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कैंसर पर WHO की डराने वाली रिपोर्ट सामने आई, दुनिया के लगभग हर परिवार तक पहुंचेगी बीमारी! क्या है कारण?


WHO Report on Cancer: कैंसर एक घातक बीमारी है. यह विश्व स्तीरय फैला हुआ रोग, जो गंभीर और जानलेवा मानी जाती है. ये बीमारी हर साल लाखों लोगों की जान ले रही है. चाहे कितना भी मॉडर्न मेडिकल फैसिलिटीज आ जाएं, कैंसर को हराना अभी भी मुश्किल माना जाता है. लोग आज भी इस बीमारी का नाम सुनकर खौफ और डर में आ जाते हैं. द गार्जियन ने WHO की 2026 ग्लोबल कैंसर रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया है कि कैंसर की रोकथाम, निदान और उपचार में प्रगति हुई है लेकिन उसके बावजूद भी दुनिया भर में लाखों मरीजों को इस बीमारी से ग्रसित होने के बाद गंभीर शारीरिक, मानसिक और वित्तीय परिणामों का सामना करना पड़ता है.

यह रोग सिर्फ एक मरीज को नहीं होता है. यह पूरे परिवार को प्रभावित करने वाला होता है. इसमें कैंसर सिर्फ उन लोगों की बीमारी नहीं मानी जाती है जिसमें इसका निदान हो मगर सच्चाई काफी अलग है. अगर किसी के परिवार में किसी एक सदस्य को कैंसर होता है तो उसकी परेशानी सिर्फ उस तक सीमित नहीं रहती है. लंबा इलाज, लगातार मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानियां एक पूरे घर को संघर्ष करने पर मजबूर कर देती है.

WHO की रिपोर्ट का चौंकाने वाला खुलासा

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी WHO ने अपनी नई रिपोर्ट में चिंता जाहिर करते हुए बताया कि हर पांच में से एक इंसान को अपने जीवन में कभी न कभी कैंसर की बीमारी हो सकती है. अगर किसी एक परिवार और करीबी लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव को शामिल किया जाए तो दुनिया के 92% लोग इस परेशानी का सामना करते हैं. ये आंकड़े सिर्फ बीमारी के नहीं बल्कि उससे सामाजिक और आर्थिक चुनौती का भी संकेत है, जो आने वाले सालों में बड़ी हो सकती है.

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आखिर क्यों कैंसर इतना घातक रूप लेते जा रहा है?

WHO और इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, कैंसर के बढ़ते खतरों को लेकर अलर्ट होने की जरूरत है. नई रिपोर्ट के अनुसार, कैंसर से पीड़ित लोगों का अनुभव एक समान नहीं हो सकता है. गरीब और अमीर देशों में इलाज, दवाएं और जांच की उपलब्धा भी अलग होती है.

  • हर दिन में दुनिया में करीब 26,000 लोगों की कैंसर से मृत्यु हो रही है.
  • हर साल करीब 2.06 करोड़ नए मरीजों की पुष्टि हो रही है, जबकि करीब 1 करोड़ लोग कैंसर से ही मर रहे हैं.
  • हार्ट प्रॉबल्म के बाज कैंसर दूसरी बड़ी वजह है लोगों की मौत का.
  • ज्यादा आय वाले देशों में ब्रेस्ट कैंसर से 87 प्रतिशत महिलाएं सिर्फ 5 वर्ष ही जीवित रह पाती हैं. 
  • दुनिया के हर 3 में से सिर्फ एक देश ने ही कैंसर के इलाज को अपनी यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज का हिस्सा बनाया हुआ है. 

कैंसर के बढ़ते खतरे की कुछ प्रमुख वजहें

इस मेडिकल रिपोर्ट में देखा गया है कि कैंसर से निपटने के लिए सभी देशों ने क्या-क्या किया है. इसमें सरकारों का भी बड़ा रोल है. उनकी कैंसर की नीतियों, कैंसर रोकथाम, तंबाकू नियंत्रण और टीकाकारण कार्य और इलाज जैसे पहलुओं पर कितना ध्यान दिया जा रहा है, जैसी चीजों पर विश्लेषण किया गया है.

दुनिया में तंबाकू का सेवन कम करने में सिर्फ 27% की गिरावट देखी गई है. जबकि 82 प्रतिशत देशों ने कैंसर से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर योजनाएं बनाई है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके बाद भी प्रयासों का असर मरीजों तक सही से नहीं पहुंच पा रहा है.

दवाओं की पहुंच में भी अंतर

रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाएं आज भी गरीब देशों के मरीजों की पहुंच से बहुत दूर हैं. कम आय वाले देशों में कैंसर की कई प्रमखु दवाएं सिर्फ 9 से 54 प्रतिशत तक ही मिलती है. वहीं, ज्यादा आय वाले देशों में उपलब्धता 68-94 प्रतिशत के बीच है.

कैंसर का रिस्क कैसे कम हो पाएगा?

रिपोर्ट तैयार करने वाले एक्सपर्ट्स का मानना है कि कैंसर का असर अब सिर्फ स्वास्थ्य समस्या तक सीमित नहीं रह गया है. इसका बोझ आर्थिक, सामाजिक और मानवीय स्तर पर भी लगातार बढ़ रहा है. इसलिए, दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां से कैंसर की रोकथाम और इलाज को लेकर बड़े और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत अभी भी बाकी है. रिपोर्ट के अनुसार, सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, निजी क्षेत्र और WHO को मिलकर काम करना चाहिए. इससे कैंसर के प्रभाव को लोगों और उनके परिवार बेहतर को सही देखभाल मिल सकेगी.

रिपोर्ट में कुछ सुझावों पर भी गौर करने के लिए कहा गया है-

  • कैंसर के इलाज के लिए सभी जरूरी सेवाएं, सुविधाओं और दवाओं की उपलब्धता सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल करना चाहिए.
  • कैंसर की बीमारी झेल रहे परिवारों पर सरकार द्वारा मुख्य केंद्र रहना चाहिए ताकि उन्हें आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिल सके.
  • कैंसर से जुड़ी नई रिसर्च और तकनीकों के बारे में आम लोगों को अनुरुप तैयार किया जाएं.
  • आधुनिक और प्रभावी इलाज सभी लोगों तक समान रूप से पहुंच सके, सिर्फ अमीर देशों तक सीमित न रहे.

WHO सरकारों से अपील कर रहा है कि वे अपने देश में कैंसर की रोकथाम और नियंत्रण की पूरी प्रणाली में निवेश बढ़ाएं, जिसमें रोकथाम, स्क्रीनिंग और प्रारंभिक निदान से लेकर उपचार और रोगी देखभाल तक शामिल हैं, और रोगी देखभाल को नए उपचारों पर शोध प्रयासों के समान ही महत्वपूर्ण मानें.

कैंसर से मौत के आंकड़े

  • 45% लोग कैंसर से इसलिए जंग नहीं जीत पाते हैं क्योंकि ये लोग पैसों की तंगी का सामना करते हैं.
  • आधे से ज्यादा लोग कैंसर के साथ मेंटल हेल्थ से जुड़ी परेशानी से भी जूझते हैं.
  • एशिया में ज्यादा मौत के मामले दर्ज हुए हैं.
  • यूरोप में कैंसर के 21 प्रतिशत मामले और 20 प्रतिशत कैंसर से मौत होती है.

कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?

  • मोटापा
  • फिजिकली एक्टिव न रहना
  • खराब खान-पान
  • वायु प्रदूषण और तंबाकू व शराब का सेवन

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BCCI ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग, इन अहम मुद्दों पर होगी चर्चा, रोहित-विराट के साथ-साथ गंभीर-अय्यर पर भी होगा बड़ा फैसला

BCCI : भारतीय क्रिकेट में क्या सब कुछ ठीक है? इन दिनों ये एक बड़ा सवाल बना हुआ है. टीम इंडिया आयरलैंड के खिलाफ 2 मैचों की टी20 सीरीज में क्लीन स्वीप हो गई. भारत पहली बार आयरलैंड से मैच हारा था. इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ लगातार तीन मुकाबले टीम इंडिया हार गई. भारतीय क्रिकेट टीम ने रोहित शर्मा और सूर्यकुमार यादव के कार्यकाल में बहुत ही शानदार समय देखा है. अब जब श्रेयस अय्यर को टी20 क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया है तो टीम में सब कुछ ठीक है या नहीं इस पर सवाल उठने लगे हैं. 

बीसीसीआई मुंबई में बुलाएगी इमरजेंसी मीटिंग

भारतीय क्रिकेट टीम में मनमुटाव और अनबन की खबरें लगातार आ रही हैं. इस सबके बीच बीसीसीआई ने मुंबई में एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस मीटिंग में बीसीसीआई भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर और टी20 टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर के भविष्य पर रिव्यू करने के वाली है. 

इस रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि, टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर कभी भी श्रेयस अय्यर को इंडिया का टी20 कप्तान बनाने के पक्ष में नहीं थे. सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में कहा गया है कि, इंडियन क्रिकेट टीम के ड्रेसिंग रूम में तनाव है, जिसमें संजू सैमसन और श्रेयस अय्यर समेत कुछ खिलाड़ी टीम के मौजूदा माहौल से नाखुश बताए जा रहे हैं.

ऐसे में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है. इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य आयरलैंड के खिलाफ पिछली सीरीज हारने के बाद ड्रेसिंग रूम के मुद्दों को सुलझाने और टीम में एकता वापस लाने की कोशिश कर रहना होगा. इसके साथ ही इंग्लैंड का दौरान खत्म होने के बाद फिर से बीसीसीआई की रिव्यू मीटिंग बुलाई जाएगी.

मीटिंग में इन अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

आपको बता दें कि बीसीसीआई के अधिकारी हेड कोच गौतम गंभीर से रोहित शर्मा और विराट कोहली के बारे में विवादित बयान नहीं देने के लिए कहेंगे. इसके साथ ही बीसीसीआई गौतम गंभीर और सिलेक्शन कमिटी के बीच चल रही अनबन को सुलझाने की भी कोशिश करेगी. आयरलैंड और इंग्लैंड सीरीज हारने के बाद श्रेयस अय्यर की कप्तानी सवालों के घेरे में आ गई है, इस पर भी बीसीसीआई के अधिकारी चर्चा करेंगे. 

इसके अलावा भारतीय सिलेक्टर्स हार्दिक पांड्या के एकदिवसीय क्रिकेट के भविष्य पर आखिरी फैसला लेंगे, जो 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप मद्देनजर अहम रहने वाला है. तमाम रिपोर्ट्स के अनुसार मानें तो, अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी की ओपनिंग जोड़ी मीटिंग के खास मुद्दों में से एक होगी. क्योंकि बाएं और दाएं हाथ का बल्लेबाजी क्रम ओपनिंग में भेजना बेहतर विकल्प हो सकता है. वहीं ऐसा होने से संजू सैमसन को फिर से प्लेइंग-11 में खेलने का मौका मिलेगा.

 

 इस मीटिंग में वनडे सेटअप में सीनियर खिलाड़ियों के भविष्य पर भी चर्चा होगी. वनडे वर्ल्ड कप 2027 से पहले रोहित शर्मा और विराट कोहली समेत रविंद्र जडेजा के भविष्य पर भी चर्चा की जाएगी. क्या टीम 2027 में नए और सीनियर खिलाड़ियों के साथ उतरने वाली है, युवा खिलाड़ियों को वर्ल्ड कप से पहले तैयार किया जाएगा. 

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  Sports

Wimbledon में सितारों का जमावड़ा: Sachin Tendulkar और Roger Federer की दोस्ती ने जीता सबका दिल

भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने टेनिस के महान खिलाड़ी रोजर फेडरर से मुलाकात के बाद उनके लिए एक दिल को छू लेने वाला संदेश साझा किया और अपनी लंबे समय से चली आ रही दोस्ती का जश्न मनाया। X पर तेंदुलकर ने 20 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन के साथ एक तस्वीर पोस्ट की और लिखा कि कुछ रैलियां कभी खत्म नहीं होतीं। हमारी दोस्ती भी उनमें से एक है। रोजर, तुम्हारे साथ समय बिताना हमेशा अच्छा लगता है। फिर मिलने तक।
 

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शुक्रवार को विंबलडन में भारत के महान पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर एक बार फिर आकर्षण का केंद्र बने। वे 'रॉयल ​​बॉक्स' में मौजूद खेल जगत की मशहूर हस्तियों में शामिल थे और उन्होंने अलेक्जेंडर ज़्वेरेव को ब्रिटेन के आर्थर फेरी को हराकर ऑल इंग्लैंड क्लब में अपने पहले पुरुष एकल फ़ाइनल में जगह बनाते हुए देखा। भारत के पूर्व कप्तान का सेंटर कोर्ट पर स्वागत करते हुए, विंबलडन ने X पर तेंदुलकर की एक तस्वीर शेयर की और लिखा कि क्रिकेट के दिग्गज 'रॉयल ​​बॉक्स' में लौटे हैं। विंबलडन में आपका फिर से स्वागत है, सचिन तेंदुलकर।

स्टार स्पोर्ट्स ने X पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें एक लाइव टेलीविज़न ब्रॉडकास्ट की झलक दिखाई गई। इसमें कमेंटेटर ने उन्हें अब तक के सबसे महान बल्लेबाज़ के तौर पर संबोधित किया, जबकि कैमरे उन पर केंद्रित थे और वे खेल का आनंद ले रहे थे। तेंदुलकर रॉयल बॉक्स में मौजूद खास खेल हस्तियों में शामिल थे। उनके साथ वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान ब्रायन लारा भी थे। सालों तक कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वी और बाद में कई चैरिटी मैचों में टीम-मेट रहने के बाद, ये दोनों महान बल्लेबाज़ एक साथ सुर्खियों में रहे। 

भारत के मौजूदा टेस्ट कप्तान शुभमन गिल भी सेमीफाइनल में शामिल हुए, जिससे सेंटर कोर्ट पर क्रिकेट की दुनिया की एक और बड़ी हस्ती की मौजूदगी दर्ज हुई। रॉयल बॉक्स में फुटबॉल के सितारे भी मौजूद थे, जिनमें लिवरपूल और नीदरलैंड के कप्तान वर्जिल वैन डाइक शामिल थे, जबकि लीड्स यूनाइटेड के चेयरमैन पराग मराठे भी सेंटर कोर्ट पर मौजूद खास मेहमानों में से एक थे। कोर्ट पर, ज़्वेरेव ने फेरी के शानदार विंबलडन सफर का अंत किया। उन्होंने दो घंटे और 14 मिनट में 7-6(0), 6-2, 6-4 से शानदार जीत हासिल की। ​​एक कड़े शुरुआती सेट को शानदार टाई-ब्रेक के ज़रिए जीतने के बाद, फ्रेंच ओपन चैंपियन ने अपनी दमदार सर्विस और आक्रामक बेसलाइन गेम के दम पर मैच पर पूरी तरह से पकड़ बना ली।
 

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इस जीत के साथ ज़्वेरेव अपने पहले विंबलडन फाइनल और कुल मिलाकर पांचवें ग्रैंड स्लैम खिताबी मुकाबले में पहुंच गए हैं। वह बोरिस बेकर और माइकल स्टिच के बाद ओपन एरा में विंबलडन फाइनल में पहुंचने वाले केवल तीसरे जर्मन पुरुष खिलाड़ी भी बन गए हैं।
 
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Sat, 11 Jul 2026 12:47:20 +0530

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