वैभव सूर्यवंशी ने पहले मैच में 14 बनाए! जानिए सचिन, विराट, रोहित और धोनी ने डेब्यू पर बनाए थे कितने रन
इंग्लैंड के साथ खेले गए दूसरे टी-20 मैच में वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका मिला. मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड स्टेडियम में इस युवा खिलाड़ी का सपना पूरा हुआ और इसी के साथ एक नया इतिहास रचा गया. वैभव अब भारत की ओर से इंटरनेशनल मैच खेलने वाले सबसे कम उम्र के क्रिकेटर बन गए हैं. मगर, अपने डेब्यू मैच में वैभव सूर्यवंशी कुछ खास कमाल नहीं दिखा सके और महज 14 रन बनाकर आउट हो गए. इसकी वजह से सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स उन्हें ट्रोल करने लगे. मगर, आगाज से अंदाम का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता... चूंकि, ऐसे तमाम दिग्गज खिलाड़ी हुए हैं, जिन्होंने अपने डेब्यू मैच में तो कुछ कमाल नहीं किया, लेकिन फिर आगे भारतीय क्रिकेट को इस मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका अदा की.
सचिन तेंदुलकर ने डेब्यू मैच में कितने रन बनाए
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???? Presenting T20I cap no. 122, Vaibhav Sooryavanshi ????#ENGvIND pic.twitter.com/hvOZdSN3Ow
वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए दूसरे टी-20 मैच में सिर्फ 15 साल और 99 दिन की उम्र में अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया और सचिन तेंदुलकर का 37 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया. सचिन ने 16 साल और 205 दिन की उम्र में पाकिस्तान के खिलाफ 15 नवंबर 1989 में डेब्यू किया था. मगर, अपने डेब्यू मैच में सचिन कुछ खास नहीं कर सके थे. वह पहली पारी में 15 रन बनाकर ही आउट हो गए थे
विराट कोहली ने डेब्यू पर कितने रन बनाए
भारतीय पूर्व कप्तान विराट कोहली ने 18 अगस्त 2008 को श्रीलंका के खिलाफ दांबुला में अपना पहला वनडे मैच खेला था. विराट कोहली अपने डेब्यू मैच में सिर्फ 12 रन बनाकर ही आउट हो गए थे.
रोहित शर्मा ने पहली पारी में कितने रन बनाए
रोहित शर्मा ने वनडे (ODI) डेब्यू पर कोई रन नहीं बनाए थे, क्योंकि उन्हें 2007 में आयरलैंड के खिलाफ अपने पहले मैच में बल्लेबाजी करने का मौका नहीं मिला था. मगर, जब उन्हें बल्लेबाजी का मौका मिला, तो पहली पारी में भी वह कुछ खास नहीं कर पाए थे और महज 8 रन बनाकर ही अपना विकेट गंवा बैठे थे.
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A proud moment as Vaibhav Sooryavanshi receives his #TeamIndia cap from Vice-Captain Tilak Varma ????
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एमएस धोनी ने डेब्यू मैच में कितने रन बनाए
एमएस धोनी ने अपने पहले इंटरनेशनल मैच में बिना खाता खोले ही विकेट गंवा बैठे थे. वह 23 दिसंबर 2004 को बांग्लादेश के खिलाफ चटगांव में खेले गए इस मैच की अपनी पहली ही गेंद पर रन आउट हो गए थे. जी हां, भारत को 3 आईसीसी ट्रॉफी दिलाने वाले कप्तान माही के करियर की शुरुआत डक से हुई थी.
वैभव सूर्यवंशी ने डेब्यू पर किया पोस्ट
इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू मैच खेलने के बाद वैभव सूर्यवंशी ने सोशल मीडिया पर एक स्पेशल पोस्ट शेयर किया. इस पोस्ट में उन्होंने एक, दो या तीन नहीं बल्कि 10 फोटोज शेयर कीं. इसमें उन्होंने कैप्शन में लिखा- "उस सपने को जी रहा हूं जिसे हम सबने मिलकर देखा था. उन सभी का शुक्रिया जो उतार-चढ़ाव के समय में भी मेरे साथ खड़े रहे. आभारी हूं."
बताते चलें, इंग्लैंड और भारत के बीच तीसरा टी-20 मैच 7 जुलाई को खेला जाएगा. ये मैच भारतीय समयानुसार रात 10 बजे शुरू होगा. ऐसे में मुकाबला देखने के लिए भारतीय फैंस को अपनी नींद खराब करनी पड़ेगी. वहीं, टॉस के लिए दोनों कप्तान 9.30 बजे मैदान पर उतरेंगे.
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अमेरिका चंद्रमा पर फिर से पहुंचने की रेस में चीन से कर रहा प्रतिस्पर्धा, टाइमलाइन अब महीनों में तय : नासा प्रमुख
वाशिंगटन, 6 जुलाई (आईएएनएस)। नासा के प्रशासक जैरेड आइजैकमैन ने कहा है कि चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को दोबारा भेजने की होड़ में अमेरिका एक बार फिर चीन के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अब यह मुकाबला सालों नहीं, बल्कि महीनों में तय होगा, क्योंकि दोनों देश पृथ्वी से परे मानव की स्थायी मौजूदगी स्थापित करने की अपनी योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।
अमेरिका की आजादी की 250वीं सालगिरह के मौके पर सीबीएस के फेस द नेशन पर एक इंटरव्यू में इसाकमैन ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि बीजिंग चांद पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने का इरादा रखता है, इसलिए वाशिंगटन के लिए जल्दी कदम उठाना जरूरी है।
उन्होंने कहा, इसमें कोई शक नहीं है। जैसे, हम अभी अंतरिक्ष की रेस में हैं और चीनी बहुत तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं। चीनी अपने टाइकोनॉट्स (चीन के अंतरिक्ष यात्रियों को दिया गया एक विशेष नाम) चांद पर उतारेंगे। इसमें कोई शक नहीं है। सवाल यह है कि क्या अमेरिका उनसे पहले वापस आएगा?
आइजैकमैन ने कहा कि ट्रंप सरकार ने नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम के लिए ऐतिहासिक निवेश देकर चांद पर खोज को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना दिया है।
उन्होंने कहा, हम वापस जा रहे हैं। यह जबरदस्त होगा। उन्होंने आगे कहा कि आर्टेमिस III अगले साल के लिए प्लान किया गया है और उसके बाद 2028 में आर्टेमिस IV होगा, जब अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी की कक्षा में नए लैंडिंग सिस्टम की टेस्टिंग के बाद चांद की सतह पर उतरने की उम्मीद है।
चीन की तरफ से पेश रणनीतिक चुनौती को लेकर आइजैकमैन ने कहा, उन्होंने कहा कि 2030 से पहले, हम कह रहे हैं कि 2028 के आखिर में हम लैंडिंग का टारगेट बना रहे हैं। यह महीनों का समय है, सालों का नहीं।
अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर वापस भेजने के अलावा, नासा का लंबे समय का मकसद चांद पर एक स्थायी मौजूदगी बनाना है, जो मंगल ग्रह पर भविष्य के मिशन के लिए एक सीढ़ी का काम करेगा।
आइजैकमैन ने कहा कि चांद पर बेस के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर 2027 की शुरुआत में आना शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि 2028 तक, अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर उनके लिए पहले से ही सामान मिल जाना चाहिए, जिसमें एक लूनर टेरेन व्हीकल और स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर की शुरुआत शामिल है।
उन्होंने कहा, 2030 के दशक की शुरुआत में, चांद अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन जैसा होगा। आपके पास ऐसे क्रू होंगे जो काफी लंबे समय तक वहां रहेंगे, क्योंकि हम उस माहौल में सीखते हैं और मंगल ग्रह के लिए तैयारी करते हैं।
नासा चीफ ने अमेरिका के स्पेस प्रोग्राम में प्राइवेट कंपनियों की बढ़ती भूमिका का भी बचाव किया और कहा कि कमर्शियल लॉन्च प्रोवाइडर्स ने स्पेस एक्सप्लोरेशन की इकोनॉमिक्स को बदल दिया है।
नासा के पुराने हो रहे स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप को बचाने के एक एक्सपेरिमेंटल मिशन का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि काफी सस्ते कमर्शियल लॉन्च उन साइंटिफिक मिशन की लाइफ बढ़ा सकते हैं जिनके लिए पहले महंगे रिप्लेसमेंट की जरूरत पड़ती थी।
इसाकमैन ने ब्लू ओरिजिन के न्यू ग्लेन रॉकेट के हालिया लॉन्च फेलियर के बाद हुई देरी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नासा कंपनी को जांच में मदद करने के साथ यह सुनिश्चित कर रहा है कि भविष्य के लूनर मिशन पर काम जारी रहे।
उन्होंने कहा, वे इसे हल कर लेंगे। नासा मदद के लिए है।
आर्टेमिस प्रोग्राम नासा की सबसे बड़ी कोशिश है ताकि अपोलो युग के बाद पहली बार इंसानों को चांद पर वापस भेजा जा सके। अपोलो मिशन के उलट, आर्टेमिस का मकसद अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और कमर्शियल स्पेस कंपनियों के जरिए चांद की सतह पर इंसानों की लगातार मौजूदगी बनाना है और आखिर में अंतरिक्ष यात्रियों को मंगल ग्रह पर भेजना है।
--आईएएनएस
केके/पीएम
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