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पीएम विश्वकर्मा योजना में मिल रहा दैनिक स्टाइपेंड और आर्थिक संबल, जानिए पात्रता और फायदे

PM Vishwakarma Yojana: हमारे समाज में सदियों से पारंपरिक हुनर और हाथों की कला से अपनी आजीविका चलाने वाले कामगार देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव रहे हैं. मिट्टी के बर्तन बनाने वाले से लेकर लोहे को आकार देने वाले और सिलाई-कढ़ाई करने वाले तक, ये सभी मेहनतकश अपने कौशल से स्थानीय बाजार को जीवंत बनाए रखते हैं. इन हुनरमंद हाथों को आधुनिक पहचान और वित्तीय मजबूती देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना का संचालन कर रही है. यह योजना न केवल पारंपरिक व्यवसायों को संरक्षण देती है, बल्कि कारीगरों को आधुनिक तकनीक और पर्याप्त पूंजी से जोड़कर उनके कारोबार को विस्तार देने का अवसर भी प्रदान करती है.

पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप तराशना

इस महत्वाकांक्षी योजना का सबसे प्रमुख पहलू यह है कि इसमें कारीगरों के पुस्तैनी हुनर को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ा जाता है. सरकार का मानना है कि पारंपरिक कारीगरों के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन आधुनिक मशीनों और उन्नत तरीकों की जानकारी न होने से वे बड़े बाजारों में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते हैं. इसी कमी को दूर करने के लिए योजना के तहत लाभार्थियों को बुनियादी और एडवांस स्तर का विशेष कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है. इस ट्रेनिंग प्रोग्राम की सबसे अच्छी बात यह है कि प्रशिक्षण के दौरान कारीगर की दैनिक मजदूरी का नुकसान न हो, इसके लिए प्रतिदिन पांच सौ रुपये का स्टाइपेंड भी सरकार सीधे उनके बैंक खाते में भेजती है.

आधुनिक औजारों की खरीद के लिए मिलता है अनुदान

हुनर सीखने के साथ ही काम को गति देने के लिए आधुनिक उपकरणों का होना बेहद जरूरी होता है. कई बार आर्थिक तंगी के कारण छोटे कामगार जरूरी टूलकिट नहीं खरीद पाते हैं. पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रत्येक पात्र कामगार को पंद्रह हजार रुपये का टूलकिट प्रोत्साहन अनुदान दिया जाता है. इस आर्थिक मदद से लाभार्थी अपने व्यवसाय के लिए उच्च गुणवत्ता वाले आधुनिक औजार खरीद सकते हैं. जब काम में आधुनिक औजारों का उपयोग होता है, तो काम की गति बढ़ जाती है और उत्पाद की फिनिशिंग भी बाजार के मानकों के अनुकूल बेहतर हो जाती है.

कम ब्याज दर पर आसान लोन से शुरू करें अपना काम

अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए पूंजी सबसे बड़ी आवश्यकता होती है. छोटे कारीगरों को अक्सर बैंक से बिना गारंटी के लोन मिलना कठिन होता है. इस समस्या का समाधान करते हुए सरकार इस योजना में कोलेटरल फ्री यानी बिना किसी गारंटी के बहुत ही सस्ती ब्याज दर पर तीन लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराती है. यह सहायता दो चरणों में प्रदान की जाती है. पहले चरण में कामगार को एक लाख रुपये का लोन दिया जाता है, जिसे अठारह महीनों की आसान किस्तों में चुकाना होता है. इस लोन का समय पर पुनर्भुगतान करने के बाद दूसरे चरण में दो लाख रुपये का अतिरिक्त लोन मिल जाता है, जिसे तीस महीनों की अवधि में वापस करना होता है.

योजना के दायरे में शामिल हैं कई पारंपरिक कार्य क्षेत्र

इस योजना का लाभ समाज के विभिन्न वर्गों के कामगारों तक पहुंचाने के लिए अठारह प्रमुख पारंपरिक ट्रेड को इसके दायरे में शामिल किया गया है. लकड़ी का काम करने वाले बढ़ई, नाव बनाने वाले और लोहे को आकार देने वाले लोहार इस योजना के लिए पूरी तरह पात्र हैं. इसके अलावा ताला बनाने वाले, पारंपरिक अस्त्रकार, हथौड़ा और टूलकिट बनाने वाले कारीगर भी इसका पूरा फायदा उठा सकते हैं. निर्माण क्षेत्र से जुड़े राजमिस्त्री, पत्थर तोड़ने वाले और पत्थर तराशकर शानदार मूर्तियां बनाने वाले मूर्तिकारों को भी इस योजना के तहत व्यापक लाभ दिया जाता है.

रोजमर्रा की सेवाएं देने वाले कारीगर भी हैं पूरी तरह पात्र

गांव और शहरों में दैनिक स्तर पर अपनी सेवाएं देने वाले अनगिनत मेहनतकश लोग भी इस योजना का हिस्सा बन सकते हैं. बाल काटने वाले नाई, कपड़े धोने वाले धोबी और सिलाई का काम करने वाले दर्जी इस योजना में आवेदन कर आर्थिक सहायता ले सकते हैं. चमड़े का काम करने वाले मोची और जूता बनाने वाले कारीगरों के साथ-साथ टोकरी, चटाई और झाड़ू बनाने वाले दस्तकार भी इसके दायरे में आते हैं. वहीं माला बनाने वाले मालाकार, पारंपरिक गुड़िया और खिलौना निर्माता तथा मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले कारीगर भी योजना के जरिए अपने कार्य को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं.

हुनरमंदों के उज्ज्वल भविष्य की राह

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना सही मायनों में उन मेहनतकश हाथों का सम्मान है, जो अपनी मेहनत से समाज को सुंदर और उपयोगी वस्तुएं प्रदान करते हैं. वित्तीय सहायता, आधुनिक प्रशिक्षण, मुफ्त टूलकिट अनुदान और बाजार से जुड़ाव जैसी सुविधाएं मिलकर कारीगरों को साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराती हैं. यह योजना न केवल कारीगरों की सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ा रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर देश के आर्थिक विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित कर रही है. पात्र व्यक्ति अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र के माध्यम से इस कल्याणकारी योजना में आसानी से आवेदन कर सकते हैं.

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Women Health: बार-बार लगने वाली भूख और Weight Gain पर कैसे लगाएं लगाम? जानें Mindful Eating टिप्स

प्रेग्नेंसी के समय एक हेल्दी बच्चे के लिए जरूरी होता है कि महिलाएं अपनी डाइट में जरूरी पोषण को शामिल करें। प्रेग्नेंट महिलाओं को अक्सर यह कहा जाता है कि उनको दो लोगों का खाना खाना चाहिए। वहीं इमोशनल, हार्मोनल बदलाव और शारीरिक बदलावों की वजह से प्रेग्नेंट महिलाएं ज्यादा खाने भी लगती हैं। जिस कारण इस दौरान उनका वेट बढ़ जाता है। प्रेग्नेंसी में बढ़ता वेट न सिर्फ महिला की सेहत बल्कि बच्चे की सेहत और डिलीवरी के लिए भी सही नहीं माना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि प्रेग्नेंसी में ओवरईटिंग से बचने के लिए क्या करना चाहिए।

प्रेग्नेंसी में ओवरईटिंग से बचने के टिप्स

एक स्टडी के मुताबिक प्रेग्नेंसी में खाने पर कंट्रोल न करना एंग्जायटी और तनाव को बढ़ाता है। वहीं यह वेट बढ़ने का भी कारण बन सकता है।

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प्रेग्नेंसी में क्रेविंग्स, परिवार का प्रेशर या हार्मोनल बदलाव की वजह से महिलाएं ज्यादा खा लेती हैं। ऐसे में प्रेग्नेंसी में ओवरईटिंग से वेट बढ़ जाता है। इससे हाई बीपी, जस्टेशनल डायबिटीज, एसिडिटी और डिलीवरी के समय जोखिम बढ़ जाता है। इन जोखिमों को कम करने के लिए और ओवरईटिंग से बचने के लिए आप इन टिप्स को फॉलो कर सकती हैं।

इस मिथक से बचें

प्रेग्नेंसी की शुरूआत में गर्भ में पलने वाले बच्चे का आकार एक छोटे बीज या फल के समान होता है। इसलिए उसको अपने लिए भोजन की जरूरत नहीं होती है। आप जो खाती हैं, उससे बच्चे को पोषण मिलता है। प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही तक आप नॉर्मल कैलोरी ले सकती हैं। दूसरी और तीसरी तिमाही में ज्यादा कैलोरी इनटेक लेना चाहिए। हालांकि इसके लिए बहुत खाने की जरूरत नहीं है। भोजन में सिर्फ 300 से 450 ज्यादा कैलोरी सही है।

दिन में 5-6 छोटे मील लेने चाहिए

अगर दिन में एक बार ही पेट भर के खाना खाएंगी, तो गर्भाशय का पेट पर दबाव पड़ेगा। जिस कारण आपको एसिडिटी, ब्लोटिंग और भारीपन महसूस हो सकता है। इसलिए इसकी जगह दिनभर के भोजन को 5-6 छोटे-छोटे मील में बांट लें। हर 2 से 3 घंटे में कुछ हल्का और पौष्टिक खाएं। इससे ब्लड शुगर लेवल स्थिर रहेगा और अचानक तेज भूख का एहसास भी नहीं होगा।

डाइट में प्रोटीन और फाइबर की बढ़ाएं

फाइबर और प्रोटीन पचने में थोड़ा समय लेते हैं, इससे आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है। प्रोटीन के लिए थाली में दही, उबला अंडा, पनीर, अंकुरित अनाज, दालें और टोंड मिल्क डाइट में शामिल करें। वहीं फाइबर के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, ओट्स और मौसमी फल खाएं।

असली भूख और क्रेविंग में फर्क

प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलावों की वजह से तीखा, मीठा या जंक फूड खाने की क्रेविंग बढ़ जाती है। इस दौरान जब भी कुछ खाने का मन करे, तो 1 गिलास पानी या नारियल पानी पीकर 10 मिनट रुकें। कई बार शरीर डिहाइड्रेशन को भूख समझ लेता है। इसके बाद भी अगर खाने की इच्छा हो, तो भुना चना या मुट्ठी भर ड्राई फ्रूट्स खाएं।

प्रोसेस-फूड और सिर्फ कैलोरी से बचना चाहिए

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक कोल्ड ड्रिंक्स, समोसे, मिठाइयां, पिज्जा, बिस्कुट और पैकेटबंद जूस पोषण नहीं होता है। लेकिन इनमें कैलोरी बहुत होती है। इन चीजों के सेवन से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है और फिर अचानक लो होता है। इस वजह से आपको थोड़ी देर बाद फिर से भूख लगने लगती है। इसलिए आप प्रोसेस फूड्स या खाली कैलोरी की बजाय घर का हेल्दी और ताजा खाना खाएं।

माइंडफुल ईटिंग

खाना खाते समय माइंडफुल ईटिंग अपनाना चाहिए। खाना खाते समय मोबाइल चलाना, टीवी देखना या किसी एंग्जायटी में रहना ओवरईटिंग की सबसे बड़ी वजह हो सकती है। जब आप बिना ध्यान दिए खाते हैं, तो दिमाग को पेट भरने का सिग्नल देर से मिलता है। इसलिए आराम से बैठकर चबा-चबाकर खाना खाएं। वहीं खाना खत्म करने में कम से कम 15 से 20 मिनट का समय लें।

पर्याप्त नींद है जरूरी

नींद की कमी और तनाव शरीर में कोर्टिसोल और घ्रेलिन जैसे हार्मोन्स को बढ़ा देता है। जोकि भूख को ज्यादा बढ़ाते हैं। इसलिए रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी और गहरी नींद लेना जरूरी है। सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल न करें। इसकी जगह पर मेडिटेशन, हल्का संगीत या डॉक्टर की सलाह पर वॉक करें।

एक रिसर्च स्टडी के मुताबिक नींद की समस्याओं और बिंज ईटिंग के बीच कनेक्शन है। नींद की कमी होने और ज्यादा खाने की आदत मिलकर एक हानिकारक हार्मोनल और मेटाबॉलिक चक्र पैदा कर सकता है। जिसका हेल्थ पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

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PAK vs ENG: बाबर आजम हुए बाहर, इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट के लिए पाकिस्तान को मिला नया कप्तान

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