Explainer: क्या आज भी धरती पर जिंदा हैं महाभारत के महान योद्धा अश्वत्थामा? जानिए श्राप और रहस्यमयी कहानियों का सच
Mahabharata Mystery: महाभारत केवल एक युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि यह धर्म, कर्म, न्याय और जीवन के गहरे सिद्धांतों को समझाने वाला महान ग्रंथ भी है. इस महाकाव्य के कई पात्र आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं. इन्हीं में से एक हैं गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा. सदियों से यह सवाल लोगों के मन में उठता रहा है कि क्या अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं? क्या उन्हें सच में अमर होने का श्राप मिला था? क्या भारत के जंगलों और प्राचीन मंदिरों में उनके दिखने की कहानियां सच हैं या केवल लोककथाएं? आइए इस रहस्य को धार्मिक ग्रंथों, पौराणिक मान्यताओं और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर समझते हैं.
कौन थे अश्वत्थामा?
अश्वत्थामा महाभारत के प्रसिद्ध गुरु द्रोणाचार्य और उनकी पत्नी कृपी के पुत्र थे. कृपी, कृपाचार्य की बहन थीं. अश्वत्थामा बचपन से ही असाधारण प्रतिभा वाले योद्धा थे. उन्होंने अपने पिता से शस्त्र विद्या सीखी और उन्हें दिव्य अस्त्रों का भी ज्ञान प्राप्त था. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अश्वत्थामा के माथे पर जन्म से ही एक दिव्य मणि थी. कहा जाता है कि इस मणि के कारण उन्हें भूख, प्यास, रोग और सामान्य भय से सुरक्षा मिलती थी. यही कारण था कि उन्हें बेहद शक्तिशाली योद्धाओं में गिना जाता था.
महाभारत युद्ध में अश्वत्थामा की भूमिका
कुरुक्षेत्र के युद्ध में अश्वत्थामा ने कौरव पक्ष से युद्ध किया. वे अपने पिता द्रोणाचार्य के साथ कौरव सेना के प्रमुख योद्धाओं में शामिल थे. जब युद्ध के दौरान द्रोणाचार्य को यह विश्वास दिलाया गया कि उनका पुत्र अश्वत्थामा मारा गया है, तब उन्होंने शस्त्र त्याग दिए. इसी अवसर का लाभ उठाकर उनका वध कर दिया गया. पिता की मृत्यु से अश्वत्थामा क्रोध और प्रतिशोध की आग में जल उठे. उन्होंने युद्ध समाप्त होने के बाद रात के समय पांडवों के शिविर पर हमला कर दिया. इस हमले में उन्होंने सो रहे द्रौपदी के पांचों पुत्रों का वध कर दिया. यह घटना महाभारत की सबसे दुखद घटनाओं में से एक मानी जाती है.
श्रीकृष्ण ने क्यों दिया था श्राप?
जब पांडवों को इस घटना का पता चला तो उन्होंने अश्वत्थामा को पकड़ लिया. उस समय अश्वत्थामा ने अपने बचाव के लिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया. इसके जवाब में अर्जुन ने भी ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया. महर्षि व्यास के हस्तक्षेप के बाद अर्जुन ने अपना अस्त्र वापस ले लिया, लेकिन अश्वत्थामा ऐसा नहीं कर सके. उन्होंने ब्रह्मास्त्र को अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ की ओर मोड़ दिया, ताकि पांडव वंश समाप्त हो जाए. भगवान श्रीकृष्ण ने अपने दिव्य प्रभाव से गर्भ में पल रहे परीक्षित की रक्षा की। इसके बाद उन्होंने अश्वत्थामा को कठोर श्राप दिया.
क्या था अश्वत्थामा को मिला श्राप?
महाभारत के अनुसार, श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा के माथे से उनकी दिव्य मणि निकलवा ली. इसके बाद उन्हें श्राप दिया कि वे हजारों वर्षों तक धरती पर भटकते रहेंगे. मान्यता है कि इस दौरान उनके शरीर पर घाव बने रहेंगे. उन्हें किसी भी स्थान पर स्थायी शांति नहीं मिलेगी. वे लोगों से दूर, अकेले और कष्टमय जीवन बिताने के लिए विवश रहेंगे. यही कारण है कि कई लोग उन्हें "अमर" नहीं, बल्कि "श्रापित अमर" मानते हैं.
क्या अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं?
यही सबसे बड़ा प्रश्न है, जिसका स्पष्ट उत्तर आज तक किसी के पास नहीं है. धार्मिक मान्यताओं में माना जाता है कि अश्वत्थामा अभी भी जीवित हैं और पृथ्वी पर विचरण कर रहे हैं. भारत के कई हिस्सों में समय-समय पर उनके दिखाई देने के दावे किए जाते रहे हैं. मध्य प्रदेश के असीरगढ़ किले, कुछ प्राचीन शिव मंदिरों और घने जंगलों से जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित हैं. कुछ लोग दावा करते हैं कि उन्होंने किसी रहस्यमयी व्यक्ति को मंदिर में पूजा करते देखा, जिसे अश्वत्थामा बताया गया. हालांकि इन दावों की पुष्टि किसी वैज्ञानिक या ऐतिहासिक प्रमाण से नहीं हुई है. इसलिए इन्हें सत्य नहीं माना जा सकता.
अश्वत्थामा और सप्त चिरंजीवी
हिंदू धर्म में सात ऐसे महापुरुषों का उल्लेख मिलता है जिन्हें सप्त चिरंजीवी कहा जाता है. इनमें अश्वत्थामा का भी नाम शामिल है . मान्यता के अनुसार ये सात चिरंजीवी हैं. अश्वत्थामा, महाबली, वेदव्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम. इनके बारे में धार्मिक विश्वास है कि ये विशेष उद्देश्य से पृथ्वी पर विद्यमान हैं. हालांकि इनके अस्तित्व को लेकर धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक प्रमाण अलग-अलग विषय हैं.
क्या विज्ञान इस दावे को स्वीकार करता है?
आधुनिक विज्ञान किसी व्यक्ति के हजारों वर्षों तक जीवित रहने की पुष्टि नहीं करता. अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि महाभारत काल का कोई व्यक्ति आज भी जीवित है. इतिहासकार भी अश्वत्थामा के जीवित होने के दावों को प्रमाणित नहीं मानते. उनके अनुसार ये लोकमान्यताओं और धार्मिक परंपराओं का हिस्सा हैं.
अश्वत्थामा की कहानी हमें क्या सिखाती है?
अश्वत्थामा का जीवन केवल वीरता की कहानी नहीं है. यह हमें यह भी सिखाता है कि क्रोध और प्रतिशोध इंसान से ऐसे निर्णय करवा सकते हैं, जिनका परिणाम जीवनभर भुगतना पड़ता है. उन्होंने असाधारण शक्ति और ज्ञान होने के बावजूद क्रोध में ऐसा कदम उठाया, जिसने उन्हें सम्मान नहीं बल्कि श्राप दिलाया. महाभारत का यह प्रसंग बताता है कि शक्ति का उपयोग हमेशा धर्म और न्याय के लिए होना चाहिए.
आस्था और इतिहास के बीच जानें अंतर
भारत की संस्कृति में महाभारत और उसके पात्रों का विशेष स्थान है. अश्वत्थामा से जुड़ी कहानियां लोगों की आस्था और लोकविश्वास का हिस्सा हैं. वहीं इतिहास और विज्ञान किसी दावे को स्वीकार करने से पहले ठोस प्रमाण की मांग करते हैं. इसलिए यह कहना कि अश्वत्थामा आज भी निश्चित रूप से जीवित हैं, उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर संभव नहीं है. लेकिन यह भी सच है कि उनकी कथा आज भी करोड़ों लोगों के लिए जिज्ञासा, आस्था और रहस्य का विषय बनी हुई है.
महिलाओं के नेतृत्व में विकास को आगे बढ़ाने के लिए भारत में ब्रिक्स की बैठक
नई दिल्ली, 5 जुलाई (आईएएनएस)। भारत इस साल अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 6-7 जुलाई को केरल के कोच्चि में महिला वर्किंग ग्रुप (डब्ल्यूडब्ल्यूजी) की बैठक की मेजबानी करेगा। महिला वर्किंग ग्रुप की बैठक सदस्य देशों को महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को आगे बढ़ाने वाले मुद्दों पर चर्चा करने और आम सहमति बनाने का अवसर प्रदान करेगी।
रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, कोच्चि की बैठक से 8-9 जुलाई को होने वाली ब्रिक्स महिला मंत्री-स्तरीय बैठक के लिए एक मजबूत आधार तैयार होने की उम्मीद है। यह बैठक व्यावहारिक सहयोग और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के प्रति ब्रिक्स सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता को दोहराएगी।
बयान में कहा गया है, ब्रिक्स सदस्य देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी सभी क्षेत्रों में महिलाओं के सशक्तिकरण और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने और साझा प्राथमिकताओं पर सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक साथ आएंगे।
ब्रिक्स संगठन में कुल 11 देश ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं। ये सभी मिलकर वैश्विक जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत योगदान देते हैं।
ब्रिक्स देशों में दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी रहती है। इस विशाल जनसंख्या में महिलाओं का राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विकास हर क्षेत्र को प्रभावित करता है, जिससे महिला ट्रैक ब्रिक्स 2026 में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गया है।
यह वर्किंग ग्रुप बैठक पहले आयोजित की गई तीन वर्चुअल प्रारंभिक बैठकों के दौरान हुई व्यापक चर्चाओं पर आधारित है। इन चर्चाओं ने सदस्य देशों को कोच्चि में होने वाली बैठकों से पहले बातचीत को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाया है।
2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण थीम पर आधारित है। ब्रिक्स महिला ट्रैक ने चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है, जिनमें महिलाओं की शासन और नेतृत्व में भागीदारी, डिजिटल और वित्तीय समावेशन, उद्यमिता और कौशल विकास और जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा व पोषण में महिलाओं की भूमिका शामिल है।
--आईएएनएस
डीसीएच/
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