Supreme Court ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला पलटा, कहा- पीड़ित को भी है त्वरित सुनवाई का अधिकार
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को शीघ्र सुनवाई के अधिकार को पीड़ित का एक ‘‘अहम अधिकार’’ बताते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें हत्या के एक मामले में सुनवाई को रोक दिया गया था। उच्च न्यायालय ने पिछले साल अगस्त में दिए गए अपने आदेश में विशेष न्यायाधीश को यह निर्देश भी दिया था कि वह ‘उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986’ के तहत दर्ज मामले की कार्यवाही में तेज़ी लाएं, ताकि धारा 12 में शामिल अनिवार्य प्रावधानों के मकसद को पूरा किया जा सके। गैंगस्टर अधिनियम की धारा 12 विशेष अदालतों द्वारा सुनवाई को प्राथमिकता देने से संबंधित है।
उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करते हुए, शीर्ष अदालत ने कहा कि कानून की धारा 12 का मकसद यह नहीं है कि गैंगस्टर अधिनियम के तहत कार्यवाही पूरी होने तक आरोपी के खिलाफ जारी दूसरी कार्यवाहियों को रोक दिया जाए। न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली की पीठ ने कहा, ‘‘इसका मकसद सिर्फ़ यह बताना है कि अगर तारीखें टकराती हैं, तो गैंगस्टर अधिनियम के तहत कार्यवाही को प्राथमिकता दी जाएगी।’’ इसने कहा कि इस मामले का एक और अहम पहलू है तथा संविधान का अनुच्छेद 21 त्वरित मुकदमे के अधिकार की गारंटी देता है। पीठ ने कहा, ‘‘इस अदालत ने माना है कि त्वरित मुकदमे का अधिकार न सिर्फ़ आरोपी का विशेषाधिकार है, बल्कि यह पीड़ित का भी एक अहम अधिकार है और मुक़दमे के पूरा होने में बहुत ज़्यादा देरी का समाज पर बुरा असर पड़ सकता है।’’ यह प्रकरण हत्या के एक मामले से संबंधित था।
पीठ ने कहा कि अपील करने वाले व्यक्ति ने अपने भाई की हत्या के मामले में सितंबर 2023 में नौ लोगों के खिलाफ़ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ आरोपत्र दायर किया। नवंबर 2023 में, थाना प्रभारी ने एक रिपोर्ट तैयार की, जिसमें कहा गया कि आरोपी ने एक संगठित गिरोह के सदस्य के तौर पर अपराध किया था।
इसके आधार पर एक ‘गैंग चार्ट’ तैयार किया गया और यह उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया। जनवरी 2024 में, गैंग चार्ट के आधार पर आरोपी के खिलाफ उप्र गैंगस्टर अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। शीर्ष अदालत ने उल्लेख किया कि पिछले साल जनवरी में, सात आरोपियों ने निचली में एक अर्ज़ी दायर की थी, जिसमें उन्होंने हत्या के मामले की कार्यवाही को कुछ समय के लिए रोकने का आग्रह किया, क्योंकि वे गैंगस्टर अधिनियम के तहत जारी कार्यवाही में भी आरोपी थे।
आरोपियों ने कहा था कि उनके खिलाफ किसी भी दूसरे मामले की सुनवाई के मुकाबले गैंगस्टर अधिनियम के तहत सुनवाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। निचली अदालत ने अर्ज़ी खारिज कर दी थी। इस आदेश से असंतुष्ट एक आरोपी ने उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसने निर्देश दिया कि हत्या के मामले में सुनवाई को फिलहाल रोक दिया जाए और गैंगस्टर अधिनियम के तहत जारी कार्यवाही में तेज़ी लाई जाए।
शीर्ष अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 346 का ज़िक्र किया, जो कार्यवाही को टालने या स्थगित करने की शक्ति से संबंधित है। इसने उच्च न्यायालय के आदेश को ‘‘पूरी तरह बेबुनियाद’’ बताते हुए रद्द कर दिया।
Hemant Soren कैबिनेट की बैठक, Jharkhand में JPSC और JSSC छात्रों से होगी वार्ता
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवारों और सरकार के बीच वार्ता के नए दौर से पहले सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक हुई। छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को पहले सूचित किया गया था कि उसकी सरकार की समिति से मुलाकात अपराह्न दो बजे होगी। प्रदर्शन का सोमवार को 24वां दिन है और छह आंदोलनकारी छात्र अब भी भूख हड़ताल पर हैं।
एक अधिकारी ने बताया, ‘‘झारखंड के मुख्यमंत्री सोरेन की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक जारी है। इसके बाद छात्रों से मुलाकात होगी। छात्रों के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच’ के नेता रवींद्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह और रवींद्र कुमार रवि शामिल हैं।
प्रदर्शनकारियों ने एक दिन पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव के पुतले जलाए थे और झामुमो-कांग्रेस गठबंधन पर उनकी मांगों के संबंध में ‘‘ठोस कार्रवाई नहीं करने’’ का आरोप लगाया। बाद में शाम को हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदर्शनकारियों को सोमवार अपराह्न दो बजे फिर से बातचीत के लिए बुलाया। भूख हड़ताल पर बैठे प्रदर्शनकारियों में से एक सविता कुमारी ने कहा था, ‘‘हमारे प्रतिनिधिमंडल की सरकार के साथ अपराह्न दो बजे बैठक होनी है।
हम झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में पूरी तरह से सुधार चाहते हैं, साथ ही कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने की मांग भी करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कई भर्ती परीक्षाओं में हिस्सा लिया है। मैं 19 अप्रैल को हुई 14वीं जेपीएससी परीक्षा में भी शामिल हुई थी। लेकिन यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि भ्रष्टाचार के कारण योग्य उम्मीदवारों की नौकरियां बेच दी गईं।’’ झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने संकेत दिया कि बातचीत से कोई समाधान निकल सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द कर दी जाएगी।’’ सिंह ने कहा, ‘‘हम कथित वित्तीय गड़बड़ी की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पत्र लिखेंगे। अपराध जांच विभाग (सीआईडी) जांच की निगरानी अदालत करेगी। सरकार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के वास्ते सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है।’’ भूख हड़ताल पर बैठे और सदर अस्पताल में इलाज करा रहे एक अन्य प्रदर्शनकारी राहुल क्रांति ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सोमवार की बातचीत से गतिरोध खत्म हो जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अगर सरकार सीबीआई जांच और 2019 के बाद से आयोजित विभिन्न राज्य-स्तरीय भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की हमारी मांगों को नहीं मानती है, तो आंदोलन खत्म नहीं होगा।’’ भूख हड़ताल पर बैठी एक अन्य प्रदर्शनकारी उम्मे हबीबा ने भी यही बात दोहराई और कहा कि नए सिरे से बातचीत का प्रस्ताव ‘‘हमारी चिंताओं के प्रति उनकी (सरकार की) संवेदनशीलता को दिखाता है’’। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच’ के एक मुख्य सदस्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि बैठक में 11 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा, जिसमें एक कानूनी सलाहकार भी होगा। यह प्रस्तावित बैठक सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच सातवें दौर की बातचीत होगी।
पिछले दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी। यह फैसला जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शनकारियों और अनुमंडल अधिकारी तथा अतिरिक्त जिलाधिकारी (कानून-व्यवस्था) के बीच हुई बैठक के बाद लिया गया। ‘जेपीएससी-जेएसएसी रिफॉर्म मंच’ के नेता रवींद्र पासवान ने पत्रकारों से कहा, ‘‘हम बातचीत के लिए जरूर जाएंगे, क्योंकि हम बातचीत के जरिए इस मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं।
हम अपनी दो मांगों पर अडिग हैं - भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों की सीबीआई जांच और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षाओं को रद्द किया जाए।’’ ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच’ के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (जेएसएससी-सीजीएल) को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने रविवार को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन स्थल से अल्बर्ट एक्का चौक तक मशाल जुलूस निकाला, जहां उन्होंने पुतले जलाए। कई जिलों में भी ऐसे ही प्रदर्शन हुए।
छात्रों ने सत्तारूढ़ झामुमो-कांग्रेस के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार द्वारा उनकी मांगों पर ‘‘कोई ठोस कार्रवाई नहीं करने’’ पर निराशा जताई और आरोप लगाया कि सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवारों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर राजनीति कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने शनिवार को घोषणा की थी कि वे 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे और उन्होंने पूरे झारखंड के छात्रों से इस प्रदर्शन के लिए रांची में इकट्ठा होने की अपील की। पासवान ने आरोप लगाया, ‘‘हम मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हैं, क्योंकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस दोनों ही हमारे साथ राजनीति कर रहे हैं।’’ प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि अगर मुख्यमंत्री उनकी चिंताओं पर कार्रवाई नहीं करते हैं, तो कांग्रेस को झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए।
झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने रविवार को सोरेन से छात्रों की मांगें मानने और सीबीआई जांच की उनकी मांग का समर्थन करने का आग्रह किया। मरांडी ने कहा, ‘‘छात्र परीक्षा में अनियमितता के मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं और मुझे लगता है कि सरकार को इसका आदेश देना चाहिए। सरकार इससे क्यों डरती है?’’ उन्होंने कहा कि सरकार की लगातार ‘‘निष्क्रियता’’ के कारण अधिक से अधिक युवा और छात्र सड़कों पर उतर सकते हैं।
मुख्यमंत्री आवास के प्रस्तावित घेराव पर मरांडी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उन छात्रों को नैतिक समर्थन देगी, जो तीन सप्ताह से अधिक समय से ‘‘शांतिपूर्ण’’ तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस ने कहा कि उसकी राज्य इकाई 18 अगस्त को होने वाली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा करेगी। कांग्रेस की झारखंड इकाई के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा, ‘‘झारखंड के युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’’ उन्होंने कहा कि पार्टी छात्रों की चिंताओं को उठाएगी और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समय-सीमा तय करने की मांग करेगी।
प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने छात्रों का समर्थन तो किया, लेकिन इसके बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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