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Piyush Goyal को BJP में बड़ी जिम्मेदारी, क्या Modi Cabinet में अब होगा फेरबदल?

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई राष्ट्रीय संगठनात्मक टीम की घोषणा सोमवार को की गई। यह घोषणा नितिन नवीन के पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभालने के कई महीनों बाद की गई। बीजेपी की नई संगठनात्मक लिस्ट में एक नाम ने खास दिलचस्पी पैदा की है: पीयूष गोयल, जो पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष के तौर पर वापस आए हैं। गोयल ने वह पद संभाला है जिस पर 26 सितंबर, 2020 से राजेश अग्रवाल थे। दिलचस्प बात यह है कि मोदी के पहले कार्यकाल में केंद्रीय कैबिनेट में शामिल होने से पहले गोयल खुद बीजेपी के कोषाध्यक्ष थे।
 

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इसलिए, इस पद पर उनकी वापसी बीजेपी संगठन में एक तरह की घर वापसी है। इस बीच उन्होंने कई अहम केंद्रीय मंत्रालय संभाले हैं और अभी वे वाणिज्य और उद्योग मंत्री हैं। लेकिन गोयल की नियुक्ति के अहम होने की एक और वजह है: बीजेपी का लंबे समय से चला आ रहा "एक व्यक्ति, एक पद" का सिद्धांत। जब अमित शाह बीजेपी अध्यक्ष होने के साथ-साथ केंद्रीय गृह मंत्री भी थे, तो उन्होंने संकेत दिया था कि वे नए पार्टी अध्यक्ष के लिए रास्ता बनाएंगे। बीजेपी ने कई अन्य मामलों में भी इसी सिद्धांत का पालन किया है।

गोयल अभी PM नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्रालय संभाल रहे हैं। पीयूष गोयल को संगठन में एक अहम पद मिलने से ऐसी अटकलें तेज़ हो गई हैं कि आने वाले दिनों में मोदी कैबिनेट में होने वाले संभावित फेरबदल में उन्हें हटाया जा सकता है। इसकी वजह BJP का "एक व्यक्ति, एक पद" वाला अनकहा नियम है, जिसे PM मोदी और मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह ने बनाया था। यह नियम आम तौर पर संगठन और सरकार की बड़ी ज़िम्मेदारियों को अलग-अलग रखने का समर्थन करता है; इसमें नेताओं से उम्मीद की जाती है कि वे या तो पार्टी चलाने पर ध्यान दें या फिर सरकार में कोई अहम पद संभालें, खासकर राष्ट्रीय राजनीति में।

2014 में, जब सर्बानंद सोनोवाल केंद्रीय मंत्री बने, तो उन्होंने असम बीजेपी अध्यक्ष का पद छोड़ दिया। हाल ही में, 2023 में, कैलाश विजयवर्गीय ने भी इसी सिद्धांत का हवाला देते हुए मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री बनने के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफ़ा दे दिया। इससे एक ज़ाहिर सवाल उठता है: क्या बीजेपी कोषाध्यक्ष के तौर पर गोयल की नियुक्ति से यह संकेत मिलता है कि वे आगे चलकर अपना मंत्री पद छोड़ सकते हैं?
 

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संगठनात्मक फेरबदल के बाद अब सबका ध्यान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद और इस बात पर है कि क्या इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है। मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के दो साल से ज़्यादा का समय पूरा कर चुकी है। पिछले महीने, धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया, जिसके बाद प्रह्लाद जोशी को मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद, रवनीत सिंह बिट्टू ने भी 24 जुलाई को रेल और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया। वहीं, अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने जून 2026 में अपना राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने के बाद इस्तीफ़ा दे दिया।
 
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Meta पर California में मुकदमा शुरू, अमेरिकी राज्यों ने 1.4 लाख करोड़ डॉलर का हर्जाना मांगा

मेटा के खिलाफ बच्चों की सुरक्षा से जुड़े हजारों मुकदमों में से कैलिफोर्निया में इस सप्ताह शुरू होने वाली सुनवाई को सबसे महत्वपूर्ण मामलों में से एक माना जा रहा है। अमेरिका के कई राज्य मेटा से व्यापक वित्तीय हर्जाने की मांग कर रहे हैं जो सैद्धांतिक रूप से 1.4 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर तक हो सकता है। इसके अलावा राज्यों ने फेसबुक और इंस्टाग्राम के संचालन के तरीके में बदलाव की भी मांग की है।

मुकदमे में सोशल मीडिया कंपनी पर युवा मानसिक स्वास्थ्य संकट को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। राज्यों का कहना है कि मेटा ने जानबूझकर ऐसे फीचर तैयार किए, जिनसे बच्चे उसके प्लेटफॉर्म के आदी हो जाएं। मुकदमे में यह भी आरोप लगाया गया है कि मेटा नियमित रूप से 13 साल से कम उम्र के बच्चों का उनके माता-पिता की सहमति के बिना डेटा एकत्र करती है, जो संघीय कानून का उल्लंघन है।

मुकदमे में कहा गया है, ‘‘मेटा ने युवाओं और किशोरों को आकर्षित करने, जोड़े रखने और अंततः अपने जाल में फंसाने के लिए शक्तिशाली और अभूतपूर्व तकनीकों का इस्तेमाल किया है। उसका मकसद मुनाफा कमाना है।’’ दर्जनों राज्यों ने तीन साल पहले मुकदमा दायर किया था। मंगलवार से कैलिफोर्निया के ऑकलैंड की संघीय अदालत में शुरू होने वाले मुकदमे में चार राज्य—कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी—वादी हैं।

अन्य 25 राज्यों में बाद में सुनवाई होने की उम्मीद है। मेटा ने आरोपों से इनकार किया है। कंपनी ने कहा कि सुनवाई के दौरान पेश किए जाने वाले साक्ष्य युवाओं की मदद के लिए उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाएंगे।

कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘‘हमने माता-पिता की बात सुनी है, विशेषज्ञों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ काम किया है तथा उन मुद्दों को समझने के लिए गहन शोध किया है, जो सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।’’ मेटा के लिए यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है। कंपनी इस साल बच्चों और किशोरों को होने वाले नुकसान से जुड़े दो अहम मामलों में पहले ही हार चुकी है। कंपनी ने पिछले महीने मुनाफे में असामान्य गिरावट दर्ज की थी, जिसमें 2.4 अरब डॉलर के कानूनी खर्च की भी भूमिका रही।

मेटा ने एक कानूनी दस्तावेज में 1.4 लाख करोड़ डॉलर के संभावित हर्जाने का उल्लेख किया है। यह राशि कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क स्थित कंपनी के कुल बाजार पूंजीकरण के लगभग बराबर है। इतनी बड़ी राशि का भुगतान कंपनी को दिवालिया कर सकता है और संभवतः उसके स्वामित्व को राज्यों के हाथों में पहुंचा सकता है।

मेटा ने हाल के वर्षों में नाबालिगों की सुरक्षा के लिए कई नए फीचर पेश किए हैं। वर्ष 2024 में कंपनी ने इंस्टाग्राम पर ‘टीन अकाउंट’ शुरू किए, जो निजी होते हैं और इनमें संदेश तथा सामग्री पर प्रतिबंध के साथ माता-पिता के लिए नियंत्रण के विकल्प भी हैं। पिछले सप्ताह जूरी चयन के दौरान संभावित जूरी सदस्यों से पूछा गया कि क्या वे मानते हैं कि मेटा ने युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य संकट में योगदान दिया है और यदि हां, तो कितना।

कई लोगों ने माना कि कंपनी की भूमिका है, लेकिन उन्होंने माता-पिता की जिम्मेदारी भी मानी। कुछ ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और दुनिया की मौजूदा स्थिति जैसे कारक भी बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं।

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  Sports

इंग्लैंड में असली इम्तिहान से पहले पाकिस्तान की नींद हराम, उधर काम-तमाम करने बेसब्र मेजबान

babar azam injury: इंग्लैंड दौरे पर मौजूद पाकिस्तान क्रिकेट टीम 19 अगस्त से हेडिंग्ले में पहला टेस्ट मैच खेलने उतरेगी. इससे पहले कप्तान बाबर आजम की चोट ने पाकिस्तान की नींद उड़ा रखी है. बाबर आजम दाहिने हाथ की चोट से जूझ रहे हैं, इसी को लेकर उनके पहले टेस्ट मैच में खेलने पर सस्पेंस बना हुआ है. हालांकि, अब खबर सामने आई है कि उनका पहले मुकाबले में खेलना मुश्किल है. Mon, 17 Aug 2026 23:30:37 +0530

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