Maharashtra में Manoj Jarange का आरोप, सरकार कुनबी प्रमाणपत्र संख्या घटा रही
आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने सोमवार को आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार पात्र मराठा समुदाय के सदस्यों को जारी किए जाने वाले कुनबी जाति प्रमाणपत्रों की संख्या कम करना चाहती है। उन्होंने मांग की कि 58 लाख रिकॉर्ड के आंकड़ों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किए जाएं। जरांगे ने मराठा समुदाय से अपनी मांगों को लेकर आक्रामक रुख अपनाने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।
उन्होंने कहा, ‘‘समुदाय को किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति के दबाव में नहीं आना चाहिए।’’ विरोध प्रदर्शन के अपने आह्वान को दोहराते हुए जरांगे ने कहा कि वह 20 से 25 अगस्त तक मराठवाड़ा और विदर्भ के कुछ हिस्सों का दौरा करेंगे। उन्होंने पात्र मराठा समुदाय के सदस्यों के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटा की मांग को लेकर 29 अगस्त से अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करने की घोषणा की थी। जरांगे ने छत्रपति संभाजीनगर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह आंदोलन मराठा समुदाय की लंबित मांगों को लेकर होगा।
सरकार को 58 लाख रिकॉर्ड के आधार पर सभी प्रमाणपत्र जारी करने चाहिए। सरकार 58 लाख के इस आंकड़े को कम करना चाहती है, लेकिन मैं ऐसा नहीं होने दूंगा।’’ उन्होंने मांग की कि अब तक जारी किए गए कुनबी जाति प्रमाण-पत्रों को मान्य किया जाए। जरांगे की अन्य मांगों में सातारा, कोल्हापुर, औंध और बॉम्बे गजट के संबंध में आदेश जारी करना, मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना और 29 अगस्त से पहले एसईबीसी (सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग) तथा ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग) कोटे के तहत चयनित उम्मीदवारों को सरकारी नियुक्तियां देने की प्रक्रिया पूरी करना शामिल है।
जरांगे ने कहा, ‘‘सरकार को लंबित बकाया राशि जारी करनी चाहिए और मराठा आरक्षण के लिए अपनी जान गंवाने वालों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। अन्नासाहेब पाटील महामंडल के जरिए मिलने वाली प्रतिपूर्ति और छात्रों की छात्रवृत्ति का भुगतान 29 अगस्त तक कर दिया जाना चाहिए।’’ जरांगे ने मांग की कि ‘सारथी’ के जरिए बंद की गई योजनाओं को फिर से शुरू किया जाए और उनके लिए पर्याप्त धनराशि जारी की जाए। छत्रपति शाहू महाराज अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं मानव विकास संस्थान(सारथी) राज्य सरकार का एक स्वायत्त संस्थान है।
Himanta Biswa Sarma ने Assam में कानून-व्यवस्था की समीक्षा कर पुलिस को दिए निर्देश
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार को राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की और पुलिस को अपराध रोकने एवं जांच में सुधार के लिए ज़्यादा मज़बूत, आधुनिक तथा जन-केंद्रित तरीका अपनाने का निर्देश दिया। एक सरकारी परिपत्र से यह जानकारी सामने आयी है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि शर्मा ने कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन के अहम पहलुओं की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की।
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हरमीत सिंह तथा पुलिस एवं गृह विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल हुए। मुख्यमंत्री कार्यालय ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘ बातचीत बाल विवाह, बहुविवाह, अपराध नियंत्रण, होम गार्ड और ग्राम रक्षा दल में सुधार, डायल 112, बटालियन परियोजना, पुलिस आवास और पुलिस थाने के अधिकार-क्षेत्र को तर्कसंगत बनाने जैसे मुद्दों पर केंद्रित रही।’’ इसमें कहा गया है कि शर्मा ने अपराध रोकने, जांच को मज़बूत करने और दोषियों को समय पर सज़ा दिलाने के लिए एक मज़बूत, आधुनिक और जनोन्मुखी पुलिस प्रणाली की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। असम सरकार ने छह जुलाई को विधानसभा को बताया था कि 2016 में राज्य में पहली बार भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से, राज्य भर में दर्ज लगभग 10 लाख मामलों में से पुलिस ने सिर्फ 54 प्रतिशत मामलों में ही आरोपपत्र दाखिल किये।
इस बीच, मुख्य सचिव रवि कोटा ने बताया कि उन्होंने दिन में असम राइफल्स (पूर्व) के महानिरीक्षक मेजर जनरल इंदरजीत सिंह भिंडर के साथ बातचीत की। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘हमने आपसी हित के मामलों पर विचार-विमर्श किया, जिसमें सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और विकास के क्षेत्रों में नागरिक-सुरक्षा समन्वय और संस्थागत तालमेल को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
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