Bhogapuram Airport पर शुरू हुईं वाणिज्यिक उड़ानें, हैदराबाद से आई पहली फ्लाइट
आंध्र प्रदेश के भोगपुरम स्थित अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सोमवार को वाणिज्यिक उड़ान सेवाएं शुरू हो गईं। पहली वाणिज्यिक उड़ान हैदराबाद से इंडिगो की थी, जो हवाई अड्डे पर पहुंची। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक अगस्त को इस हवाई अड्डे का उद्घाटन किया था।
केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने सोमवार को हवाई अड्डे पर पहली वाणिज्यिक उड़ान सेवा को हरी झंडी दिखाई और यात्रियों को बोर्डिंग पास सौंपे। इसके साथ ही इस नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ान सेवाएं शुरू हो गयीं। राममोहन नायडू ने एक संदेश में कहा, ‘‘अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर वाणिज्यिक उड़ान सेवाओं की शुरुआत बेहद खुशी और गर्व का विषय है।
यह उत्तर आंध्र प्रदेश के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है और यह क्षेत्र के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा।” आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हवाई अड्डे पर कामकाज शुरू होने को राज्य के लिए एक ऐतिहासिक अध्याय बताया। पहली इंडिगो उड़ान हैदराबाद से भोगपुरम पहुंची, जिसके बाद एअर इंडिया एक्सप्रेस की एक उड़ान बेंगलुरु से यहां पहुंची। हैदराबाद से आई पहली उड़ान ने अपनी वापसी की यात्रा में तेलंगाना की राजधानी के लिए उड़ान भरी, जो भोगपुरम से रवाना होने वाली पहली उड़ान थी।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘जिस तरह भोगपुरम से विमान उड़ान भर रहे हैं, उसी तरह हमारे युवाओं की आकांक्षाएं, सपने और भविष्य भी नयी ऊंचाइयों की ओर उड़ान भरेंगे और उनके लिए नए अवसरों के द्वार खुलेंगे।’’ केंद्रीय मंत्री नायडू के अनुसार, हवाई अड्डे पर पहुंचे यात्रियों ने इसके बुनियादी ढांचे, वास्तुकला और सुविधाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह हवाई अड्डा केवल एक इमारत के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्र के इतिहास, विरासत और संस्कृति के प्रतीक के रूप में बनाया गया है। विशाखापत्तनम हवाई अड्डे का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह उन लोगों की भावनाओं को समझते हैं, जो वहां नियमित वाणिज्यिक उड़ान सेवाएं बंद होने से दुखी हैं।
उन्होंने बताया कि विशाखापत्तनम हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल अब सामान्य वायुयान चालन के तहत निजी उड़ानों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भोगपुरम हवाई अड्डे तक पहुंच के लिए बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया जा रहा है। कई सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है और सोंत्यम रोड समेत सात प्रमुख सड़क परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।
विशाखापत्तनम हवाई अड्डे पर निर्धारित वाणिज्यिक उड़ान सेवाएं 16 अगस्त को बंद हो गईं। वहां से आखिरी उड़ान इंडिगो की 6ई 2018 थी, जिसने रात 10 बजकर 45 मिनट पर दिल्ली के लिए उड़ान भरी। आंध्र प्रदेश सरकार 5,700 करोड़ रुपये की लागत से जीएमआर समूह द्वारा विकसित भोगपुरम हवाई अड्डे को महज एक बुनियादी ढांचा परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि पूरे उत्तर आंध्र क्षेत्र के कायाकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली परिसंपत्ति के रूप में देखती है।
इसे औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, निर्यात, कौशल विकास और अनुसंधान को बढ़ावा देने वाले उत्प्रेरक के रूप में परिकल्पित किया गया है।
Rajasthan के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है
राजस्थान सरकार ने सरकारी विद्यालयों के परिसर में प्रधानाचार्य की अनुमति के बिना बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। साथ ही लिखित मंजूरी के बिना स्कूल की गतिविधियों की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी पर भी रोक लगा दी गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व कांग्रेस पार्टी के अन्य नेताओं ने इसके लिए सरकार की आलोचना करते हुए आदेश वापस लेने की मांग की है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आदेश वापस नहीं लिया गया तो पार्टी आंदोलन करेगी। उल्लेखनीय है कि कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने हाल ही में घोषणा की थी कि उसकी टीम राज्य के उन विद्यालयों का दौरा करेगी जिनकी हालत ठीक नहीं है। इसके बाद ही राज्य के माध्यमिक शिक्षा विभाग ने रोक संबंधी यह आदेश निकाला।
राज्य में अनेक जगह सरकारी विद्यालयों के छात्रों द्वारा शिक्षकों की कमी, कक्षा कक्षों की कमी व अन्य बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों को लेकर हाल ही में विरोध-प्रदर्शन भी हुए थे। इनमें से कई विरोध-प्रदर्शनों को सोशल मीडिया पर काफी कवरेज मिली थी। राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस आदेश का बचाव करते हुए कहा कि इसका मकसद नाबालिग छात्र छात्राओं की निजता, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करना है।
उन्होंने कहा कि इससे आगंतुकों पर पूरी तरह कोई रोक नहीं है। कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने रविवार सुबह कहा था कि टीम राजस्थान के उन विद्यालयों का दौरा करेगी जिनकी हालत खराब है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘राजस्थान से मुझे अब तक जयपुर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, धौलपुर, भरतपुर, कोटा, बाड़मेर, हनुमानगढ़ में ख़राब स्कूल का निरीक्षण करने का अनुरोध आया है।
इन जगहों पर प्रशासन स्कूल ठीक करने की माँग नहीं मान रहा। अगले कुछ दिनों में मैं ये सभी जगह जाऊंगा।’’ इसके कुछ घंटे बाद ही माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार ने ये निर्देश जारी किए। इनमें कहा गया है कि राज्य सरकार अभिभावक के समान दायित्व के सिद्धांत के अंतर्गत, राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत सभी बच्चों की सुरक्षा, गरिमा, निजता एवं कल्याण की विशेष जिम्मेदारी वहन करती है।
इनमें कहा गया है कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक बच्चे को जीवन, गरिमा एवं निजता का अधिकार प्रदान करता है। साथ ही निजता के अधिकार को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता प्रदान की है। इनमें कहा गया है कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की स्कूल सुरक्षा नीति एवं दिशा-निर्देश इस बात पर बल देते हैं कि प्रत्येक विद्यालय बच्चों के लिए सुरक्षित, संरक्षित एवं बाल-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराए तथा उन्हें शोषण एवं निजता के अतिक्रमण से संरक्षण प्रदान करे।
निर्देशों के तहत, प्रधानाचार्य/संस्था प्रधान की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी बाहरी व्यक्ति को विद्यालय परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी, केवल शासकीय अधिकारी अपवाद होंगे, जो अपने आधिकारिक दायित्वों के निर्वाह हेतु विधिवत अधिकृत हों। इसके तहत प्रत्येक आगंतुक विद्यालय परिसर में प्रवेश करने से पूर्व आगंतुक रजिस्टर में अपनी प्रविष्टि करेगा। इसी तरह प्रधानाचार्य, किसी शिक्षक अथवा अधिकृत विद्यालय अधिकारी के साथ हुए बिना कोई भी बाहरी व्यक्ति कक्षा-कक्ष, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, छात्रावास, खेल मैदान, शौचालय अथवा विद्यार्थियों की किसी भी गतिविधि वाले क्षेत्र में प्रवेश नहीं करेगा।
इसमें कहा गया है कि प्रधानाचार्य की पूर्व लिखित अनुमति के बिना विद्यार्थियों, शिक्षकों अथवा विद्यालय गतिविधियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, साक्षात्कार, ऑडियो रिकॉर्डिंग अथवा लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की जाएगी तथा यह केवल विधि सम्मत उद्देश्य के लिए ही अनुमन्य होगी। निर्देशों के अनुसार विद्यालय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि विद्यार्थियों के फोटो, वीडियो अथवा व्यक्तिगत जानकारी का ऐसा संग्रह, प्रकाशन अथवा प्रसार न हो जिससे उनकी निजता, गरिमा अथवा सुरक्षा प्रभावित हो। दिशा निर्देश में कहा गया है कि प्रधानाचार्य को किसी भी ऐसे आगंतुक को प्रवेश से मना करने का अधिकार दिया गया है जिसकी उपस्थिति से सुरक्षा, निजता, अनुशासन या शैक्षिक माहौल पर असर पड़ सकता हो।
इसके मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति बिना अनुमति के अंदर आता है,स्कूल परिसर से जाने से मना करता है, बिना इजाज़त फ़ोटो या वीडियो लेने की कोशिश करता है या स्कूल के कामकाज में रुकावट डालता है तो प्रधानाचार्य तुरंत स्थानीय पुलिस और ज़िला शिक्षा अधिकारी को सूचित कर सकते हैं ताकि नियमों के तहत कार्रवाई की जा सके। वहीं मंत्री दिलावर ने इस आदेश का बचाव करते हुए सोमवार को कहा कि यह अच्छी बात नहीं है कि कोई बिना अनुमति विद्यालयों में आए और बिना किसी वजह के छात्र-छात्राओं का साक्षात्कार ले। उन्होंने कहा, कुछ लोगों से सुन रहा हूं कि सरकार ने विद्यालयों में किसी के आने जाने या रिकॉर्डिंग करने पर प्रतिबंध लगाया है।
हमारा कोई प्रतिबंध नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘छात्रों की सुरक्षा की जिम्मा हमारा है और नाबालिग छात्र-छात्राओं की फोटो या उनका बयान लेने से पहले उनके अभिभावक से अनुमति जरूरी है। विद्यालय में शिक्षक ही अभिभावक हैं। अगर कोई बिना किसी वजह के अंदर आता है और बच्चों का इंटरव्यू लेता है, उनकी निजता का उल्लंघन करता है या उनसे गैर-ज़रूरी सवाल पूछता है, तो यह ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि स्कूल माता-पिता के साथ मिलकर काम करते हैं और हर महीने माता-पिता-शिक्षक बैठकें होती हैं इसलिए कुछ भी छिपाने जैसी बात नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत, राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस आदेश की आलोचना करते हुए इसे वापस लेने की मांग की हैं। इन नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार तुरंत यह आदेश वापस ले और पारदर्शिता से भागना बंद करे।
गहलोत ने कहा, ‘‘भाजपा शासन में राजस्थान के सरकारी विद्यालयों की दुर्गति किसी से छुपी नहीं है। राजकीय विद्यालयों में टूटी छतें, टपकती कक्षाएं और शिक्षकों के हजारों रिक्त पद इस सरकार की हकीकत हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘समाधान इन कमियों को दूर करना था, लेकिन भाजपा सरकार ने नया फरमान जारी कर दिया। अब बिना प्रधानाचार्य की अनुमति के कोई बाहरी व्यक्ति स्कूल में प्रवेश नहीं कर सकेगा, न फोटो खींच सकेगा, न वीडियो बना सकेगा, न मीडिया रिपोर्टिंग हो सकेगी।’’ गहलोत के अनुसार, ‘‘जो सरकार अपने ही विद्यालयों की हकीकत से डरकर, उनमें सुधार करने की बजाय पारदर्शिता न रखने के लिए दरवाजे बंद करा रही है, वह शिक्षा का भला कभी नहीं कर सकती।
भाजपा सरकार तुरंत यह आदेश वापस ले और पारदर्शिता से भागना बंद करे।’’ उन्होंने कहा कि अगर यह तानाशाही आदेश वापस नहीं लिया तो आने वाले दिनों में जनता स्वयं आगे आकर विद्यालयों की सच्चाई दिखाने वाला अभियान चलाकर इस आदेश की धज्जियां उड़ा देगी। वहीं जूली ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘भाजपा सरकार ने टूटी छतों, टपकते क्लासरूम और शिक्षकों की भारी कमी का एक बेहतरीन समाधान ढूंढ निकाला है। इन कमियों को दूर करने के बजाय, सरकार ने इन्हें दुनिया की नज़रों से छिपाने के आदेश जारी किए हैं।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि इन निर्देशों से विद्यालयों में हो रही गड़बड़ियां सामने नहीं आ पाएंगी और उन्होंने इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की।
कांग्रेस नेता ने कहा, अब बिना इजाज़त कोई अंदर नहीं जा पाएगा, ताकि असलियत सामने न आए। इस तानाशाही आदेश को राज्य सरकार जल्द से जल्द वापस ले, वरना इसके विरुद्ध सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाया जाएगा।
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