यूक्रेन को ‘पैट्रियट’ रक्षा प्रणाली बनाने का लाइसेंस देगा अमेरिका : ट्रंप
यूक्रेन को ‘पैट्रियट’ रक्षा प्रणाली बनाने का लाइसेंस देगा अमेरिका : ट्रंपExplainer: E25 लाने से पहले सरकार की क्या है तैयारी? टेस्टिंग के लिए किन पैमानों पर हो रहा काम
E25 Fuel Rollout: देश भर में E20 एथोनॉल को लेकर बहस छिड़ चुकी है. ऑटो इंडस्ट्री में माइलेज को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं. वहीं सरकार अब E25 को भी लाने की तैयारी में जुट चुकी है. इसके बाद E30 और यहां तक कि E85 जैसे अधिक एथेनॉल वाले फ्यूल भी लाने की तैयारी है. E20 को लेकर आ रही शिकायतों को प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गलत ठहराया है. उन्होंने इसे पूरी तरह से भ्रामक करार दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों से बातचीत और टेस्टिंग पूरी करने के बाद ही E25 एथेनॉल ब्लेंड पर जाने पर अब विचार करने वाली है.
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि वाहन निर्माता कंपनियां और वाहनों की सर्विसिंग करने वाले विशेषज्ञ E20 को काफी सुरक्षित मानते हैं. उनके अनुसार E20 को लेकर अचानक शिकायतों का आना कोई ठोस आधार नहीं है. उन्होंने कहा कि देश पहले E15 ईंधन का उपयोग कई वर्षों तक कर चुका है. उसके बाद चरणबद्ध तरह से E20 को लागू किया गया.
E25 लाने से पहले टेस्टिंग के क्या होंगे पैमाने
माइलेज: E20 के आने के बाद सबसे अधिक सवाल माइलेज पर उठता है. ग्राहकों का कहना है कि इससे गाड़ियों की माइलेज पर असर पड़ा है. कई विशेषज्ञों का कहना है कि इससे माइलेज में करीब 30 प्रतिशत की कमी आई है. वहीं सरकार की ओर से गलत करार दिया गया है. पेट्रोल के मुकाबले एथेनॉल की ऊर्जा कम हो सकती है. ऐसे में ब्लेंड बढ़ने पर माइलेज कम हो सकती है. अब इंजन उस हिसाब से ट्यून नहीं है तो ईंधन की खपत ज्यादा बढ़ सकती है. E25 का वाहनों के इंजन, माइलेज, प्रदर्शन और टिकाऊपन पर असर होगा, इसकी जांच की हो रही है. वाहन निर्माताओं के साथ मिलकर यह देखा जा रहा है कि मौजूदा और पुराने वाहन E25 के लिए कितने उपयुक्त हैं.
गाड़ी के पुर्जे: अधिक एथेनॉल पुराने वाहनों में रबर होज, सील,ओ-रिंग, फ्यूल पंप और कुछ प्लास्टिक पार्ट्स पर ज्यादा असर डालता है. ARAI की रिपोर्ट में भी पुराने E10 वाहनों में रबर पार्ट्स के जल्दी खराब होने की बात सामने आई थी. टू-व्हीलर्स में बड़ी समस्या सामने आई है.
जेब पर कितना असर: अधिक एथेनॉल को लेकर तैयार न होने वाली गाड़ियों में फ्यूल सिस्टम की अधिक निगरानी. कुछ पुर्जों को बदलने और ज्यादा सर्विसिंग की आवश्यकता हो सकती है.
फेज वाइज रोलआउट की योजना: E20 के अनुभव और उठी चिंताओं को देखते हुए सरकार E25 को धीरे-धीरे लागू करने पर विचार कर रही है, ताकि उद्योग और उपभोक्ताओं को तैयारी का समय मिल सके.
ईंधन आपूर्ति व्यवस्था: रिफाइनरियों और तेल विपणन कंपनियों की तैयारी तथा उच्च एथेनॉल मिश्रण की उपलब्धता का भी आकलन किया जा रहा है.
मानकों की तैयारी: E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधनों के लिए भारतीय मानक (BIS) अधिसूचित किए जा चुके हैं, ताकि भविष्य में इनका उपयोग नियमानुसार हो सके.
E 85 ईंधन की तैयारी
इस समय E25, E27, E30 और भविष्य में E85 जैसे एथेनॉल वाले फ्यूल पर का जारी है. इनके लिए ट्रायल तकनीकी मानक और इंजन टेस्टिंग पर काम हो रहा है. आने वाले सालों में भारतीय पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ अधिक एथेनॉल वाले फ्यूल भी दिख सकते हैं. उससे पहले यह तय करना जरूरी है कि देश की करोड़ों गाड़ियां इसके लिए तैयार हैं या नहीं.
सरकार का कहना है कि E25 को जल्दबाजी में लागू नहीं किया जाएगा. पहले वैज्ञानिक परीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और उद्योग से परामर्श पूरा किया जाएगा. इसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा.
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