बिहार सरकार कोचिंग सेंटरों की मनमानियों पर लगाएगी रोक, ज्यादा फीस लेने पर लगेगा लाखों का जुर्माना
Bihar New Coaching Rules: बिहार में कोचिंग संस्थानों की मनमानी और मनमाफिक फीस वसूली पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार एक बहुत बड़ा कदम उठाने जा रही है. शिक्षा विभाग के स्तर पर एक बेहद सख्त और नई कोचिंग पॉलिसी लाने की तैयारी अंतिम चरण में चल रही है. इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य छात्रों को कोचिंग सेंटरों के मानसिक और आर्थिक दबाव से मुक्ति दिलाना है.
सरकार इस पॉलिसी के तहत कोचिंग सेंटरों को पूरी तरह नियंत्रित और संचालित करने के लिए एक विशेष नियंत्रण व विनियमन प्राधिकरण का गठन करने जा रही है. अगर कोई भी कोचिंग संस्थान इस नई पॉलिसी के नियमों की अनदेखी करता है या उसका उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर दो लाख रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा. इस पूरी नीति का खाका तैयार करने के लिए बिहार सरकार फिलहाल राजस्थान सरकार की सफल कोचिंग पॉलिसी का गहराई से अध्ययन कर रही है ताकि नियमों को पूरी तरह व्यावहारिक बनाया जा सके.
एक साथ पूरे साल की फीस वसूलने पर लगेगी रोक
वर्तमान समय में बड़े नाम वाले कोचिंग संस्थान छात्रों और उनके अभिभावकों से एक बार में या फिर ज्यादा से ज्यादा दो किश्तों में पूरे साल की भारी भरकम फीस एडवांस में वसूल लेते हैं. सरकार की इस नई कोचिंग पॉलिसी के लागू होने के बाद इस तरह की मनमानी पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी. अब कोई भी संस्थान किसी भी छात्र से एक साथ पूरे साल की फीस नहीं मांग सकेगा. कोचिंग संस्थानों को हर हाल में छात्रों को आसान मासिक या त्रैमासिक किश्तों में फीस जमा करने का विकल्प देना होगा.
इसके अलावा, कोर्स शुरू होने के बाद बीच में कोई भी संस्थान अपनी फीस में किसी भी तरह की बढ़ोतरी नहीं कर सकेगा. नई व्यवस्था के तहत सभी कोचिंग सेंटरों को गठित अथॉरिटी के पास एक लिखित शपथ पत्र भी जमा करना होगा. अगर कोई छात्र किसी कारणवश बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ देता है, तो कोचिंग संस्थान को बिना किसी आनाकानी या झंझट के उसकी बची हुई अवधि की फीस, हॉस्टल और मेस की राशि तुरंत वापस करनी होगी.
5 घंटे से ज्यादा पढ़ाई पर पाबंदी और नए नियम
छात्रों की सहूलियत और उनके बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए इस पॉलिसी में राजस्थान मॉडल की तर्ज पर कई कड़े नियम जोड़े जा रहे हैं. अब कोई भी कोचिंग सेंटर एक दिन में छात्रों को पांच घंटे से अधिक समय तक नहीं पढ़ा सकेगा. इसके साथ ही, हफ्ते में एक दिन छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए साप्ताहिक छुट्टी देना पूरी तरह से अनिवार्य होगा.
इस साप्ताहिक छुट्टी के ठीक अगले दिन कोचिंग संस्थान किसी भी तरह का टेस्ट या परीक्षा का आयोजन नहीं कर सकेंगे ताकि बच्चों को छुट्टी का पूरा लाभ मिल सके. बच्चों के मानसिक तनाव को कम करने के लिए हर कोचिंग सेंटर में एक प्रोफेशनल साइकोलॉजिस्ट को रखना जरूरी होगा, जो समय समय पर काउंसिलिंग के जरिए छात्रों की मदद करेंगे. इसके अलावा, बच्चों की बुद्धिमत्ता या नंबरों के आधार पर कोचिंग में अलग अलग स्पेशल बैच या स्टार बैच बनाने पर भी पूरी तरह से रोक रहेगी ताकि बच्चों में हीन भावना न आए.
भीड़ से बचाने के लिए शहर के बाहर शिफ्ट होंगे कोचिंग सेंटर
शहरी इलाकों में कोचिंग संस्थानों की भारी तादाद की वजह से लगने वाले जाम और भीड़भाड़ की गंभीर समस्या से निपटने के लिए भी सरकार एक बड़ा मास्टर प्लान बना रही है. इसके तहत आने वाले समय में बड़े कोचिंग संस्थानों को शहर के मुख्य और व्यस्त दायरे से बाहर निर्धारित क्षेत्रों में ले जाने का फैसला लिया जा सकता है. नए नियमों के अनुसार, क्लासरूम के भीतर भी बच्चों के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें प्रति छात्र कम से कम एक से डेढ़ मीटर की जगह होना बेहद आवश्यक है. इसके साथ ही राज्य में चल रहे सभी छोटे और बड़े कोचिंग संस्थानों के लिए सरकार के पास अपना रजिस्ट्रेशन कराना पूरी तरह से अनिवार्य किया जा रहा है, बिना रजिस्ट्रेशन के चलने वाले संस्थानों को अवैध माना जाएगा.
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Explainer: तीन देशों का दौरा, कई बड़े समझौते, जानिए PM मोदी की विदेश यात्रा भारत के लिए क्यों है अहम
PM Modi Foreign Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की अपनी तीन देशों की महत्वपूर्ण यात्रा पूरी कर ली है. इस दौरे के बाद वह भारत के लिए रवाना हो गए हैं. इस यात्रा का सबसे अहम पड़ाव न्यूजीलैंड रहा, जहां भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों को नई दिशा मिली. दोनों देशों ने अपने संबंधों को आगे बढ़ाते हुए रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की है.
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा सिर्फ कूटनीतिक मुलाकात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच सहयोग का मजबूत आधार भी तैयार हुआ है. यात्रा के अंत में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सम खुद एयरपोर्ट पहुंचे और प्रधानमंत्री मोदी को विदाई दी, जिसे दोनों देशों के मजबूत रिश्तों का प्रतीक माना जा रहा है.
40 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक रहा. पिछले चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली न्यूजीलैंड यात्रा थी. ऑकलैंड पहुंचने पर उनका पारंपरिक माओरी रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया. इसके बाद उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया.
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सम के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक हुई. दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, कृषि, शिक्षा, पर्यटन, खेल और संस्कृति जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की.
2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि भारत और न्यूजीलैंड के बीच नई रणनीतिक साझेदारी रही. दोनों देशों ने 'भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी: रोडमैप टू 2030' को मंजूरी दी. इसके तहत अगले चार वर्षों में कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा.
दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को दोगुना कर 7 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर यानी करीब 2.35 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है. हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते को तेजी से लागू करने पर भी सहमति बनी है.
कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कीवीफ्रूट एक्शन प्लान शुरू किया जाएगा. साथ ही भारत के नागालैंड और उत्तराखंड में दो एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जिससे कृषि अनुसंधान और तकनीक को बढ़ावा मिलेगा.
रक्षा और सुरक्षा सहयोग हुआ मजबूत
भारत और न्यूजीलैंड ने रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में 18 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. सबसे अहम समझौता दोनों देशों की रक्षा एजेंसियों के बीच समुद्री सहयोग को लेकर हुआ है.
इसके तहत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देश मिलकर काम करेंगे. नौसेनाओं के बीच लॉजिस्टिक्स सपोर्ट बढ़ाने पर भी सहमति बनी है.
आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए दोनों देशों ने एक संयुक्त कार्य समूह बनाने का फैसला किया है, जो खुफिया जानकारी साझा करेगा. इसके अलावा आपदा प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने के लिए भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और न्यूजीलैंड की संबंधित एजेंसी के बीच भी समझौता हुआ है.
पर्यटन, शिक्षा और विज्ञान में भी बढ़ेगा सहयोग
भारत और न्यूजीलैंड ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सीधी उड़ानों की संभावनाओं पर काम करने का फैसला किया है. दोनों देशों की एयरलाइंस को इस दिशा में प्रोत्साहित किया जाएगा.
खेलों के क्षेत्र में खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और स्पोर्ट्स साइंस को लेकर संयुक्त कार्य योजना बनाई गई है. समुद्री विरासत के संरक्षण के लिए भारत के लोथल स्थित राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर और न्यूजीलैंड मैरीटाइम म्यूजियम के बीच समझौता हुआ है.
विज्ञान और शोध के क्षेत्र में गोवा के राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केंद्र तथा यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी के बीच अंटार्कटिका अनुसंधान पर सहयोग बढ़ेगा. खाद्य प्रौद्योगिकी और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी कई संस्थानों ने साझेदारी की है. इसके अलावा न्यूजीलैंड ने वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन में शामिल होने का फैसला भी किया है.
एक नजर में दौरे की बड़ी बातें
- 40 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड का दौरा किया.
- भारत और न्यूजीलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत हुई.
- रोडमैप 2030 के तहत व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य तय किया गया.
- रक्षा और सुरक्षा से जुड़े 18 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए.
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी.
- आतंकवाद से निपटने के लिए संयुक्त कार्य समूह बनाया जाएगा.
- पर्यटन, शिक्षा, विज्ञान और खेल के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का फैसला हुआ.
- न्यूजीलैंड ने वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन में शामिल होने की घोषणा की.
- कृषि क्षेत्र में कीवीफ्रूट एक्शन प्लान और दो एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे.
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इंडोनेशिया में भी हुए अहम फैसले
न्यूजीलैंड से पहले प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया पहुंचे थे. वहां उन्होंने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ मुलाकात की और रक्षा, व्यापार तथा समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की.
दौरे के दौरान दोनों नेताओं ने करीब एक हजार साल पुराने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रामबानन मंदिर के जीर्णोद्धार परियोजना का संयुक्त उद्घाटन भी किया. इस पहल को भारत और इंडोनेशिया के सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
ऑस्ट्रेलिया दौरे में भी कई बड़ी घोषणाएं
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेता सम्मेलन में भी हिस्सा लिया. इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने के लिए संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया.
ऑस्ट्रेलिया ने भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम निर्यात से जुड़े प्रशासनिक इंतजामों को अंतिम रूप देने की घोषणा की. इसके अलावा खेल के क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लिया गया. घोषणा की गई कि ऑस्ट्रेलिया की मशहूर बिग बैश लीग का अगला सीजन भारत के चेन्नई में खेले जाने वाले ऐतिहासिक मुकाबले से शुरू होगा.
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भारत की विदेश नीति को मिली नई मजबूती
प्रधानमंत्री मोदी की यह तीन देशों की यात्रा भारत की विदेश नीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इस दौरे के दौरान व्यापार, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, विज्ञान, शिक्षा, पर्यटन और कृषि जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौते हुए. साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका भी और मजबूत हुई. विशेषज्ञों का मानना है कि इन समझौतों का असर आने वाले वर्षों में भारत के आर्थिक, सामरिक और वैश्विक संबंधों को नई मजबूती देने में दिखाई देगा.
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