पाकिस्तान अब फिर से भारत के खिलाफ युद्ध की तैयारी कर रहा है। वह भी तब जब हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर चलाकर भारत ने ऐसी धूल चटाई कि उसकी तबाही का धुआं पूरी दुनिया ने देखा। दुनिया ने यह भी देखा कि जिन उधारू हथियारों को लेकर पाकिस्तान इतराता था उनको भारतीय डिफेंस सिस्टम और मिसाइलों ने कैसे कुछ मिनटों में ही राख कर दिया। अब पाकिस्तान फिर से युद्ध की रट लगाए हुए हैं। लगातार पाकिस्तान की ओर से खून बहाने हाथ काटने से लेकर ना जाने क्या-क्या धमकियां दी जा रही हैं। हालांकि भारत इन तमाम धमकियों का एक ही जवाब दे रहा है कि इस बार अगर पाकिस्तान ने कोई भी हिमाकत की तो उसे सोच लेना चाहिए कि उसे इतिहास और भूगोल में रहना है या नहीं। जो बताता है कि भारत इस बार किस तरह की तैयारी में है।
कुछ दिन पहले ही यह खबर आई थी कि भारत का सबसे खतरनाक और पनडुब्बी शिकारी विमान पीए आई पोसाइडन अचानक कराची के करीब पहुंच गया था। साथ में अमेरिकी नौसेना का भी सबसे खतरनाक जासूसी विमान उत्तरी अरब सागर में मंडराता हुआ दिखाई दिया था। जिसके बाद पाकिस्तान की सारी सेनाएं घबरा गई थी। कराची पोर्ट पर खतरे की घंटियां बजने लगी थी। कई इलाकों को हाईलाइट कर दिया गया था। दरअसल पिछले कुछ दिनों से यह संकेत मिल रहे थे कि पाकिस्तान फिर से युद्ध चाहता है और इन संकेतों के बीच भारत ने ऐसा धमाका किया कि वो हाई अलर्ट पर आ गया है। अब पाकिस्तान को यह लगने लगा है कि सच में भारत उस पर हमला कर सकता है। इस खौफ में आकर सेना प्रमुख आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ ने धड़ाधड़ मीटिंग शुरू कर दी है और चीन, तुर्की जैसे देशों से उधारू हथियार मंगाने शुरू कर दिए हैं। दरअसल सिंधु नदी का पानी रोकने से तड़प रहे पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने आर्मी हेड क्वार्टर पर अपने कोर कमांडरों की मीटिंग बुलाई। इस मीटिंग में घंटों तक चर्चा की और यह जानने की कोशिश की कि भारत ने पानी नहीं छोड़ा, तो क्या करना चाहिए और आखिर में जो कहा उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि पाकिस्तान भारत से जंग की तैयारी कर रहा है।
रावलपिंडी के सेना हेड क्वार्टर में कोर कमांडर्स के साथ कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तानी सेना ने कहा कि देश के हिस्से का पानी सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा। इसके लिए किसी भी हद तक जाएंगे। यह बयान भारत के साथ जंग की ओर संकेत है। पाकिस्तान चीन और तुर्की से भारी मात्रा में हथियारों की खरीद भी कर रहा है। इनमें ड्रोन मिसाइलें, पनडुब्बियां, युद्धपोत और हेलीकॉप्टर जैसे हथियार शामिल हैं। इसके अलावा एलओसी पर पाकिस्तानी सेना की आठ ब्रिगेड ने 35 एंटी ड्रोन यूनिट तैनात की है। एआई फेंसिंग भी की है। यही नहीं बल्कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से जुड़ी अपनी सीमाओं से पांच बटालियन को हटाकर एलओसी के रावलकोट, कोटली और भीमबर सेक्टर में तैनात किया है। हाल ही में पाकिस्तान ने चीन से भारी मात्रा में हथियारों की खरीद की है। इनमें हंगोर क्लास की पनडुब्बी शामिल है। पाकिस्तान ने चीन से 2015 में आठ हंगोर क्लास पनडुब्बियों की खरीद के लिए समझौता किया था। जिसमें से एक को हाल ही में पाकिस्तानी नौशाना में शामिल किया गया है।
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ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। 8 जुलाई तड़के अमेरिका ने ईरान पर कई हमले किए। अमेरिका का कहना है कि ईरान ने हॉर्मोन स्टेट से गुजर रहे तीन कमर्शियल जहाजों पर हमला किया था। इसी के जवाब में हमने भी हमला किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी कि सेंट कॉम ने एक्स पर पोस्ट करके कहा कि उसकी सेना ने ईरान के खिलाफ पावरफुल हमलों की एक सीरीज शुरू कर दी है। सॉम के मुताबिक ईरान ने हॉर्मोस स्टेट से गुजर रहे तीन कमर्शियल जहाजों पर हमला किया। अमेरिका ने इसे बिना उकसावे के की गई खतरनाक कारवाई और सीज फायर का साफ-साफ उल्लंघन बताया है। रर्स के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि इन हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, कोस्टल रडार सिस्टम, सरफेस टू एयर मिसाइल यानी कि सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, जहाजों को निशाना बनाने वाली क्रूज मिसाइलें और ड्रोन लॉन्च साइट्स को निशाना बनाया गया है। उधर ईरानी सरकारी मीडिया का कहना है कि देश के दक्षिणी हिस्सों में कई धमाकों की आवाज सुनी गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक दक्षिणी शहर शरीक में सात धमाके हुए। वहीं शरीक के तोहे रोई पीियर इलाके में छह प्रोजेक्टाइल गिरने की खबर है। ईरानी मीडिया ने यह भी बताया कि दक्षिणी ईरान के केशमा आइलैंड और बंदर अब्बास में भी धमाकों की आवाज सुनाई दी है। बाद में ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा कि शरिक के कमर्शियल पीियर पर एक दुश्मन के प्रोजेक्टाइल के गिरने से कई लोगों को छर्रे लगे हैं और लोग घायल हुए हैं। सरकारी टीवी ने यह भी कहा कि बंदर अब्बास और केश आइलैंड पर हालात सामान्य हो गए हैं। लेकिन शरीक में धमाकों की आवाजें लगातार आती रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजस्कियन अमेरिका के इन हमलों के बाद इराक का दौरा छोड़कर ईरान लौट गए। इससे पहले मंगलवार 7 जुलाई को हॉर्मोज स्टेट में तीन टैंकरों पर हमला हुआ था। ब्रिस्तानी सेना ने कहा कि इस समुद्री रास्ते से गुजर रहे तीन टैंकर प्रोजेक्टाइल की चपेट में आए। संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल मेरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक एक ही दिन में तीन तेल के जहाजों पर हमला हुआ। अप्रैल के आखिर के बाद पहली बार एक दिन में इतने बड़े हमले हुए हैं।
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अगर ऐसे हमले जारी रहे तो इस रास्ते से जहाजों का आना जाना मुश्किल हो सकता है। इससे दुनिया के कई देशों में तेल और दूसरे सामान की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इन हमलों के कुछ ही घंटे बाद अमेरिका ने ईरान को दी गई 60 दिनों की राहत भी वापस ले ली। इस राहत की वजह से ईरान कुछ शर्तों के साथ अपना तेल बेच रहा था। अब अमेरिका ने फिर से उस पर पाबंदियां लगा दी है। एक अमेरिकी अधिकारी ने एसोसिएटेड प्रेस यानी कि एपी को नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि हॉर्नोज स्टेट में ईरान की कारवाई स्वीकार नहीं की जा सकती। इसलिए उस लाइसेंस को वापस लेने का फैसला किया गया है। अमेरिका ने पहले ईरान को 21 अगस्त तक तेल बेचने की इजाजत दी थी। उस समय अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने कहा था कि स्विट्जरलैंड में ईरान के अधिकारियों के साथ अच्छी बातचीत हुई और इससे उम्मीद जगी है कि दोनों देशों के बीच चल रहा तनाव खत्म हो सकता है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है।
मंत्रालय ने कहा है कि ईरान के ऑयल एक्सपोर्ट पर मिली टेंपरेरी राहत वापस लेना 18 जून 2026 को हुए सीज फायर एग्रीमेंट का साफ-साफ उल्लंघन है। ईरान ने कहा है कि अमेरिका अपने वादे से पीछे हट गया है और इसके जो भी नतीजे होंगे उनकी पूरी जिम्मेदारी अमेरिका की होगी। उधर यूनाइटेड किंगडम मेरिटाइम ट्रेड ऑपरेशन सेंटर ने बताया कि ओमान कोस्ट के पास एक टैंकर पर प्रोजेक्टाइल गिरने के बाद उसमें आग लग गई। वहीं ईरानी सरकारी टीवी ने कहा है कि एलएजी ले जाने वाले टैंकर वार्निंग को नजरअंदाज करने कर रहे थे। इसके बाद वो हमले का शिकार हुए हैं। हालांकि ईरान ने सीधे तौर पर इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। ब्रिटानी समुद्री एजेंसी ने बताया कि बाकी दो जहाजों को भी नुकसान पहुंचा है। लेकिन उन्होंने अपना सफर जारी रखा। [गला साफ़ करने की आवाज़] किसी के भी घायल होने की खबर नहीं है। ईरान पहले भी कई बार कह चुका है कि हॉर्न स्टेट से गुजरने के लिए वही समुद्री रास्ता सुरक्षित है जिसे उसने मंजूरी दी है।
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