल होते हैं और न ही रैश जैसे लगते हैं। आमतौर पर इनमें दर्द या खुजली भी नहीं होती। इसलिए लोग इन्हें सामान्य समझकर इग्नोर कर देते हैं। हालांकि कई बार ये दाने 'चिकन स्किन' यानी केराटोसिस पिलारिस का संकेत हो सकते हैं। ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, करीब 50% से 80% किशोर और लगभग 40% वयस्क जीवन में कभी–न–कभी इस समस्या का सामना करते हैं। ऐसे में आज 'फिजिकल हेल्थ' में चिकन स्किन की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. डिंपल कोठारी, कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- चिकन स्किन क्या है? जवाब- चिकन स्किन एक कॉमन स्किन प्रॉब्लम है। मेडिसिन की भाषा में इसे ‘केराटोसिस पिलारिस’ कहते हैं। सवाल- चिकन स्किन क्यों होती है? जवाब- पॉइंटर्स से समझते हैं- सवाल- किन लोगों में चिकन स्किन का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- कुछ लोगों में चिकन स्किन का रिस्क ज्यादा होता है। इसके पीछे जेनेटिक्स और स्किन बैरियर से जुड़ी कंडीशन अहम भूमिका निभाती हैं। ग्राफिक में देखिए किन्हें ज्यादा रिस्क होता है- सवाल- चिकन स्किन के लक्षण क्या हैं? जवाब- चिकन स्किन के लक्षण मुख्य रूप से स्किन की बनावट में बदलाव के रूप में दिखाई देते हैं। इसमें छोटे-छोटे खुरदरे दाने उभर सकते हैं और स्किन सामान्य से ज्यादा रफ महसूस होती है। ग्राफिक में इसके सभी लक्षण देखिए- सवाल- चिकन स्किन और सामान्य ड्राई स्किन में क्या फर्क है? जवाब- दोनों समस्याओं में स्किन ड्राई और खुरदरी लग सकती है, लेकिन इनके पीछे की वजह अलग होती है। इसी कारण दोनों का इलाज भी अलग होता है। ग्राफिक में दोनों के बीच का फर्क देखिए- सवाल- चिकन स्किन और फॉलिकुलाइटिस (पिंपल्स) में क्या फर्क है? जवाब- स्किन और पिंपल्स दोनों में स्किन पर छोटे-छोटे दाने दिखाई दे सकते हैं। इसलिए लोग अक्सर इन्हें एक ही समस्या समझ लेते हैं। हालांकि दोनों के लक्षण अलग होते हैं। ग्राफिक में दोनों के बीच का फर्क देखिए- सवाल- क्या चिकन स्किन कोई बीमारी या इंफेक्शन है? जवाब- नहीं, चिकन स्किन कोई बीमारी नहीं है। यह स्किन कंडीशन है। इससे शरीर के दूसरे अंग प्रभावित नहीं होते और ज्यादातर मामलों में यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं बनती। सवाल- क्या चिकन स्किन अपने आप ठीक हो जाती है? जवाब- कई लोगों में उम्र बढ़ने के साथ इसके लक्षण अपने-आप कम हो जाते हैं। कुछ लोगों में यह लंबे समय तक बनी रह सकती है या समय-समय पर फिर उभर सकती है। सवाल- क्या चिकन स्किन का इलाज संभव है? जवाब- हां, लेकिन, इसे हमेशा पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। इलाज का उद्देश्य स्किन के खुरदरेपन, ड्राईनेस और दानों को कम करना होता है। सही इलाज और नियमित स्किन केयर से ज्यादातर लोगों में इसके लक्षण काफी हद तक कंट्रोल हो जाते हैं। सवाल- डॉक्टर चिकन स्किन का इलाज कैसे करते हैं? जवाब- डॉक्टर चिकन स्किन की गंभीरता, लक्षण और स्किन की कंडीशन के अनुसार इलाज तय करते हैं। इसके लिए ये तरीके अपनाए जा सकते हैं- मॉइश्चराइजर: स्किन की ड्राईनेस और खुरदरापन कम करने के लिए दिया जाता है। मेडिकेटेड क्रीम: यूरिया, लैक्टिक एसिड, सैलिसिलिक एसिड या ग्लाइकोलिक एसिड वाली क्रीम, जो केराटिन प्लग को ढीला करने में मदद करती हैं। रेटिनॉइड क्रीम: नई स्किन सेल्स के बनने की प्रक्रिया को सामान्य करने के लिए दी जाती है। लेजर ट्रीटमेंट: अगर रेडनेस ज्यादा हो या दवाओं से पर्याप्त सुधार न हो, तो कुछ मामलों में लेजर ट्रीटमेंट का इस्तेमाल किया जाता है। सवाल- चिकन स्किन की देखभाल कैसे करें? जवाब- चिकन स्किन के लक्षण कम करने के लिए घर पर कुछ उपाय अपनाए जा सकते हैं, जैसेकि- सवाल- किन गलतियों से चिकन स्किन की समस्या बढ़ सकती है? जवाब- कुछ आदतें चिकन स्किन के लक्षणों को बढ़ा सकती हैं, जैसेकि- सवाल- क्या वैक्सिंग, शेविंग या हेयर रिमूवल से चिकन स्किन बढ़ सकती है? जवाब- हां, वैक्सिंग, शेविंग या हेयर रिमूवल से स्किन में जलन हो सकती है। इससे चिकन स्किन के दाने कुछ समय के लिए ज्यादा उभरे हुए या लाल दिख सकते हैं। सवाल- कौन से पोषक तत्व चिकन स्किन से बचाव में मदद करते हैं? जवाब- चिकन स्किन को सिर्फ खानपान से रोका नहीं जा सकता। हालांकि, कुछ पोषक तत्व स्किन को हेल्दी रखने और स्किन बैरियर को मजबूत बनाए रखने में मदद कर सकते हैं, जैसेकि- ध्यान दें इन पोषक तत्वों का पर्याप्त सेवन स्किन हेल्थ के लिए फायदेमंद है, लेकिन ये चिकन स्किन का इलाज नहीं है और न ही इनसे इसके पूरी तरह ठीक होने की गारंटी होती है। सवाल- किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए? जवाब- अगर नीचे ग्राफिक में दिए लक्षण दिखें, तो तुरंत डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लें- चिकन स्किन कोई इमरजेंसी नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। अगर लंबे समय तक दाने बने रहें या उनमें बदलाव दिखे, तो सही कारण जानने के लिए स्किन स्पेशलिस्ट से सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प है। …………………………. ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- बैठने, खड़े रहने पर भी फूलती है सांस:हो सकता है डिस्प्निया, डॉक्टर से जानें यह कब खतरनाक, बचाव के लिए 6 सावधानियां आपने देखा होगा कि कुछ लोग थोड़ी दूर चलने, सीढ़ियां चढ़ने या हल्का-सा काम करने पर ही हांफने लगते हैं। ऐसा कभी-कभार हो तो सामान्य है। लेकिन बिना किसी मेहनत या मूवमेंट के अगर बैठे–बैठे भी सांस फूल रही है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पूरी खबर पढ़ें…
जरूरत की खबर- बारिश में खराब इंटरनेट कनेक्शन:वाई-फाई न चले तो तुरंत करें ये काम, एक्सपर्ट से जानें बेहतर इंटरनेट के 12 टिप्स
बारिश के मौसम में इंटरनेट और वाई-फाई से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं। कभी नेटवर्क स्लो हो जाता है, कभी वीडियो कॉल अटकने लगती है तो कभी OTT पर वीडियो बार-बार बफर होता है। ऐसे में वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन क्लास और डिजिटल पेमेंट जैसे जरूरी काम बाधित होते हैं। दरअसल भारी बारिश, लगातार नमी, वोल्टेज फ्लक्चुएशन और केबल डैमेज जैसी वजहों से इंटरनेट नेटवर्क और उससे जुड़े उपकरणों में खराबी की संभावना बढ़ जाती है। कई बार इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के नेटवर्क में खराबी या सर्विस से जुड़ी समस्या के कारण भी कनेक्शन कमजोर हो जाता है। वहीं घर में राउटर की खराब पोजिशनिंग, वायरिंग या तकनीकी खराबी भी स्लो इंटरनेट की वजह बन सकती है। हालांकि, कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर बारिश के मौसम में इंटरनेट और वाई-फाई की समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में बारिश में होने वाली वाई-फाई की प्रॉब्लम्स और उसके समाधान पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- प्रितेश खाकरे, सिस्टम इंजीनियर, भोपाल सवाल- बारिश में इंटरनेट और वाई-फाई प्रॉब्लम्स क्यों बढ़ जाती हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सभी मुख्य कारण ग्राफिक में देखिए- सवाल- मानसून में सबसे ज्यादा कौन-सी प्रॉब्लम्स होती हैं? जवाब- इस दौरान इंटरनेट स्पीड स्लो होना एक कॉमन प्रॉब्लम है। इंटरनेट से जुड़ी सभी समस्याएं ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या बारिश का असर फाइबर इंटरनेट पर भी पड़ता है? जवाब- हां, इसमें दिक्कत आमतौर पर केबल के कनेक्शन पॉइंट, पावर सप्लाई, जॉइंट या दूसरे नेटवर्क उपकरणों में पानी और नमी पहुंचने से होती है। इसके अलावा तेज बारिश, सड़क खुदाई, जलभराव या पेड़ गिरने से केबल डैमेज होने पर भी इंटरनेट बाधित हो सकता है। सवाल- बारिश का असर मोबाइल डेटा पर क्यों पड़ता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या नमी (ह्यूमिडिटी) वाई-फाई राउटर को नुकसान पहुंचा सकती है? जवाब- हां, लंबे समय तक नमी रहने से राउटर के अंदर कंडेन्सेशन हो सकता है। इससे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स में जंग या शॉर्ट सर्किट का रिस्क बढ़ जाता है। इसलिए बारिश में राउटर को सूखी और हवादार जगह पर रखना चाहिए। सवाल- बारिश में वाई-फाई स्लो हो जाए तो क्या करें? जवाब- सबसे पहले राउटर को रीस्टार्ट करें और कुछ मिनट बाद इंटरनेट स्पीड चेक करें। अगर समस्या बनी रहे तो सर्विस प्रोवाइडर से शिकायत करें। साथ ही ग्राफिक में दिए ये कदम उठाएं- सवाल- आंधी-बारिश में बेहतर इंटरनेट सर्विस के लिए क्या करें? जवाब- बेहतर इंटरनेट सर्विस के लिए सिर्फ अच्छा प्लान लेना काफी नहीं होता। राउटर और नेटवर्क उपकरणों की सही देखभाल भी जरूरी है। बेहतर सर्विस के लिए ग्राफिक में दी गई कुछ बातों का ध्यान रखें- सवाल- LAN केबल और वाई-फाई में क्या अंतर है। दोनों में से क्या यूज करना बेहतर है? जवाब- इसे पाॅइंटर्स से समझिए- LAN (लोकल एरिया नेटवर्क) वाई-फाई नेटवर्क क्या बेहतर? अगर नेटवर्क में ज्यादा स्थिरता चाहिए तो LAN बेहतर विकल्प है। सवाल- क्या वोल्टेज फ्लक्चुएशन से इंटरनेट डिवाइस खराब हो सकती है? जवाब- हां, वोल्टेज फ्लक्चुएशन से राउटर, मोडेम और ONT (ऑप्टिकल नेटवर्क टर्मिनल) खराब हो सकते हैं। अचानक हाई वोल्टेज आने पर सर्किट जलने का रिस्क रहता है। इसलिए मानसून में सर्ज प्रोटेक्टर और UPS का इस्तेमाल करना सुरक्षित माना जाता है। सवाल- क्या बिजली चमकने पर या तूफान में वाई-फाई बंद कर देना चाहिए? जवाब- हां, बिजली गिरने से पावर लाइन या नेटवर्क केबल के जरिए सर्ज आ सकता है। इससे डिवाइस खराब हो सकती है। इासलिए सिर्फ राउटर बंद करने की बजाय उसका पावर प्लग भी निकाल दें। सवाल- क्या पुराने राउटर मानसून में ज्यादा दिक्कत करते हैं? जवाब- हां, पुराने हार्डवेयर में हीट मैनेजमेंट कमजोर होता है। ये नए नेटवर्क स्टैंडर्ड को भी सही तरीके से सपोर्ट नहीं कर पाते। अगर राउटर बार-बार हैंग हो रहा हो, गर्म हो रहा हो या डिसकनेक्ट हो रहा हो तो उसे बदल देना चाहिए। सवाल- मानसून में वाई-फाई राउटर कहां रखना चाहिए? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- मानसून में राउटर को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें- सवाल- घर में कौन-सी चीजें वाई-फाई सिग्नल कमजोर करती हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- वीडियो कॉल बार-बार अटक रही हो तो क्या करें? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का खास ध्यान रखें- सवाल- वाई-फाई बार-बार डिस्कनेक्ट हो तो क्या करें? जवाब- ऐसे में कुछ कदम उठाएं- …………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- बारिश में छत-दीवारों में बढ़ता लीकेज: इन 10 संकेतों को न करें इग्नोर, घर की सीलन और लीकेज ठीक करने के 6 तरीके बारिश के मौसम में कई घरों में छत से पानी टपकने, दीवारों पर सीलन आने और पेंट उखड़ने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। शुरुआत में यह मामूली लगती हैं। लेकिन लगातार नमी घर की दीवारों और छत को कमजोर कर सकती है। पूरी खबर पढ़िए…
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