15 जून को ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को लिखी थी चिट्ठी, क्या है चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा कनेक्शन?
Bengal Political Twist: तृणमूल कांग्रेस में घमासान के बीच ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि सिर्फ अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओब्रायन ही किसी बातचीत के लिए अधिकृत हैं. चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे से बढ़ीं ममता की मुश्किलें. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
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Explainer: एडल्ट्रेटेड फ्यूल क्या होता है? जो इंफ्लूएंसर की कार में मिला; जानिए कार, इंजन और माइलेज पर इसका कितना पड़ता है असर
Explainer: देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अक्सर एडल्ट्रेटेड फ्यूल (Adulterated Fuel) यानी मिलावटी ईंधन का मुद्दा चर्चा में रहता है. कई बार वाहन चालकों को शिकायत रहती है कि किसी खास पेट्रोल पंप से ईंधन भरवाने के बाद उनकी कार का माइलेज कम हो गया, इंजन की आवाज बदल गई या गाड़ी पहले जैसी स्मूद नहीं चल रही. ऐसे मामलों में मिलावटी ईंधन एक बड़ी वजह हो सकता है. दरअसल हाल में एक इंफ्लूएंसर की कार में ये कह कर वायरल किया गया कि इनकी कार एथेनॉल मिलाने की वजह से खराब हो रह है. हालांक जांच में पता चला कि उनकी कार में एडल्ट्रेटेड फ्यूल डाला गया था. इसके बाद ये चर्चा शुरू हो गई कि आखिर एडल्ट्रेटेड फ्यूल होता क्या है?
हालांकि सभी पेट्रोल पंपों पर मिलने वाला ईंधन मिलावटी नहीं होता, लेकिन यदि किसी वाहन में लंबे समय तक खराब गुणवत्ता वाला ईंधन इस्तेमाल किया जाए तो इससे इंजन की कार्यक्षमता, माइलेज और वाहन के कई महत्वपूर्ण पार्ट्स प्रभावित हो सकते हैं. आइए विस्तार से समझते हैं कि एडल्ट्रेटेड फ्यूल क्या होता है और यह आपकी कार को किस तरह नुकसान पहुंचा सकता है.
क्या होता है एडल्ट्रेटेड फ्यूल?
एडल्ट्रेटेड फ्यूल का मतलब है ऐसा पेट्रोल या डीजल, जिसमें उसकी गुणवत्ता और मात्रा बढ़ाने या लागत कम करने के लिए दूसरे सस्ते पदार्थ मिला दिए जाएं. यह मिलावट ईंधन के मूल रासायनिक गुणों को बदल देती है, जिससे उसका प्रदर्शन प्रभावित होता है.
मिलावट कई प्रकार से की जा सकती है. कुछ मामलों में कम गुणवत्ता वाले हाइड्रोकार्बन, सॉल्वेंट या अन्य ज्वलनशील पदार्थ मिलाए जाते हैं. इससे ईंधन देखने में सामान्य लग सकता है, लेकिन उसकी गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं रहती.
मिलावटी ईंधन से कार को कैसे होता है नुकसान?
1. इंजन की परफॉर्मेंस होती है कमजोर
कार का इंजन एक निश्चित गुणवत्ता वाले ईंधन पर काम करने के लिए डिजाइन किया जाता है. जब उसमें मिलावटी ईंधन डाला जाता है, तो दहन (Combustion) की प्रक्रिया प्रभावित होती है.
इसके कारण इंजन में झटके महसूस हो सकते हैं, एक्सीलरेशन कम हो सकता है और गाड़ी चलाते समय पहले जैसी स्मूदनेस नहीं मिलती.
2. माइलेज में आ सकती है गिरावट
अधिकांश वाहन मालिक सबसे पहले माइलेज में कमी महसूस करते हैं. यदि ईंधन पूरी तरह और सही तरीके से नहीं जलता, तो समान दूरी तय करने के लिए इंजन को अधिक ईंधन की आवश्यकता पड़ती है. परिणामस्वरूप प्रति लीटर मिलने वाला माइलेज घट सकता है.
हालांकि माइलेज कम होने के पीछे केवल ईंधन ही जिम्मेदार नहीं होता. टायर प्रेशर, ड्राइविंग स्टाइल, ट्रैफिक और वाहन की सर्विसिंग भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं.
3. फ्यूल इंजेक्टर हो सकते हैं प्रभावित
आधुनिक कारों में फ्यूल इंजेक्टर बेहद सटीक तरीके से ईंधन को इंजन तक पहुंचाते हैं. मिलावटी ईंधन में मौजूद अशुद्धियां या अवांछित कण इंजेक्टर में जमा होकर उसकी कार्यक्षमता कम कर सकते हैं. इससे ईंधन का सही स्प्रे नहीं हो पाता और इंजन की क्षमता प्रभावित होने लगती है.
4. स्पार्क प्लग और इंजन में कार्बन जमा होना
पेट्रोल इंजन वाली कारों में खराब गुणवत्ता वाला ईंधन स्पार्क प्लग पर कार्बन जमा कर सकता है. धीरे-धीरे यह जमा परत इंजन की इग्निशन प्रक्रिया को प्रभावित करती है, जिससे इंजन मिसफायर, स्टार्टिंग में परेशानी और शक्ति में कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं.
5. फ्यूल फिल्टर जल्दी हो सकता है खराब
फ्यूल फिल्टर का काम ईंधन में मौजूद गंदगी और कणों को रोकना होता है. यदि लगातार मिलावटी ईंधन इस्तेमाल किया जाए, तो फिल्टर सामान्य से जल्दी चोक हो सकता है. इसके बाद इंजन तक पर्याप्त मात्रा में ईंधन नहीं पहुंचता और वाहन की परफॉर्मेंस प्रभावित होने लगती है.
6. लंबे समय में बढ़ सकता है मेंटेनेंस खर्च
यदि वाहन लगातार खराब गुणवत्ता वाले ईंधन पर चलता रहे, तो छोटे-छोटे नुकसान धीरे-धीरे बड़े खर्च में बदल सकते हैं. फ्यूल इंजेक्टर की सफाई, फिल्टर बदलना, स्पार्क प्लग बदलना और कई मामलों में इंजन रिपेयर तक की जरूरत पड़ सकती है. इसलिए थोड़े पैसे बचाने के चक्कर में बाद में हजारों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं.
क्या डीजल गाड़ियों पर भी पड़ता है असर?
बिल्कुल. आधुनिक डीजल इंजन बेहद हाई-प्रेशर फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम पर आधारित होते हैं. ऐसे इंजनों में ईंधन की गुणवत्ता बहुत महत्वपूर्ण होती है.
यदि डीजल में मिलावट हो, तो हाई-प्रेशर फ्यूल पंप, इंजेक्टर और अन्य महंगे कंपोनेंट्स पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. इससे वाहन की मरम्मत का खर्च काफी बढ़ सकता है.
कैसे पहचानें कि ईंधन मिलावटी हो सकता है?
हर बार केवल देखकर मिलावटी ईंधन की पहचान करना संभव नहीं होता, लेकिन कुछ संकेत इस ओर इशारा कर सकते हैं...
- गाड़ी का माइलेज अचानक कम हो जाना.
- इंजन से असामान्य आवाज आना.
- एक्सीलरेशन में कमी महसूस होना.
- इंजन का बार-बार बंद होना.
- स्टार्ट होने में परेशानी आना.
- चेक इंजन लाइट का जलना.
- धुएं की मात्रा सामान्य से अधिक होना.
यदि ईंधन भरवाने के तुरंत बाद ये समस्याएं शुरू हों, तो वाहन की जांच कराना बेहतर होता है.
मिलावटी ईंधन से कैसे बचें?
भरोसेमंद पेट्रोल पंप से ही ईंधन भरवाएं, हमेशा अधिकृत और अच्छी प्रतिष्ठा वाले पेट्रोल पंपों का चयन करें. नियमित रूप से एक ही विश्वसनीय पंप से ईंधन भरवाने पर गुणवत्ता को लेकर भरोसा बढ़ता है.
रसीद जरूर लें
ईंधन भरवाने के बाद हमेशा बिल या रसीद लें. यदि बाद में कोई शिकायत करनी पड़े तो यह महत्वपूर्ण प्रमाण बन सकती है.
अचानक बदलाव पर ध्यान दें
यदि ईंधन भरवाने के बाद कार का व्यवहार अचानक बदल जाए, तो इसे नजरअंदाज न करें.
समय पर सर्विस कराएं
नियमित सर्विसिंग से इंजन, फ्यूल फिल्टर और इंजेक्टर की स्थिति सही बनी रहती है और किसी भी समस्या का जल्दी पता चल जाता है.
जरूरत पड़ने पर शिकायत करें
यदि किसी पेट्रोल पंप पर ईंधन की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, तो संबंधित ऑयल मार्केटिंग कंपनी या उपभोक्ता शिकायत प्रणाली के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. इससे जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है.
क्या एक बार मिलावटी ईंधन भरने से कार खराब हो जाती है?
आमतौर पर ऐसा नहीं होता. यदि गलती से एक बार मिलावटी ईंधन भर गया हो, तो जरूरी नहीं कि कार को तुरंत गंभीर नुकसान हो जाए. लेकिन यदि लंबे समय तक लगातार खराब गुणवत्ता वाला ईंधन इस्तेमाल किया जाए, तो इंजन और फ्यूल सिस्टम पर इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगता है.
यदि ईंधन भरवाने के बाद कार में असामान्य लक्षण दिखें, तो अधिक देर तक वाहन चलाने के बजाय किसी अधिकृत सर्विस सेंटर पर जांच कराना समझदारी होगी.
थोड़ी सी सावधानी, बड़े नुकसान से बचाएगी
एडल्ट्रेटेड फ्यूल केवल वाहन के माइलेज को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि इंजन, फ्यूल इंजेक्टर, फिल्टर, स्पार्क प्लग और पूरे फ्यूल सिस्टम पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है. शुरुआत में यह समस्या मामूली लग सकती है, लेकिन लगातार खराब गुणवत्ता वाला ईंधन इस्तेमाल करने से मेंटेनेंस खर्च बढ़ने और वाहन की उम्र कम होने का खतरा रहता है.
इसलिए हमेशा विश्वसनीय पेट्रोल पंप से ईंधन भरवाएं, वाहन की नियमित सर्विस कराएं और यदि माइलेज या इंजन की कार्यक्षमता में अचानक बदलाव दिखे तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत जांच कराएं. थोड़ी-सी सावधानी न केवल आपकी कार की परफॉर्मेंस बनाए रखेगी, बल्कि लंबे समय में अनावश्यक खर्च से भी बचाएगी.
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