जरा सोचिए कि जब किसी देश का सबसे बड़ा नेता और राष्ट्रपति अदालत के कटघरे में खड़ा हो और उस पर यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप साबित हो जाए तो उस देश की राजनीति में कैसा भूचाल आएगा। अमेरिका से इस वक्त की ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई जिसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिकी राष्ट्रपति की मुश्किलें सातवें आसमान पर पहुंचा दी है। अमेरिकी अदालत से ट्रंप को एक बहुत बड़ा और करारा झटका लगा है। कोर्ट ने साफ किया है कि ट्रंप को अब एक महिला लेखिका को भारी-भरकम रकम चुकानी होगी। पूरा मामला वाशिंगटन और न्यूयॉर्क की अदालतों से जुड़ा है। अमेरिकी कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यौन शोषण और मानहानि के एक मामले में बड़ा झटका देते हुए मशहूर लेखिका ई जिन कैरोल को $50 लाख डॉलर का भुगतान करने का सख्त आदेश दिया है।
कोर्ट ने साफ तौर पर माना है कि डोनाल्ड ट्रंप ने ना सिर्फ लेखिका के साथ यौन उत्पीड़न किया बल्कि बाद में उनके खिलाफ झूठे और अपमानजनक बयान देकर उनकी छवि को भी बुरी तरह बदनाम किया है। अब आपको बताते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद शुरू कहां से होता है। यह मामला आज का नहीं बल्कि साल 1996 का है। 82 साल की एज इन कैरोल जो अमेरिका की एक जानीमानी पूर्व पत्रकार और कॉलम्युनिस्ट है। जिन्होंने आरोप लगाया था कि 1996 में न्यूयॉर्क के एक आलीशान डिपार्टमेंट स्टोर के ड्रेसिंग रूम में डोनाल्ड ट्रंप ने उनके साथ बदसलूकी और यौन उत्पीड़न किया था। लंबे समय तक यह बात दबी रही। लेकिन साल 2019 में जब ई जेन कैरोल की एक किताब आई तो उसमें इस घटना का जिक्र होने के बाद पूरे अमेरिका में सनसनी मच गई। जैसे ही आरोप सामने आए डोनाल्ड ट्रंप अपने पुराने आक्रामक अंदाज में नजर आ गए। उन्होंने लेखिका को पागल, सनकी और पब्लिसिटी की भोकी तक कह डाला और दावा किया कि यह पूरी कहानी मनगढ़ंत है। लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट साल 2023 में आया। जब न्यूयॉर्क की एक फेडरल जूरी ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद ट्रंप को दोषी करार दे दिया।
ज्यूरी ने तय किया कि ट्रंप को यौन उत्पीड़न के लिएऔर मानहानि के लिए हर्जाना देना होगा। कुल रकम $50 लाख बनती है। ट्रंप इस फैसले के खिलाफ देश की सबसे बड़ी अदालत यानी कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। लेकिन पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप की इस अपील पर सुनवाई करने से ही साफ इंकार कर दिया है। जिससे निचली अदालत का फैसला पूरी तरह अंतिम और कानूनी रूप से पक्का हो गया है। फिर इसके तुरंत बाद बुधवार को फेडरल जज लुईस कपलान ने अंतिम आदेश जारी करते हुए ट्रंप को तुरंत यह रकम अदालत में जमा करने को कह दिया है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की। वे अपनी तीन देशों की यात्रा के आखिरी चरण की शुरुआत कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय समुदाय का दिल से आभार जताया और कहा कि उनके आने पर लोगों का जोश और उत्साह साफ दिख रहा था। पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि न्यूज़ीलैंड में भारतीय समुदाय के प्यार और स्नेह ने मेरा दिल छू लिया। उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री के दौरे का चार दशकों से इंतज़ार किया था और आज उनका ज़बरदस्त उत्साह और अपनापन साफ़ दिख रहा था। भारत के साथ उनका जुड़ाव अटूट है। इससे पहले, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज़ीलैंड की अपनी ऐतिहासिक यात्रा शुरू की जो पिछले चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी—तो वहाँ के मशहूर स्काई टावर को भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से रोशन किया गया। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में स्काई टावर की तस्वीरें साझा कीं और इस बात पर ज़ोर दिया कि यह कदम दोनों साझेदारों के बीच आपसी सद्भाव का प्रतीक है।
ऑकलैंड पहुँचने के कुछ ही देर बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी न्यूज़ीलैंड यात्रा को ऐतिहासिक बताया है। एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने एयरपोर्ट पर स्वागत करने के लिए न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन का धन्यवाद किया। अपने स्वागत की तस्वीरें शेयर करते हुए, पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय साझेदारी और ऑकलैंड में समुदाय को संबोधित करने के कार्यक्रम को लेकर पीएम लक्सन के साथ होने वाली बातचीत के बारे में उम्मीद जताई। पीएम मोदी ने लिखा कि मैं प्रधानमंत्री लक्सन के साथ बातचीत करने और भारत-न्यूज़ीलैंड दोस्ती के सभी पहलुओं पर चर्चा करने के लिए उत्सुक हूँ। मैं कल ऑकलैंड में एक सामुदायिक कार्यक्रम को भी संबोधित करूँगा।
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, ऑकलैंड में प्रधानमंत्री मोदी अपने समकक्ष नेता के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे और द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे। इन संबंधों में पिछले दो वर्षों में, खासकर व्यापार, वाणिज्य और रक्षा के क्षेत्रों में काफी प्रगति हुई है। ऑकलैंड में रहने के दौरान, प्रधानमंत्री प्रमुख कारोबारी और खेल हस्तियों से भी बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच लोगों के आपसी मज़बूत संबंधों को देखते हुए, प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय के लोगों की एक बड़ी सभा को संबोधित करेंगे।
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