Primary Teacher Recruitment 2025: नियम-49 को लेकर फिर सड़कों पर चयनित अभ्यर्थी, DPI भोपाल के सामने 15 दिन का धरना शुरू
भोपाल। मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 भर्ती 2025 में D.El.Ed अंतिम वर्ष के चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। भर्ती के ऑनलाइन आवेदन में दिए गए नियम-49 के पालन की मांग को लेकर 1000 से ज्यादा प्रभावित चयनित अभ्यर्थी 17 अगस्त से भोपाल स्थित DPI कार्यालय के सामने 15 दिवसीय शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी कर ली है और D.El.Ed का रिजल्ट भी आ चुका है। इसके बावजूद शैक्षणिक योग्यता के लिए 25 अगस्त 2025 की कटऑफ को आधार बनाए जाने से वे नियुक्ति से बाहर हो रहे हैं। इसी को लेकर उन्होंने नियम-49 के मुताबिक उनकी पात्रता तय करने की मांग की है।
क्या है नियम-49 को लेकर विवाद?
चयनित अभ्यर्थियों का दावा है कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती के ऑनलाइन आवेदन में दिए गए नियम-49 में अंतिम वर्ष में पढ़ रहे अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का प्रावधान था और जरूरी शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेज दस्तावेज सत्यापन (DV) तक उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।
अभ्यर्थियों का कहना है कि इसी प्रावधान के आधार पर उन्होंने भर्ती परीक्षा में हिस्सा लिया और अब D.El.Ed का परिणाम भी जारी हो चुका है। ऐसे में जिन चयनित उम्मीदवारों ने दस्तावेज सत्यापन की तारीख तक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता पूरी कर ली है, उन्हें नियुक्ति के लिए पात्र माना जाना चाहिए।
25 अगस्त 2025 की कटऑफ पर आपत्ति
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी आपत्ति 25 अगस्त 2025 की कटऑफ को लेकर है। उनका कहना है कि जब आवेदन के समय अंतिम वर्ष के अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई थी, तो बाद में शैक्षणिक योग्यता के लिए 25 अगस्त 2025 को आधार बनाना उनके साथ उचित नहीं है।
उन्होंने सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग से इस कटऑफ पर पुनर्विचार करने और दस्तावेज सत्यापन की तारीख तक D.El.Ed की योग्यता पूरी करने वाले चयनित उम्मीदवारों को पात्र मानने की मांग की है।
पुरानी शिक्षक भर्तियों का भी दिया हवाला
चयनित अभ्यर्थियों ने अपनी मांग के समर्थन में पुरानी शिक्षक भर्तियों का उदाहरण भी दिया है। प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि 2011, 2018 की प्राथमिक शिक्षक भर्ती और 2020 की माध्यमिक शिक्षक भर्ती में भी इस तरह के प्रावधानों के तहत अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई थी।
अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछली भर्तियों में अपनाई गई व्यवस्था को देखते हुए मौजूदा भर्ती में भी उनके साथ अलग व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।
1000 से ज्यादा चयनित अभ्यर्थियों का भविष्य जुड़ा
प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों के मुताबिक इस विवाद से 1000 से ज्यादा चयनित अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि वे परीक्षा और चयन प्रक्रिया से गुजर चुके हैं और आवश्यक D.El.Ed योग्यता भी पूरी कर चुके हैं। अब पात्रता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से उनकी नियुक्ति अटकी हुई है।
अभ्यर्थियों ने सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर नियम-49 के अनुसार पात्रता स्पष्ट करने और प्रभावित चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति का रास्ता निकालने की मांग की है।
DPI के सामने 15 दिन चलेगा धरना
चयनित अभ्यर्थियों की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक धरना 17 अगस्त से लगातार 15 दिनों तक सुबह 10 बजे से DPI कार्यालय, गौतम नगर भोपाल के सामने आयोजित किया जाएगा। अभ्यर्थियों ने अन्य प्रभावित चयनित उम्मीदवारों से भी धरने में शामिल होने की अपील की है।
हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा आरोप, पी चिदंबरम “दिमागी नक्सली” नहीं, बल्कि पूरी तरह से नक्सल हैं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त के दिन लालकिले की प्राचीर से अपन संबोधन में कुछ खास लोगों की तरफ इशारा करते हुए “दिमागी नक्सली” शब्द का प्रयोग किया था जिसके बाद से सोशल मीडिया पर इसे लेकर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ सी आ गई है, जिन लोगों ने प्रधानमंत्री का इशारा समझा वे इसकी तारीफ कर रहे हैं लेकिन जो लोग अपने हिसाब से अर्ह निकल रहे हैं वे आदत एक मुताबिक पीएम मोदी और भाजपा पर हमलावर हैं, लेकिन इस बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर बड़ा अटैक किया है।
गुवाहाटी में मीडिया से बात करते हुए हिमंत बिश्वा सरमा ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व द्वारा 15 अगस्त को किये गए वंदेमातरम के अपमान पर टिप्पणी की , उन्होंने कहा चाहे सोनिया गांधी हों या राहुल गांधी, उन्होंने देश के खिलाफ काम करने का मिशन अपना लिया है। उन्होंने देश का माहौल खराब करने की ठान ली है।
कांग्रेस पर देश विरोधी गतिविधि करने के आरोप
‘वंदे मातरम’ के गायन के दौरान सोनिया गांधी का व्यवहार यह साफ कर देता है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो देश का क्या हाल होगा। ये लोग खुलेआम देश-विरोधी गतिविधियां कर रहे हैं, जैसे लोगों को विरोध-प्रदर्शन के लिए उकसाना और देश में अराजकता का माहौल बनाने के लिए कहना।
छत्तीसगढ़ में हुए नक्लसी हमले की दिलाई याद
असम के मुख्यमंत्री ने पूर्व गृह मंत्री पर बड़ा हमला करते हुए कहा जब पी चिदंबरम देश के गृह मंत्री थे तब विद्याचरण शुक्ला सहित कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को छत्तीसगढ़ में बम से उड़ा दिया गया था इसके बाद भी कांग्रेस ने नक्सलवाद को ख़त्म करने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई।
चिदंबरम के बयान की जाँच होनी चाहिए
हिमंत बिस्वा सरमा में कहा कि अब जब देश के गृह मंत्री रहे पी चिदंबरम ने खुद को दिमागी नक्सली कहा है, तो इस बात की जांच होनी चाहिए कि क्या उन्होंने देश के गृह मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान नक्सलवाद को खत्म करने के लिए जान-बूझकर कोई कदम नहीं उठाया। मुझे लगता है पी चिदंबरम दिमागी नक्सली नहीं, बल्कि पूरी तरह से नक्सल हैं।
देश में बने शांतिपूर्ण माहौल से कांग्रेस असहज है
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि हमारा देश नक्सल मुक्त होगा ये कल्पना किसी ने भी नहीं की थी पीएम मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में देश में बने शांतिपूर्ण माहौल बना है उससे कांग्रेस असहज है। कांग्रेस देश में अराजकता चाहती है और उसी का सहारा लेकर 2029 में सत्ता में आना चाहती है। इसलिए सत्ता पाने के लिए कांग्रेस जितना नीचे गिर अक्ती है उसकी प्रेक्टिस उनके नेताओं ने शुरू कर दी है
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