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Truecaller CEO का TRAI पर बड़ा हमला, कहा- नए Rules की वजह से देश में बढ़ रहा है Online Fraud।

ट्रूकॉलर और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के बीच एक विवाद खुलकर सामने आया है। ट्रूकॉलर कंपनी का आरोप है कि मौजूदा नियमों के कारण वह उपभोक्ताओं को संभावित स्पैम कॉल की पूरी जानकारी नहीं दे पा रही है, जिससे लोगों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, ट्रूकॉलर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ऋषित झुनझुनवाला ने सामाजिक मंच एक्स पर सार्वजनिक रूप से ट्राई की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ट्राई के नियमों के कारण ट्रूकॉलर उन नंबरों पर समुदाय द्वारा दी गई स्पैम संबंधी जानकारी प्रदर्शित नहीं कर सकता, जो 1400 और 1600 नंबर श्रृंखला से आते हैं। कंपनी का दावा है कि इस वजह से इन नंबरों का गलत इस्तेमाल बढ़ा है और वैध व्यावसायिक कॉल पर भी लोगों का भरोसा कम हुआ है।

बता दें कि वर्ष 2024 में ट्राई ने व्यावसायिक संचार को व्यवस्थित करने के लिए 1400 और 1600 नंबर श्रृंखला तय की थी। इसके तहत 1400 श्रृंखला का उपयोग प्रचार और विपणन से जुड़ी कॉल के लिए तथा 1600 श्रृंखला का उपयोग सेवा और लेनदेन संबंधी कॉल के लिए किया जाना तय किया गया। सरकार का उद्देश्य यह था कि लोग आसानी से पहचान सकें कि कौन-सी कॉल किसी पंजीकृत व्यावसायिक संस्था की है और इससे स्पैम तथा धोखाधड़ी वाली कॉल पर रोक लगाने में मदद मिले।

गौरतलब है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े दूरसंचार बाजारों में शामिल है। पिछले कुछ वर्षों में फर्जी कॉल और साइबर ठगी के मामलों में तेजी आने के बाद सरकार, दूरसंचार कंपनियों और नियामक संस्थाओं ने कई कदम उठाए हैं। पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने बताया था कि एक वर्ष के दौरान 21 लाख से अधिक फर्जी मोबाइल नंबर बंद किए गए और एक लाख से अधिक संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इससे इस समस्या की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

हालांकि ट्रूकॉलर का कहना है कि इस व्यवस्था के कुछ अनपेक्षित परिणाम भी सामने आए हैं। कंपनी के आंतरिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले आठ महीनों में उसके उपयोगकर्ताओं ने 1400 श्रृंखला से आने वाली 81 प्रतिशत कॉल और 1600 श्रृंखला की 79 प्रतिशत कॉल का जवाब नहीं दिया। इसी अवधि में इन दोनों श्रृंखलाओं से आने वाली करीब 7.4 करोड़ कॉल को लोगों ने स्वयं अवरुद्ध कर दिया। कंपनी का यह भी दावा है कि अक्तूबर 2025 के बाद से 1600 श्रृंखला के नंबरों को प्रतिदिन अवरुद्ध करने की घटनाएं तीन गुना से अधिक बढ़ गई हैं।

कंपनी का कहना है कि चूंकि वह इन नंबरों को सीधे स्पैम के रूप में चिह्नित नहीं कर सकती, इसलिए उसने उपयोगकर्ताओं को सतर्क करने के लिए "अक्सर अवरुद्ध किया गया" नाम का एक संकेत देना शुरू किया है। इसका उद्देश्य यह बताना है कि संबंधित नंबर को बड़ी संख्या में लोगों ने पहले ही अवरुद्ध किया है।

इस बीच एक प्रमुख कारोबारी समाचार पत्र की रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्राई ने भारत के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से यह अधिकार मांगा है कि वह ट्रूकॉलर के अलावा हिया और हूसकॉल जैसी कॉल पहचान सेवाओं के खिलाफ कार्रवाई कर सके, यदि वे 1400 और 1600 श्रृंखला के नंबरों को स्पैम के रूप में चिह्नित करती हैं। हालांकि इस मामले पर ट्राई और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

बता दें कि भारत ट्रूकॉलर का सबसे बड़ा बाजार है। कंपनी के लगभग 50 करोड़ मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं में से 35 करोड़ से अधिक भारत में हैं। ऐसे में यह विवाद कंपनी के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऋषित झुनझुनवाला ने कहा है कि ट्रूकॉलर अपने सभी आंकड़े सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ साझा करेगा ताकि नियमों पर फैसला तथ्यों के आधार पर लिया जा सके। उनका कहना है कि कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ होनी चाहिए जो नियमों का दुरुपयोग करते हैं, न कि उन सेवाओं के खिलाफ जो उपभोक्ताओं को फर्जी और अवांछित कॉल से बचाने का काम कर रही हैं।

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Lithium-ion Battery मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी नई रफ्तार, 85 मशीनों पर सरकार ने दी Customs Duty में छूट

देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई रफ्तार देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और अहम कदम उठाया है। सरकार ने कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों और लिथियम-आयन बैटरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनों पर मिलने वाली सीमा शुल्क छूट की अवधि बढ़ा दी है। इस फैसले का उद्देश्य देश में उत्पादन लागत कम करना, नए निवेश को प्रोत्साहित करना और आयातित तैयार उत्पादों पर निर्भरता घटाना है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह सीमा शुल्क छूट अब 31 मार्च 2029 तक लागू रहेगी और इसका लाभ तत्काल प्रभाव से मिलना शुरू हो गया है। उद्योग जगत का मानना है कि इससे इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों को राहत मिलेगी और देश में उन्नत तकनीक वाले उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

बता दें कि सरकार ने विशेष रूप से उन पुर्जों पर सीमा फिस से छूट दी है, जिनका उपयोग विभिन्न प्रकार के प्रदर्शन मॉड्यूल तैयार करने में किया जाता है। इनमें प्रदर्शन कोशिका, प्रकाश व्यवस्था इकाई, लचीला मुद्रित परिपथ संयोजन, ढांचा तथा विशेष प्रकार की चालक परत जैसे महत्वपूर्ण आयातित पुर्जे शामिल हैं। इनका उपयोग मुख्य रूप से वाहन, चिकित्सा उपकरण और औद्योगिक मशीनों में लगाए जाने वाले प्रदर्शन मॉड्यूल के निर्माण में किया जाता है।

हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह छूट मोबाइल फोन, टेलीविजन, स्मार्ट घड़ी, स्मार्ट मीटर और संवादात्मक समतल प्रदर्शन उपकरणों में उपयोग होने वाले प्रदर्शन मॉड्यूल पर लागू नहीं होगी। यानी इन उत्पादों के लिए पहले जैसी व्यवस्था ही जारी रहेगी।

गौरतलब है कि स्मार्टफोन में उपयोग होने वाली बिना तार की चार्जिंग प्रणाली के निर्माण में लगने वाले कई महत्वपूर्ण पुर्जों को भी सीमा शुल्क में राहत दी गई है। इनमें निकट क्षेत्र संचार से जुड़े पुर्जे, प्रेरक कुंडली, नैनो क्रिस्टलीय संयोजन, सुरक्षा परत, विशेष प्लास्टिक परत, कुंडली तथा नियोडिमियम, लोहा और बोरॉन से बने चुंबक जैसे उपकरण शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इससे देश में स्मार्टफोन से जुड़े आधुनिक पुर्जों का निर्माण और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।

इन पुर्जों की पहचान और सीमा शुल्क छूट के समान क्रियान्वयन के लिए केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने इनके तकनीकी मानक और परिभाषाएं भी जारी कर दी हैं। इससे उद्योगों और सीमा शुल्क अधिकारियों के बीच किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति बनने की संभावना कम रहेगी।

सरकार ने एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में लिथियम-आयन बैटरी निर्माण से जुड़ी मशीनों की सूची का भी बड़ा विस्तार किया है। अब कुल 85 श्रेणियों की मशीनों को रियायती सीमा शुल्क का लाभ मिलेगा। इनमें कच्चे पदार्थों को मिलाने, परत चढ़ाने, जोड़ने, जांच करने, गुणवत्ता परीक्षण, निरीक्षण और पैकेजिंग तक की लगभग पूरी निर्माण प्रक्रिया में उपयोग होने वाले उपकरण शामिल किए गए हैं।

इसके अलावा विलायक पुनर्प्राप्ति प्रणाली, ऊष्मा पुनर्प्राप्ति संयंत्र, धूल नियंत्रण प्रणाली और अपशिष्ट जल शोधन उपकरणों को भी इस सूची में शामिल किया गया है। इससे बैटरी निर्माण उद्योग को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

बता दें कि पिछले कुछ वर्षों से केंद्र सरकार देश में इलेक्ट्रॉनिक्स और अर्धचालक विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगातार कई योजनाएं लागू कर रही है। सरकार का लक्ष्य केवल तैयार उत्पादों का आयात कम करना ही नहीं, बल्कि अधिक से अधिक मूल्य संवर्धन भारत में ही सुनिश्चित करना भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा शुल्क में दी गई यह राहत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगी और विशेष रूप से विद्युत वाहन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स तथा उन्नत विनिर्माण से जुड़े क्षेत्रों में नए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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लॉर्ड्स में 142 सालों के इतिहास में पहली बार होगा ऐसा मैच, टीम इंडिया रचेगी इतिहास

भारत और इंग्लैंड की महिला क्रिकेट टीम के बीच 10 जुलाई से लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर टेस्ट मैच खेला जाएगा. पहली बार लॉर्ड्स में महिला क्रिकेट का टेस्ट मैच होने वाला है. Thu, 09 Jul 2026 20:24:21 +0530

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