Explainer: E25 लाने से पहले सरकार की क्या है तैयारी? टेस्टिंग के लिए किन पैमानों पर हो रहा काम
E25 Fuel Rollout: देश भर में E20 एथोनॉल को लेकर बहस छिड़ चुकी है. ऑटो इंडस्ट्री में माइलेज को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं. वहीं सरकार अब E25 को भी लाने की तैयारी में जुट चुकी है. इसके बाद E30 और यहां तक कि E85 जैसे अधिक एथेनॉल वाले फ्यूल भी लाने की तैयारी है. E20 को लेकर आ रही शिकायतों को प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गलत ठहराया है. उन्होंने इसे पूरी तरह से भ्रामक करार दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों से बातचीत और टेस्टिंग पूरी करने के बाद ही E25 एथेनॉल ब्लेंड पर जाने पर अब विचार करने वाली है.
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि वाहन निर्माता कंपनियां और वाहनों की सर्विसिंग करने वाले विशेषज्ञ E20 को काफी सुरक्षित मानते हैं. उनके अनुसार E20 को लेकर अचानक शिकायतों का आना कोई ठोस आधार नहीं है. उन्होंने कहा कि देश पहले E15 ईंधन का उपयोग कई वर्षों तक कर चुका है. उसके बाद चरणबद्ध तरह से E20 को लागू किया गया.
E25 लाने से पहले टेस्टिंग के क्या होंगे पैमाने
माइलेज: E20 के आने के बाद सबसे अधिक सवाल माइलेज पर उठता है. ग्राहकों का कहना है कि इससे गाड़ियों की माइलेज पर असर पड़ा है. कई विशेषज्ञों का कहना है कि इससे माइलेज में करीब 30 प्रतिशत की कमी आई है. वहीं सरकार की ओर से गलत करार दिया गया है. पेट्रोल के मुकाबले एथेनॉल की ऊर्जा कम हो सकती है. ऐसे में ब्लेंड बढ़ने पर माइलेज कम हो सकती है. अब इंजन उस हिसाब से ट्यून नहीं है तो ईंधन की खपत ज्यादा बढ़ सकती है. E25 का वाहनों के इंजन, माइलेज, प्रदर्शन और टिकाऊपन पर असर होगा, इसकी जांच की हो रही है. वाहन निर्माताओं के साथ मिलकर यह देखा जा रहा है कि मौजूदा और पुराने वाहन E25 के लिए कितने उपयुक्त हैं.
गाड़ी के पुर्जे: अधिक एथेनॉल पुराने वाहनों में रबर होज, सील,ओ-रिंग, फ्यूल पंप और कुछ प्लास्टिक पार्ट्स पर ज्यादा असर डालता है. ARAI की रिपोर्ट में भी पुराने E10 वाहनों में रबर पार्ट्स के जल्दी खराब होने की बात सामने आई थी. टू-व्हीलर्स में बड़ी समस्या सामने आई है.
जेब पर कितना असर: अधिक एथेनॉल को लेकर तैयार न होने वाली गाड़ियों में फ्यूल सिस्टम की अधिक निगरानी. कुछ पुर्जों को बदलने और ज्यादा सर्विसिंग की आवश्यकता हो सकती है.
फेज वाइज रोलआउट की योजना: E20 के अनुभव और उठी चिंताओं को देखते हुए सरकार E25 को धीरे-धीरे लागू करने पर विचार कर रही है, ताकि उद्योग और उपभोक्ताओं को तैयारी का समय मिल सके.
ईंधन आपूर्ति व्यवस्था: रिफाइनरियों और तेल विपणन कंपनियों की तैयारी तथा उच्च एथेनॉल मिश्रण की उपलब्धता का भी आकलन किया जा रहा है.
मानकों की तैयारी: E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधनों के लिए भारतीय मानक (BIS) अधिसूचित किए जा चुके हैं, ताकि भविष्य में इनका उपयोग नियमानुसार हो सके.
E 85 ईंधन की तैयारी
इस समय E25, E27, E30 और भविष्य में E85 जैसे एथेनॉल वाले फ्यूल पर का जारी है. इनके लिए ट्रायल तकनीकी मानक और इंजन टेस्टिंग पर काम हो रहा है. आने वाले सालों में भारतीय पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ अधिक एथेनॉल वाले फ्यूल भी दिख सकते हैं. उससे पहले यह तय करना जरूरी है कि देश की करोड़ों गाड़ियां इसके लिए तैयार हैं या नहीं.
सरकार का कहना है कि E25 को जल्दबाजी में लागू नहीं किया जाएगा. पहले वैज्ञानिक परीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और उद्योग से परामर्श पूरा किया जाएगा. इसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा.
केजरीवाल ने देश की 29 ऑटो निर्माता कंपनियों को लिखी चिट्ठी, पूछा-‘क्या पुरानी गाड़ियों में ई-20 का इस्तेमाल सुरक्षित है'?
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश की 29 ऑटो निर्माता कंपनियों को चिट्ठी लिखकर एक सप्ताह में स्पष्ट करने की मांग की है कि क्या पुरानी गाड़ियों में ई-20 (20 फीसद एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल) के इस्तेमाल सुरक्षित है? उन्होंने सरकारी प्रेस कांफ्रेंस में पुरानी गाड़ियों में ई-20 का इस्तेमाल सुरक्षित होने का दावा करने वाली टोयोटा, हीरो और मारूति को अलग चिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने पूछा है कि आपका ओनर मैनुअल तो पुरानी गाड़ियों में किसी भी हाल में 10 फीसद एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल की अनुमति नहीं देता है. ऐसे में तीनों कंपनियां देश को लिखित में बताएं कि क्या पुरानी गाड़ियों में ई-20 सुरक्षित है और क्या माइलेज 4-5 फीसद ही कम होती है. साथ ही, क्या गाड़ी की माइलेज 5-10 फीसद से ज्यादा कम हुई या कोई कंपोनेंट खराब हुआ तो तीनों कंपनियां उपभोक्ता को हर्जाना देंगी?
क्या गाड़ी के माइलेज पर होगा असर
अरविंद केजरीवाल ने दूसरी चिट्ठी 26 अन्य कंपनियों को लिखी है और इनसे साफ करने को कहा कि क्या आपकी पुरानी गाड़ियों में ई-20 का इस्तेमाल संभव है? इसके इस्तेमाल से गाड़ी की कितनी माइजेल गिरेगी और कितना नुकसान होगा? क्या किसी गाड़ी की माइलेज घटने या कोई कंपोनेंट खराब होने पर ऑटो कंपनियां उपभोक्ता को मुआवजा देंगी? साथ ही उन्होंने कहा कि गुरुवार को मैं ई-20 पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं राय जानने के लिए कुछ पेट्रोल पंपों, सर्विस सेंटर और मैकेनिक के पास जाऊंगा.
बुधवार को “आप” मुख्यालय पर पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष के साथ प्रेसवार्ता कर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मंगलवार को मैंने कहा था कि देश के सभी पेट्रोल बेस्ड टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर बनाने वाले ऑटो मैन्युफैक्चरर कंपनियों को मैं चिट्ठी लिखकर बोलूंगा कि वे अपना स्टैंड क्लियर करें कि क्या उनकी पुरानी गाड़ियों में ई-20 का इस्तेमाल किया जा सकता है? बुधवार को मैं 29 ऑटो मैन्युफैक्चरर कंपनियों को चिट्ठी लिख रहा हूं.
29 में से तीन कंपनियों को अलग चिट्ठी लिखी
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 29 में से तीन कंपनियों को अलग चिट्ठी लिखी है और बाकी 26 को कंपनियों को अलग लिखी है. ये तीन कंपनियां मारुति, टोयोटा किर्लाेस्कर और हीरो हैं, जिन्होंने 4 जुलाई को सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि अगर पुरानी गाड़ियों में ई-20 इस्तेमाल किया जाए, तो सुरक्षित है. सिर्फ गाड़ी की थोड़ी सी माइलेज गिरती है, तीन-चार या 5 फीसद, लेकिन गाड़ी को कोई नुकसान नहीं होता. इसलिए इन कंपनियों को अलग से चिट्ठी लिखी गई है.
4-5 फीसद माइलेज कम होती है
अरविंद केजरीवाल बताया कि टोयोटा, मारुति और हीरो को लिखी चिट्ठी में कहा है कि आपने 4 जुलाई को सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि पुरानी गाड़ियों में ई-20 का इस्तेमाल किया जा सकता है, 4-5 फीसद माइलेज कम होती है, लेकिन गाड़ी को नुकसान नहीं होता. लेकिन आपको ओनर मैनुअल कहता है कि किसी भी हालत में 2023 से पहले बनी पुरानी गाड़ियों में 10 फीसद से ज्यादा एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. इन दोनों स्थितियों में विरोधाभास है. इन कंपनियों की ओर से जारी ओनर मैनुअल, जो कंज्यूमर और कंपनी बीच एक एग्रीमेंट होता है, वह कुछ और कहता है और कंपनियों के प्रतिनिधि सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाकर कुछ और कहते हैं.
कोई मामूली भूल या विसंगति नहीं
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह कोई मामूली भूल या विसंगति नहीं है. इन कंपनियों की वास्तविक स्थिति क्या है, वे इसे लिखित में देश के सामने सार्वजनिक करें. चिट्ठी मिलने के एक हफ्ते के अंदर ये कंपनियां स्पष्ट जवाब दें कि क्या पुरानी गाड़ियों में ई-20 पेट्रोल इस्तेमाल किया जा सकता है? क्या उसकी वजह से केवल 4-5 फीसद ही माइलेज कम होती है और क्या उसकी वजह से गाड़ी को कोई नुकसान नहीं होता? अगर ऐसा है तो उनसे दो प्रश्न पूछे गए हैं कि अगर किसी का 5 से 10 फीसद से ज्यादा माइलेज कम हुआ, तो क्या वे उस कंज्यूमर को मुआवजा देंगे? अगर ई-20 इस्तेमाल करने से किसी कंपोनेंट को नुकसान हुआ, तो क्या उस उपभोक्ता को कंपोनेंट का हर्जाना दिया जाएगा?
26 अन्य कंपनियों को एक सामान्य चिट्ठी लिखी
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 26 अन्य कंपनियों को एक सामान्य चिट्ठी लिखी है. इसमें लिखा है कि उनके प्रोडक्ट को कई लोग इस्तेमाल करते हैं. तो वे अपना स्टैंड क्लियर करें. क्योंकि इस समय ई-20 को लेकर काफी विवाद चल रहा है. वे अपना स्टैंड क्लियर करें कि क्या उनकी 2023 से पहले की पुरानी गाड़ियों में ई-20 का इस्तेमाल किया जा सकता है? क्या उसकी वजह से माइलेज कम होगी? कम होगी तो कितनी होगी और क्या उसकी वजह से कोई नुकसान होगा?
कंपोनेंट के नुकसान की वे भरपाई करेंगी?
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर ये कंपनियां कहती हैं कि ई-20 सुरक्षित है, तो क्या माइलेज में कमी के नुकसान की वे भरपाई करेंगी और क्या कंपोनेंट के नुकसान की वे भरपाई करेंगी? मैं उम्मीद करता हूं कि सारी कंपनियां इसका जवाब देंगी क्योंकि यह सभी कंज्यूमर के लिए बहुत गंभीर मामला है. मुझे उम्मीद है कि एक हफ्ते के अंदर सभी कंपनियां इसका जवाब दें, क्योंकि सबके ओनर मैनुअल कुछ कहते हैं और सार्वजनिक रूप से कुछ कंपनियों ने कुछ और कहा है.
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि गुरुवार को मैं कुछ पेट्रोल पंप, सर्विस सेंटर और कुछ मिस्त्रियों के यहां जाऊंगा. मैं लोगों से बात करूंगा कि वे क्या कहते हैं. सरकार तो जिद्द पर अड़ी हुई है कि वह ई-20 सबके ऊपर थोपेगी. सरकार कहती है कि यह सुरक्षित है, इससे कुछ नहीं होता, थोड़ी बहुत माइलेज कम होती है और इसकी वजह से कोई नुकसान नहीं हो रहा. लेकिन जनता क्या कह रही है, जनता का क्या अनुभव है?
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