वियतनाम में भारतीय दूतावास ने बताया कि शनिवार को वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास कई भारतीय पर्यटकों को ले जा रही एक नाव पलट गई, जिसके बाद स्थानीय अधिकारी खोज और बचाव अभियान चला रहे हैं। दूतावास ने एक बयान में कहा कि एक दुखद घटना में, कुछ घंटे पहले वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास कई भारतीय पर्यटकों को ले जा रही एक नाव पलट गई। दूतावास ने आगे कहा कि "घटना की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है और स्थानीय अधिकारियों द्वारा खोज और बचाव अभियान जारी है।
दूतावास ने कहा है कि उसने प्रभावित परिवारों की मदद करने और घटना के बारे में जानकारी देने के लिए हो ची मिन्ह सिटी और हनोई में कंट्रोल रूम बनाए हैं। बयान में कहा गया, "प्रभावित परिवारों को जानकारी और मदद देने के लिए हो ची मिन्ह सिटी में भारत के कॉन्सुलेट जनरल में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। साथ ही यह भी बताया गया कि हनोई में भी एक और कंट्रोल रूम बनाया गया है।
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एक तरफ पाकिस्तान के साथ तनाव चरम पर है तो दूसरी तरफ तालिबान भारत के साथ अपने रिश्तों को लगातार मजबूत करने में जुटा है और इसी कड़ी में तालिबान के कृषि सिंचाई और पशुपालन मंत्री अताउल्लाह उमारी का भारत दौरा कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है और यह दौरा बदलते क्षेत्रीय समीकरणों और नई कूटनीतिक दिशा का भी बड़ा संकेत है और भारत पहुंचते ही अताउल्ला उमारी ने जो बात कही उसने इस दौरे की अहमियत और बढ़ा दी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि भारत और अफगानिस्तान का रिश्ता कोई आज का रिश्ता नहीं बल्कि सदियों पुराना है। उन्होंने कहा कि यहां आने के बाद मुझे ऐसा लगा जैसे मैं अपने ही लोगों के बीच में हूं। मुझे कभी भी नहीं लगा कि मैं किसी अजनबी देश में हूं। इतना ही नहीं उन्होंने दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे जुड़ाव का जिक्र करते हुए यह तक कह दिया कि हमारा डीएनए एक है। इस बयान को तालिबान की ओर से भारत के प्रति सकारात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
तालिबान चाहता है कि भारत अफगानिस्तान को आधुनिक खेती की तकनीक, अच्छे और भरोसेमंद बीज, फलों की प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज और कृषि उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग व बिक्री में मदद करी। इसके अलावा तालिबान ने भारत को डेयरी, पोल्ट्री, एनिमल ब्रीडिंग और आर्टिफिशियल इंसमिनेशन जैसे क्षेत्रों में निवेश का न्योता दिया। अफगानिस्तान का कहना है कि वह केमिकल फर्टिलाइज़र्स पर निर्भरता कम करके ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देना चाहता है। साथ ही वह चाहता है कि भारत किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने और रूरल डेवलपमेंट में भी सहयोग करें। इसके अलावा काबुल में होने वाली एग्रीकल्चर एक्सो में भारतीय कंपनियों को हिस्सा लेने का निमंत्रण भी दिया गया। अगर पिछले करीब एक साल पर नजर डालें तो यह भारत आने वाले तालिबान के चौथे वरिष्ठ मंत्री हैं। इससे पहले तालिबान के विदेश मंत्री, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री भी नई दिल्ली का दौरा कर चुके हैं।
दोनों पक्षों के बीच संपर्क लगातार बढ़ रहा है और भारत ने भले ही अब तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर बातचीत और सहयोग का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते भी नए-नए हैं। पिछले दो दशकों में भारत ने अफगानिस्तान में अरबों रुपए की विकास परियोजनाएं पूरी की हैं। संसद भवन का निर्माण, सलमाबान, सड़कें, बिजली परियोजनाएं, स्कूल, अस्पताल और मानवीय सहायता। भारत लगातार अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा रहा। 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भी भारत ने मानवीय सहायता, दवाइयां, गेहूं और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति जारी रखी। भारत की कोशिश रही है कि अफगानिस्तान की जनता तक मदद पहुंचती रहे और क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे और यही वजह है कि आज अफगानिस्तान अगर सबसे ज्यादा भरोसा किसी देश पर करता है तो वो भारत है। हाल के महीनों में पाकिस्तान और तालिबान के रिश्ते लगातार बिगड़े हैं। सीमा पर कई बार संघर्ष हुआ है।
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