त्रिपुरा राज्य में सस्ती और अच्छी हेल्थकेयर सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध: सीएम साहा
अगरतला, 8 जुलाई (आईएएनएस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बुधवार को फिर कहा कि राज्य सरकार का मुख्य मकसद त्रिपुरा में हेल्थकेयर सेवाओं को मजबूत करना है, ताकि लोगों को राज्य से बाहर जाए बिना और भारी मेडिकल खर्च किए बिना अच्छी और सस्ती चिकित्सा मिल सके।
मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास पर मुख्यमंत्री समीपेशु जन-संपर्क कार्यक्रम के 69वें संस्करण को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार लोगों की बढ़ती हेल्थकेयर जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य के हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार बेहतर बना रही है और मेडिकल सुविधाओं का विस्तार कर रही है।
साहा ने कहा, त्रिपुरा की हेल्थकेयर व्यवस्था में सुधार अब साफ तौर पर दिख रहा है। कई बीमारियां, जिनके लिए मरीजों को पहले दूसरे राज्यों में जाना पड़ता था, उनका इलाज अब अगरतला में ही हो रहा है। अगर राज्य में इलाज उपलब्ध नहीं है, तो मरीजों को एम्स, नई दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों में रेफर किया जा रहा है। जीबी अस्पताल में टेलीमेडिसिन सेवाएं भी बेहतर हेल्थकेयर सुविधाएं देने में मदद कर रही हैं और बड़ी संख्या में मरीजों को लाभ पहुंचा रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान न केवल हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर है, बल्कि यह सुनिश्चित करने पर भी है कि हर नागरिक को, चाहे उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, राज्य के भीतर समय पर और अच्छी चिकित्सा सुविधा मिले।
खराब मौसम और हाल की प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद, त्रिपुरा के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग जन-शिकायत निवारण कार्यक्रम में शामिल हुए, जिनमें से अधिकांश ने गंभीर रूप से बीमार परिवार के सदस्यों के इलाज के लिए आर्थिक और चिकित्सा सहायता की मांग की।
साहा के पास स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग का प्रभार भी है। उन्होंने धैर्यपूर्वक हर मामले को व्यक्तिगत रूप से सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को तुरंत और उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया ताकि आवेदकों को बिना किसी देरी के आवश्यक सहायता मिल सके।
चिकित्सा सहायता मांगने वालों में धलाई जिले के अंबासा की रूपाली नमसुद्र (अपने बच्चे के इलाज के लिए), कैलाशहर के धनबिलास गांव के बिकास देबबर्मा का परिवार, उत्तरी त्रिपुरा जिले के अब्दुल हुसैन (अपनी पत्नी के इलाज के लिए), खोवाई जिले के प्रबीर बर्मन (अपने बेटे की आंख की जटिल बीमारी के लिए) और उनाकोटी जिले की गायत्री भट्टाचार्य (पाचन तंत्र की गंभीर बीमारी के इलाज के लिए) शामिल थे। दो बहुत गंभीर मामलों में, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मरीजों के लिए नई दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) में खास इलाज की तुरंत व्यवस्था करें।
अगरतला के कई निवासियों ने भी मुख्यमंत्री से संपर्क किया और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे अपने परिवार के सदस्यों के लिए आर्थिक और मेडिकल मदद की गुहार लगाई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उन्हें जरूरी मदद देने के लिए उचित कदम उठाएं।
मछली व्यापारी संघ के सदस्यों ने भी साहा से मुलाकात की और उन्हें अपनी आजीविका और व्यापारिक गतिविधियों पर असर डालने वाले विभिन्न मुद्दों के बारे में बताया।
मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी चिंताओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी और हर संभव मदद देगी।
साहा ने कार्यक्रम के दौरान अगरतला में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले एक व्यक्ति के परिवार को आर्थिक मदद के तौर पर 3.90 लाख रुपये का चेक सौंपा। इसके साथ ही उन्होंने संकट के समय प्रभावित परिवारों को समय पर राहत और मदद देने के राज्य सरकार के संकल्प को दोहराया।
मुख्यमंत्री ने शुभ्रजीत चौधरी के परिवार को भी 4 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी, जिनकी कुछ दिन पहले अगरतला के रामनगर इलाके में एक दुखद धमाके में मौत हो गई थी।
--आईएएनएस
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Explainer: 90% मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया में हर रोज होता है रामायण का मंचन, हनुमान जी के आगे सिर झुकाती है उनकी सेना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन दिनों का इंडोनेशिया दौरा खत्म हो गया है. प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई. इसके बाद दोनों इंडोनेशिया के सबसे पुराने हिंदू मंदिर पहुंचे. यहां पीएम मोदी ने पूजा-पाठ की और शिव की महिमा का बखान किया.
बता दें, इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश है. यहां की आबादी 28 प्रतिशत है, जिसमें से 87 से 90 प्रतिशत लोग इस्लाम धर्म का अनुसरण करते हैं. लेकिन जब भी कोई सुनता है कि दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश में आज भी रामायण का नियमित रूप से मंचन होता है तो हर कोई दंग रह जाता है. भगवान राम, माता सीता और भगवान हनुमान वहां की सांस्कृति का अहम हिस्सा हैं. दावा है कि इंडोनेशियन आर्मी पासिंग आउट परेड में भगवान हनुमान के समक्ष नतमस्तक होती है.
आज के एक्सप्लेनर में आइये जानते हैं इंडोनेशिया के हिंदू संस्कृति से जुड़ाव और उन्हें अपनाने के बारे में विस्तार से…
भारत और इंडोनेशिया के सांस्कृतिक संबंध करीब दो हजार साल पुराने हैं. कहा जाता है पहली सहस्राब्दी के दौरान, भारतीय व्यापारियों, विद्वानों और समुद्री मार्गों से इंडोनेशिया पहुंचे, जिससे वे लोग हिंदू और बौद्ध संस्कृति की जानकारी मिली. उस वक्त जावा, बाली और सुमात्रा जैसे क्षेत्रों में विभिन्न हिंदू और बौद्ध राजाओं का शासन था. इन्हीं राजवंंशों ने संस्कृत साहित्य, महाराभारत और रामायण को वहां की स्थानीय संस्कृति का हिस्सा बना दिया.
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समय बीतता गया और वहां बाद में इस्लाम का विस्तार हुआ. हालांकि, रामायण और महाभारत को धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि सांस्कृति विरासत के रूप से संरक्षित किया गया. इसी वजह से इंडोनेशियाई कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच का प्रभाव वहां दिखाई देता है.
हर रोज होता है रामायण का मंचन
इंडोनेशिया के सुप्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर के पास वर्षों से रामायण का मंचन किया जाता है. लोग यहां भगवान राम की जीवनी का नृत्य-नाटिका का आनंद लेते हैं. खास बात है कि मंचन करने वाले कलाकार सिर्फ हिंदू नहीं होते बल्कि इस्लाम सहित अन्य धर्मों से भी होते हैं. खास बात है कि इंडोनेशिया में ऐसे कई मुस्लिम कलाकार हैं, जो वर्षों से भगवान राम, माता सीता सहित रामायण के विभिन्न किरदारों को निभाते हैं. उनका मानना है कि रामायण कर्तव्य, नैतिकता, साहस और सत्य की जीत का संदेश देती है. यही वजह है कि रामायण को सिर्फ किसी एक धर्म तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए. इंडोनेशिया की ये परंपरा सिखाती है कि सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था अलग-अलग विषय हो सकते हैं और दोनों का सम्मान साथ-साथ किया जा सकता है.
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भगवान राम की पूजा करते हैं बाली के लोग
इंडोनेशिया का बाली द्वीप आज भी हिंदू बहुल क्षेत्र है. यहां की अधिकांश आबादी हिंदू धर्म का पालन करती है. बाली में भगवान राम और भगवान हनुमान सहित अन्य देवी-देवताओं की पूजा की जाती है. यहां होने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं.
राष्ट्रीय प्रतीकों में भी दिखती है भारतीय विरासत
इंडोनेशिया भले ही एक मुस्लिम बहुल देश है फिर भी वहां का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य "भिन्नेका तुंग्गल ईका" प्राचीन जावानी साहित्य से लिया गया है, जिसका अर्थ है—"अनेकता में एकता. ये संस्कृत से इंस्पायर्ड है. देश की सांस्कृतिक पहचान में रामायण, गरुड़, महाभारत और भारतीय परंपराओं से जुड़े प्रतीकों का प्रभाव आज भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. इंडोनेशिया का राष्ट्रीय प्रतीक गरुड़ पंचशील है. इंडोनेशिया की राष्ट्रीय एयरलाइन का नाम भी गरुड़ एयरलाइन्स ही है.
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देखें पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे से जुड़े फोटो-वीडियो
President Prabowo Subianto and I inaugurated the UNESCO World Heritage Prambanan Temple Compound Restoration and Conservation Project. This initiative is a shining example of the enduring civilisational bonds between India and Indonesia, rooted in a shared heritage that has… pic.twitter.com/Fy8FoBvJ8X
— Narendra Modi (@narendramodi) July 8, 2026
The magnificent Prambanan Temple stands as a timeless symbol of our cultural and spiritual links. Preserving such heritage is about safeguarding the traditions that continue to inspire generations.
— Narendra Modi (@narendramodi) July 8, 2026
India is privileged to partner with Indonesia in this important endeavour. As… pic.twitter.com/m6MCfWKh8n
इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर में ॐ नमः शिवाय! pic.twitter.com/AuHupT2vSO
— Narendra Modi (@narendramodi) July 8, 2026
The majestic Prambanan Temple! pic.twitter.com/pRS2S9X5gm
— Narendra Modi (@narendramodi) July 8, 2026
The India-Indonesia friendship is strong and vibrant! ???????? ????????@prabowo pic.twitter.com/U57syfi670
— Narendra Modi (@narendramodi) July 8, 2026
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