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MMRDA ने Thane में Metro निर्माणस्थल से मलबा गिरने के बाद ठेकेदार पर 12.5 करोड़ का जुर्माना लगाया

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में सोमवार को एक स्कूल वैन में सवार लोग उस वक्त बाल-बाल बच गए, जब उपरिगामी मेट्रो निर्माणस्थल से मलबा गिरने के कारण उसका टायर पंक्चर हो गया। हालांकि, एमएमआरडीए ने कहा कि निर्माण स्थल पर बैरिकेड के बाहर कुछ सामग्री बिखर गई थी और कोई पत्थर सीधे किसी वाहन से नहीं टकराया। मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने दहिसर-मीरा भयंदर लाइन के निर्माण कार्य में शामिल ठेकेदारों और सलाहकारों पर 12.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।

दहिसर-मीरा भयंदर मेट्रो लाइन (फेज 2) के नानासाहेब धर्माधिकारी मेट्रो स्टेशन स्थल के पास पूर्वाह्न करीब 11:30 बजे हुई इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उपरिगामी ढांचे से पत्थर और कंक्रीट के स्लैब का एक हिस्सा मुख्य सड़क पर गिरा। इसके टुकड़े स्कूल वैन के पिछले हिस्से पर गिरे, जिससे टायर पंचर हो गया और ड्राइवर का कुछ देर के लिए नियंत्रण बिगड़ गया, हालांकि उसने बाद में गाड़ी रोक दी।

उन्होंने दावा किया कि गाड़ी में कई बच्चे सवार थे, लेकिन गनीमत रही कि किसी को चोट नहीं आई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आया है। स्थानीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और उस जगह की घेराबंदी कर दी, जहां मलबा गिरा था।

एमएमआरडीए ने एक बयान में कहा कि यह घटना तब हुई जब ‘ओवरहेड क्रेन’ से ले जाया जा रहा सामान गलती से पास के पैदल पार पथ (एफओबी) क्षेत्र में रखे ग्रेनाइट पत्थरों से टकरा गया। इस टक्कर से ग्रेनाइट के कई स्लैब अपनी जगह से हट गए और नीचे गिर गये। इससे यह स्पष्ट हो गया कि ग्रेनाइट का कोई भी पत्थर किसी वाहन पर नहीं गिरा और न ही सीधे किसी वाहन से टकराया।

हालांकि, इसमें बताया गया है कि घेरे के बाहर बिखरे मलबे के कारण वहां से गुजर रही एक गाड़ी के टायर पंचर हो गए; साथ ही यह भी कहा गया है कि उस समय गाड़ी खाली थी और किसी को चोट नहीं आई।

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Lucknow में शिक्षकों की कमी पर छात्राओं का प्रदर्शन, High Court के फैसले की प्रतीक्षा

राजधानी लखनऊ के एक सरकारी आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने सोमवार को भारी बारिश के बीच प्रदर्शन किया। चार दिनों में यह संस्थान के छात्रों का दूसरा प्रदर्शन है। छात्राओं ने मुख्य रूप से शिक्षकों की कमी और कक्षाओं के बाधित होने को लेकर विरोध जताया।

प्रदर्शन को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और सवाल किया कि बच्चों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश के मंत्री असीम अरुण ने कहा कि अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा मामला उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है और अदालत के मंगलवार को फैसला सुनाने की उम्मीद है। सामाजिक कल्याण विभाग के प्रभारी मंत्री ने कहा कि छात्रों द्वारा उठाई गई चिंताएं जायज हैं और सरकार भी उनके भविष्य को लेकर चिंतित है।

उन्होंने अदालत के आदेश से ‘‘सकारात्मक परिणाम’’ की उम्मीद जताई। जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय की छात्राओं का यह विरोध प्रदर्शन दोबारा हुआ है। तीन दिन पहले शुक्रवार को इसी स्कूल की छात्राओं ने अपनी शिकायतों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था।

सोमवार सुबह करीब नौ बजे कई छात्राएं स्कूल से बाहर निकलीं और डुबग्गा-कानपुर बाईपास तथा बालागंज चौराहों पर प्रदर्शन किया। अपने स्कूल में शिक्षण कार्यों से जुड़े मुद्दों से संबंधित पोस्टर और बैनर लिए छात्र—छात्राओं ने नारे लगाए। बारिश के बावजूद कुछ छात्राएं सिर पर तौलिया लपेटकर प्रदर्शन स्थल पर बैठी रहीं, जबकि कई अन्य ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर मानव श्रृंखला बनाई और एक व्यस्त चौराहे पर रास्ता जाम कर दिया।

अधिकारियों ने बताया कि लोगों के दफ्तर जाने के व्यस्त समय में इस विरोध प्रदर्शन के कारण यातायात बाधित हुआ, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस तैनात की गयी। जेन अल्फा कहलाने वाली इन छात्राओं ने मुख्य रूप से शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि कक्षाएं ठीक से संचालित नहीं की जा रही हैं। सूचना मिलने पर वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और उनसे विरोध—प्रदर्शन खत्म करने के लिए मनाया।

इसके बाद उनको वापस स्कूल परिसर ले जाया गया, जहां वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे बातचीत की। अनामिका नाम की एक छात्रा ने बताया कि स्कूल में सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक कक्षाएं संचालित की जाती हैं और असेंबली सत्र में ही लगभग दो घंटे लग जाते हैं, इसलिए छात्रों के पास पढ़ाई के अलावा अन्य गतिविधियों के लिए बहुत कम समय बचता है। उसने आरोप लगाया कि स्कूल में विज्ञान के छात्रों की खासी संख्या होने के बावजूद केवल रसायन विज्ञान विषय के शिक्षक ही उपलब्ध हैं, जबकि जीव विज्ञान और भौतिक विज्ञान विषय पढ़ाने के लिए कोई भी शिक्षक नहीं है।

अनामिका ने कहा, बोर्ड परीक्षाएं नजदीक आ रही हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छात्रों को ऑनलाइन कक्षा में शामिल होने में भी दिक्कतें आ रही हैं। प्रदर्शनकारी छात्राओं ने वार्डन के खिलाफ कार्रवाई और अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति की भी मांग की।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वे फिर से विरोध प्रदर्शन करेंगी। समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने कहा कि अधिकारियों ने छात्राओं से बात की है और बातचीत से उनकी शिकायतों को सुलझाने की कोशिश की जा रही है। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सुबह हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद छात्रों को वापस स्कूल ले जाया गया और उनकी समस्याओं एवं मांगों पर चर्चा करने के लिए वरिष्ठ अधिकारी वहां मौजूद थे।

विरोध पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘2014 में आई भाजपा सरकार की सबसे बड़ी असफलता-विफलता ये है कि 14 साल तक के बच्चों को अब उनसे कोई उम्मीद नहीं बची है। जिन छात्राओं को स्कूलों में होना चाहिए, वो शिक्षक की कमी के साथ-साथ स्कूल में बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़क पर आने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा, ‘‘उप्र में कोई शिक्षा मंत्री है क्या?’’ उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री यादव ने शहर की सड़कों पर छात्राओं के विरोध प्रदर्शन की एक वीडियो क्लिप भी साझा की।

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