भारतीय शेयर बाजार ने बीते सप्ताह मजबूत प्रदर्शन के साथ कारोबार का समापन किया। घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े सकारात्मक आंकड़ों और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बढ़ी उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। सप्ताह के दौरान बाजार में कुछ उतार-चढ़ाव जरूर देखने को मिला, लेकिन अंतिम कारोबारी दिनों में खरीदारी बढ़ने से प्रमुख सूचकांक अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सप्ताह के अंत में निफ्टी लगभग 0.90 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,270.80 अंक पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में 0.86 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 77,763.91 अंक पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतकों ने बाजार को सहारा दिया है। इसमें वस्तु एवं सेवा कर संग्रह, औद्योगिक उत्पादन तथा विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों की निरंतर वृद्धि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
गौरतलब है कि अमेरिका के श्रम बाजार से अपेक्षा से कमजोर आंकड़े आने के बाद यह संभावना बढ़ी है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक भविष्य में ब्याज दरों को लेकर पहले की तुलना में नरम रुख अपना सकता है। इससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और उभरते बाजारों, जिनमें भारत भी शामिल है, के प्रति सकारात्मक माहौल बना है।
बाजार विशेषज्ञ और एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर का कहना है कि अगले सप्ताह निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर रहेगी। यदि दोनों देशों के बीच किसी औपचारिक समझौते की दिशा में प्रगति होती है तो वैश्विक बाजारों को राहत मिल सकती है। वहीं, यदि बातचीत में कोई बाधा आती है तो भू-राजनीतिक तनाव दोबारा बढ़ सकता है, जिसका असर निवेशकों के भरोसे पर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल लगभग 68 से 69 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर बनी हुई हैं। यह स्थिति भारत के लिए सकारात्मक मानी जा रही है क्योंकि इससे महंगाई पर दबाव कम रहने और विदेशी व्यापार संतुलन को मजबूती मिलने की संभावना बढ़ती है।
रिलिगेयर ब्रोकिंग के अनुसंधान विभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजीत मिश्रा का मानना है कि भारतीय बाजार को मजबूत घरेलू आर्थिक माहौल और कंपनियों की आय में सुधार की उम्मीद का लाभ मिल रहा है। उनके अनुसार अब कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने निवेशकों को मजबूत वित्तीय स्थिति और लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों पर ध्यान देने की सलाह दी है। उनके अनुसार बैंकिंग, औषधि, रियल एस्टेट और रक्षा क्षेत्र फिलहाल बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहे हैं।
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार सेंसेक्स के लिए 78,100 से 78,200 अंक का दायरा निकटतम बाधा माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो इसमें 79,000 अंक तक बढ़ने की संभावना बन सकती है। वहीं नीचे की ओर 77,500 से 77,400 अंक का स्तर महत्वपूर्ण सहारा माना जा रहा है।
निफ्टी के लिए चॉइस ब्रोकिंग के तकनीकी विश्लेषक आकाश शाह का कहना है कि 24,050 से 24,150 अंक का दायरा निकटतम सहारा रहेगा। वहीं 24,421 अंक का स्तर पहली बड़ी बाधा माना जा रहा है। यदि निफ्टी इस स्तर को पार कर लेता है तो 24,600 अंक तक तेजी देखने को मिल सकती है।
बैंक निफ्टी की बात करें तो विशेषज्ञों के अनुसार 57,400 से 57,500 अंक का स्तर मजबूत सहारा बना हुआ है। वहीं 58,400 से 58,500 अंक के ऊपर स्थायी बढ़त मिलने पर सूचकांक 58,900 और उसके बाद 59,300 अंक की ओर बढ़ सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि निवेशकों को बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव को देखते हुए सोच-समझकर निवेश करना चाहिए और जोखिम प्रबंधन का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
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सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी कथित सामग्री और भुगतान वाले विज्ञापनों के मामले में केंद्र सरकार ने मेटा को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। साथ ही ऐसी सभी आपत्तिजनक सामग्री को तुरंत हटाने और भविष्य में इस तरह की घटनाएं रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने शनिवार को मेटा के स्वामित्व वाले सामाजिक माध्यम मंच इंस्टाग्राम को निर्देश दिया कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री तक पहुंच आसान बनाने वाली सभी सामग्री को तत्काल हटाया जाए। मंत्रालय ने यह भी पूछा है कि ऐसी सामग्री और विज्ञापनों को मंच पर स्वीकृति कैसे मिली और भविष्य में इन्हें रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
बता दें कि यह कार्रवाई एक अंतरराष्ट्रीय समाचार संस्था की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद की गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि मेटा की सिफारिश प्रणाली कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो और सामग्री को बढ़ावा दे रही थी। जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ भुगतान वाले विज्ञापन ऐसे शब्दों का उपयोग कर रहे थे, जो लोगों को एक संदेश साझा करने वाले दूसरे मंच पर ले जाते थे, जहां इस तरह की अवैध सामग्री कथित रूप से बेची जा रही थी।
सरकार ने अपने नोटिस में विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई है कि यदि किसी तकनीकी प्रणाली के कारण इस तरह की सामग्री अधिक लोगों तक पहुंच रही है तो यह बेहद गंभीर विषय है। मंत्रालय ने मेटा से पूछा है कि आरोप सामने आने के बाद अब तक क्या सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे।
गौरतलब है कि सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो मेटा केवल यह कहकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकता कि सामग्री किसी तीसरे पक्ष ने डाली थी। विशेष रूप से यदि मामला भुगतान वाले विज्ञापनों का है, जिनसे मंच को आर्थिक लाभ मिलता है, तो संबंधित कंपनी की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, यदि मेटा निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब देने में विफल रहता है तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण कानून के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। सरकार ने इस मामले में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।
उधर, मेटा की ओर से जारी आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा गया है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी किसी भी सामग्री या उसके प्रचार के प्रति कंपनी की शून्य सहनशीलता की नीति है। कंपनी का कहना है कि वह एआई आधारित उन्नत तकनीक की मदद से ऐसी सामग्री और उससे जुड़े खातों की पहचान कर उन्हें हटाने का लगातार प्रयास करती है।
मेटा के अनुसार, दुनिया भर में उसके अरबों यूजर्स हैं और अपराधी लगातार पहचान से बचने के नए तरीके अपनाते रहते हैं। इसी कारण विशेषज्ञों की टीमें सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रही हैं, नई तकनीक विकसित की जा रही है, आपत्तिजनक वेबसाइटों के संपर्क रोके जा रहे हैं और अन्य कंपनियों के साथ भी आवश्यक सूचनाएं साझा की जा रही हैं ताकि इस तरह के अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
बता दें कि भारत का सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम बच्चों को यौन रूप से स्पष्ट सामग्री में दिखाने, उसका प्रकाशन करने या उसे डिजिटल माध्यम से प्रसारित करने पर कड़ी सजा का प्रावधान करता है। इस अधिनियम की धारा 67बी विशेष रूप से बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी डिजिटल सामग्री को अपराध की श्रेणी में रखती है। ऐसे में इस मामले की जांच और मेटा की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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