Explainer: क्या है ‘दिमागी नक्सल’ जिसका PM मोदी ने लाल किले से किया जिक्र? बयान के बाद क्यों मचा सियासी घमासान
Who are Dimagi Naxals: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले की प्राचीर से 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किए जाने के बाद से देश का सियासी पारा गरमा गया है. पीएम ने देशवासियों को ऐसे लोगों से सावधान रहने को कहा था. इस बयान के बाद विपक्ष ने इसे सत्ता पक्ष का नया 'अर्बन नक्सल' तंज मानकर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद बीजेपी और सरकार के मंत्रियों ने मोर्चेबंदी करते हुए इसके सही मायने समझाए. आइए समझते हैं कि यह पूरा विवाद क्या है और 'दिमागी नक्सल' को लेकर दोनों पक्षों की क्या दलीलें हैं.
सरकार की नजर में कौन हैं 'दिमागी नक्सल'?
विपक्षी नेताओं की बयानबाजी के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और बीजेपी सांसद बृजलाल ने इस शब्द को विस्तार से परिभाषित किया. रिजिजू ने स्पष्ट किया कि पीएम मोदी ने किसी विपक्षी नेता को 'दिमागी नक्सल' नहीं कहा था, बल्कि यह उन विचारकों के लिए था जो देश विरोधी मंसूबों का समर्थन करते हैं. बीजेपी के अनुसार, 'दिमागी नक्सल' वे लोग हैं जो: संविधान और अखंडता के विरोधी: ये लोग माओवाद का बचाव करते हैं, धारा 370 के समर्थन में खड़े होते हैं और 'चिकन नेक' को काटकर पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने जैसी अलगाववादी सोच रखते हैं. ये जंगलों में हथियार लेकर नहीं छिपते. ये शहरों में प्रोफेसर, लेखक, NGO संचालक और बुद्धिजीवी का मुखौटा पहनकर रहते हैं.
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युवाओं का ब्रेनवॉश
ये अपने लेखों और सेमिनारों के जरिए युवाओं के दिमाग में जहर घोलते हैं. ये न्यायपालिका, सुरक्षा बलों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ अविश्वास पैदा करते हैं और हथियारी नक्सलियों का महिमामंडन करके उनके लिए फंडिंग जुटाते हैं. कांग्रेस के दिग्गज नेता पी. चिदंबरम ने सरकार पर तीखा तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि उन्हें 'दिमागी नक्सल' होने पर गर्व है. कांग्रेस के ही जयराम रमेश ने इसे पुरानी 'अर्बन नक्सल' वाली थ्योरी का नया नाम बताया. इसके अलावा टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा समेत कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए.
बीजेपी का कांग्रेस से सीधा सवाल: मनमोहन सही या चिदंबरम?
पी. चिदंबरम के "गर्व" वाले बयान ने बीजेपी को कांग्रेस पर सीधा हमला करने का मौका दे दिया. बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस की विचारधारा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का वह ऐतिहासिक बयान याद दिलाया जिसमें उन्होंने नक्सलवाद को भारत की "आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा" माना था. बीजेपी ने पूछा कि कांग्रेस साफ करे कि वह मनमोहन सिंह की बात मानती है या चिदंबरम के 'गर्व' वाले रुख का समर्थन करती है? लाल आतंक का खात्मा: बीजेपी ने कांग्रेस सरकार के दौर की याद दिलाते हुए कहा कि पहले 'रेड कॉरिडोर' के तहत 180 जिले नक्सलवाद की आग में जल रहे थे. लेकिन 31 मई 2026 तक मोदी सरकार की नीतियों और गृह मंत्री अमित शाह की सख्ती के कारण नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घटकर शून्य हो गई है. बंदूकों की जगह 'बस्तर ओलंपिक': सरकार ने अपनी उपलब्धि गिनाते हुए बताया कि जिस बस्तर में कभी गोलियां और बारूद गूंजते थे, आज वहां 'बस्तर ओलंपिक' जैसे शानदार खेल कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं, जो एक नए और शांत भारत की तस्वीर है.
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Explainer: क्लाइमेट चेंज ने टाइफून डॉल्फिन को कैसे बना दिया खतरनाक, जिसने चीन में मचा दी तबाही
Explainer: चीन में हर साल कई चक्रवाती तूफान आते हैं. हाल ही में चीन में आए टाइफून डॉल्फिन ने भारी तबाही मचाई. इस टाइफून से चीन के पूर्वी हिस्से से लेकर मध्य और उत्तरी इलाकों में भारी बारिश हुई. जबकि समुद्र तट से टकराने के बाद इसकी हवाएं भले ही कमजोर हो गईं लेकिन तूफान से जुड़ी भारी नमी और उसका बचा हुआ परिसंचरण कई दिनों तक चीन एक अलग-अलग इलाकों में बारिश कराता रहा.
मौसम विशेषज्ञों की मानें तो टाइफून डॉल्फिन का असर सामान्य उष्णकटिबंधीय तूफानों की तुलना में असाधारण रूप से बड़े इलाके में देखने को मिला. जिसकी तुलना 2023 में आए शक्तिशाली टाइफून डॉक्सुरी से भी की जा रही है, जिसने उत्तरी चीन में भारी बारिश कराई थी, जिससे देश में बाढ़ आ गई थी.
कई इलाकों में बारिश ने तोड़ा रिकॉर्ड
टाइफून डॉल्फिन के प्रभाव के दौरान चीन के कम से कम 13 मौसम केंद्रों पर 24 घंटे की बारिश के पुराने रिकॉर्ड टूट गए. चीन के झेजियांग प्रांत में 7 से 11 अगस्त के बीच औसत बारिश करीब 215 मिलीमीटर दर्ज की गई. यह आंकड़ा वहां सीधे पहुंचने वाले किसी भी पिछले तूफान से जुड़ी बारिश के मुकाबले रिकॉर्ड स्तर पर दर्ज की गई. इसके अलावा ताइझोउ में स्थिति और भी गंभीर देखी गई. टाइफून डॉल्फिन के लैंडफॉल वाले इस इलाके में औसतन करीब 438 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो नया रिकॉर्ड है.
राजधानी बीजिंग में एक घंटे के भीतर हुई 90 मिमी से ज्यादा बारिश
टाइफून के शांत होने के बाद भी इसका असर देखने को मिला. जिसके चलते देश के भीतर हुबेई और हेनान में भी कई स्थानों पर बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिया. इसका असर उत्तर में बीजिंग तक देखने को मिला. राजधानी के एक जिले में सिर्फ एक घंटे के भीतर 90.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. स्थानीय रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बाद से यह उस इलाके में एक घंटे के भीतर दर्ज की गई सबसे अधिक बारिश बताया गया.
जमीन पर कमजोर होकर भी खतरनाक रहा टाइफून डॉल्फिन
सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग के मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, डॉल्फिन के व्यापक प्रभाव की बड़ी वजह उसका विशाल आकार और लैंडफॉल के बाद भी उसके साथ बनी रही पर्याप्त नमी बताया गया. बता दें कि आमतौर पर समुद्र से दूर जाने के बाद उष्णकटिबंधीय तूफान तेजी से कमजोर होने लगते हैं.
जमीन पर घर्षण और समुद्र से मिलने वाली ऊर्जा के खत्म होने के कारण हवाओं की ताकत कम हो जाती है. लेकिन डॉल्फिन के मामले में कमजोर होती हवाओं के बावजूद उसके भीतर मौजूद नमी और परिसंचरण ने बारिश कराने की क्षमता बनी रही. यही वजह है कि किसी तूफान की खतरनाक क्षमता का आकलन सिर्फ उसकी हवा की गति देखकर करना पर्याप्त नहीं होता.
16 दिन तक दिखा टाइफून डॉल्फिन का सफर
बता दें टाइफून डॉल्फिन का झेजियांग से लगभग 6,000 किलोमीटर पूर्व, इंटरनेशनल डेट लाइन के आसपास प्रशांत महासागर से पैदा हुआ. इसके बाद यह लंबी दूरी तय करते हुए चीन तक पहुंच गया. करीब 16 दिनों तक सक्रिय रहने वाला यह सिस्टम सामान्य उष्णकटिबंधीय तूफान की तुलना में लगभग तीन गुना लंबा चला.
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस साल प्रशांत महासागर में अल नीनो की परिस्थितियां तूफानों के बनने की जगह को सामान्य से अधिक पूर्व की ओर खिसका सकती हैं. रीडिंग यूनिवर्सिटी के ट्रॉपिकल साइक्लोन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कुछ तूफानों को गर्म समुद्री पानी के ऊपर लंबी दूरी तय करने का मौका मिलता है. इस दौरान उन्हें संगठित होने और ताकत हासिल करने के लिए अधिक समय मिल सकता है.
क्लाइमेट चेंज से क्यों बढ़ सकता है बारिश का खतरा?
वैज्ञानिकों की मानें तो जलवायु परिवर्तन के कारण गर्म होती दुनिया में ऐसे तूफानों से होने वाली भारी बारिश का जोखिम बढ़ सकता है. दरअसल, वायुमंडल का तापमान बढ़ने पर उसमें अधिक जलवाष्प मौजूद रह सकती है. सामान्य अनुमान के मुताबिक, तापमान में हर 1 डिग्री सेल्सियस वृद्धि के साथ वायुमंडल की नमी धारण करने की क्षमता लगभग 7 प्रतिशत बढ़ सकती है. यानी समान ताकत वाले तूफान भी आज के गर्म वातावरण में पहले की तुलना में अधिक बारिश पैदा कर सकते हैं. खासकर तब, जब वातावरण का परिसंचरण तूफान के अनुकूल हो.
गर्म वातावरण में उपलब्ध अतिरिक्त नमी भी बनी बारिश की वजह
इसके अलावा समुद्र का बढ़ता तापमान तूफानों के जमीन पर पहुंचने के बाद कमजोर होने की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है. कुछ शोधों में पिछले दशकों के दौरान लैंडफॉल के बाद तूफानों के कमजोर पड़ने की दर में जबरदस्त कमी का संकेत मिला है. विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्म वातावरण में उपलब्ध अतिरिक्त नमी और ऊर्जा तूफान के अवशेषों को लंबे समय तक भारी बारिश करने में सक्षम बना सकती है.
डॉक्सुरी तूफान जैसा दिखा पैटर्न?
टाइफून डॉल्फिन की तुलना 2023 में आए डॉक्सुरी तूफान से की जा रही है. जिसके पीछे की वजह ये है. क्योंकि दोनों मामलों में कमजोर होता हुआ तूफान बड़ी मात्रा में उष्णकटिबंधीय नमी को चीन के अंदरूनी हिस्सों तक लेकर पहुंचा. टाइफून डॉक्सुरी के दौरान मौसम वैज्ञानिकों ने एक व्यापक 'ब्लॉकिंग पैटर्न' की पहचान की थी. इसमें उच्च दबाव वाली प्रणालियों, वातावरण में जमा नमी, पहाड़ी क्षेत्रों में हवा के ऊपर उठने और दूसरे तूफान से आई अतिरिक्त नमी ने मिलकर बारिश को असाधारण रूप से बढ़ाने में मदद की.
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तूफान की बची हुई नमी से भी हुई भारी बारिश
टाइफून डॉल्फिन के मामले में भी इसी तरह की परिस्थितियों की संभावना जताई जा रही है. जबकि तूफान की बची हुई नमी स्थानीय हवाओं और पहाड़ी भूभाग से मिलती है, जिससे बारिश की तीव्रता और अवधि दोनों बढ़ सकती हैं. इस घटना से एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है कि किसी टाइफून का कमजोर हो जाना जरूरी नहीं कि खतरा भी खत्म हो गया हो. यदि वह बड़ी मात्रा में नमी अपने साथ अंदरूनी इलाकों तक पहुंचा दे, तो बाढ़ का खतरा कई दिनों तक बना रह सकता है और समुद्र तट से सैकड़ों किलोमीटर दूर तक फैल सकता है.
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