Explainer: बॉलीवुड का करोड़ों का इंश्योरेंस गेम: चेहरे, आवाज और बॉडी का बीमा क्यों कराते हैं स्टार्स? जानिए पूरा सिस्टम
How Bollywood Insurance Works: इंडियन फिल्म इंडस्ट्री अब सिर्फ एंटरटेनमेंट का जरिया नहीं है, बल्कि यह हजारों करोड़ रुपये का बड़ा बिजनेस बन चुका है. आज किसी बड़ी फिल्म का बजट 500 करोड़ से 1000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है. ऐसे में किसी भी एक्टर या एक्ट्रेस की चोट, बीमारी या किसी एक्सीटेंड की वजह से शूटिंग रुक जाए, तो प्रोड्यूसर को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. यही वजह है कि अब बॉलीवुड में इंश्योरेंस यानी बीमा सिर्फ आर्टिस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी फिल्म, शूटिंग, सेट, उपकरण और डिजिटल डेटा तक का इंश्योरेंस कराया जाता है. इसी सिस्टम को फिल्म इंडस्ट्री का सबसे स्ट्रॉन्ग फाइनेंशिलय सिक्योरिटी कवच माना जाता है.
स्टार्स अपनी बॉडी का बीमा क्यों कराते हैं?
आम लोगों के लिए सबसे बड़ी प्रोपर्टी उनका घर, गाड़ी या लाइफ होती है, लेकिन फिल्मी स्टार्स के लिए उनका फेस, आवाज, बॉडी और उनकी पहचान ही सबसे बड़ी कमाई का जरिया होती है. यदि किसी एक्टर के चेहरे पर बड़ी चोट लग जाए, किसी सिंगर की आवाज खराब हो जाए या किसी डांसर के पैर में इंज्युरी हो जाए, तो उसका सीधा असर उनके करियर पर पड़ सकता है. यही वजह है कि कई सेलिब्रिटी अपनी बॉडी के खास हिस्सों का बीमा कराते हैं. इस तरह का बीमा केवल कलाकार को ही नहीं, बल्कि उन प्रोड्यूसर को भी सिक्योरिटी देता है जिन्होंने उस आर्टिस्ट के साथ करोड़ों रुपये की फिल्में साइन की होती हैं. दुनिया की बड़ी बीमा कंपनियां और इंडिया की कुछ विशेष जनरल इंश्योरेंस कंपनियां ऐसी कस्टम पॉलिसी देती है.
किन बॉलीवुड स्टार्ट ने कराया है बॉडी पार्ट इंश्योरेंस?
फिल्म इंडस्ट्री में कई फेमस उदाहरण सामने आ चुके हैं. अमिताभ बच्चन की सबसे बड़ी पहचान उनकी दमदार आवाज है. इसी वजह से उनकी आवाज को स्पेशल सुरक्षा दी गई है. आज एआई और डीपफेक तकनीक के दौर में आवाज की सेफ्टी पहले से ज्यादा अहम मानी जा रही है. जॉन अब्राहम ने फिल्म 'दोस्ताना' के बाद अपने फिट शरीर, खासकर ग्लूट्स का लगभग 10 करोड़ रुपये का इंश्योरेंस कराया था. उन्होंने कई इंटरव्यू में कहा था कि उनकी बॉडी उनके काम के लिए बहुत अहम है. वहीं, स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने भी अपनी आवाज का बीमा कराया हुआ था ताकि किसी मेडिकल सिचुएशन में उन्हें फाइनेंशियल सिक्योरिटी मिल सके. इतना ही नहीं बताया जाता है कि प्रियंका चोपड़ा ने भी अपने चेहरे का बीमा करा रखा है.
करोड़ों के बीमा की रकम कैसे तय होती है?
किसी सेलिब्रिटी के बॉडी के हिस्से का बीमा करना नॉर्मल बीमा की तरह नहीं किया जाता है. इसके लिए बीमा कंपनियां कई तरह की जांच-पड़ताल और चेकअप करती है. सबसे पहले कलाकार की मौजूदा और फ्यूचर की कमाई का अंदाजा लगाया जाता है. यदि कोई एक्ट्रेस एक फिल्म के लिए 40 से 50 करोड़ रुपये लेता है, तो उसके फेस या बॉडी के इंश्योरेंस की कीमत उसकी आने वाली फिल्मों के बेस पर 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक भी तय किया जा सकता है. इसके अलावा यह भी देखा जाता है कि जो आर्टिस्ट अपना बीमा करा रहा है वह फिल्मों में कितना जोखिम भरा काम करता है, जो एक्टर खुद स्टंट करते हैं, उनके लिए बीमा प्रीमियम ज्यादा होता है. इसके अलावा उनके समय-समय पर टेस्ट भी किए जाते हैं कि आर्टिस्ट अपनी हेल्थ लेकर लापरवाही तो नहीं कर रहा है. इस तरह की पॉलिसी का सालाना प्रीमियम काफी महंगा होता है. आमौतर पर इसके लिए 1 से 5 फीसदी तक प्रीमियम देना पड़ता है.
फिल्म प्रोडक्शन इंश्योरेंस कैसे काम करता है?
बॉलीवुड में सिर्फ हीरो-हीरोइन का ही नहीं, बल्कि पूरी फिल्म का भी इंश्योरेंस होता है. इसे फिल्म प्रोडक्शन इंश्योरेंस कहा जाता है. इंडिया में इस सिस्टम की शुरुआत प्रोड्यूसर-डायरेक्टर सुभाष घई ने अपनी फिल्म 'ताल' के समय की थी. इसके बाद से लगभग सभी बड़े स्टूडियो अपनी फिल्मों का इंश्योरेंस कराते हैं. इस बीमा के तहत अगर शूटिंग के दौरान हीरो या हीरोइन बीमार पड़ जाए या एक्सीडेंट का शिकार हो जाए और शूटिंग रुक जाए, तो सेट का किराया, कर्मचारियों का सैलरी और अन्य खर्चों की भरपाई इश्योरेंस कंपनी करती है. इतना ही नहीं कैमरे, लाइटिंग और डिजिटल फुटेज भी इसके दायरे में आते हैं. आपको बता दें कि इश्योरेंस के तहत कई तरह के नुकसान को कवर किया जाता है. जिसके बाद खुद इंश्योरेंस कंपनियां देती हैं.
फिल्म इंडस्ट्री में इंश्योरेंस की अहमियत क्यों बढ़ी?
बड़े बजट की फिल्मों में हजारों लोगों की मेहनत और करोड़ों रुपये का इन्वेस्टमेंट होता है. ऐसे में किसी एक इन्वेस्टमेंट एक्सीडेंट से पूरा प्रोजेक्ट रुक सकता है. यही वजह है कि अब इंश्योरेंस को फिल्म प्रोड्यूसर जरूरी समझते हैं. इंडियन सिनेमा में 'देवदास' की शूटिंग के दौरान सेट पर हुए हादसों से काफी आर्थिक नुकसान हुआ था. उस समय मजबूत प्रोडक्शन इंश्योरेंस होने के कारण प्रोड्यूसर को आर्थिक राहत मिली और फिल्म पूरी होकर रिलीज हो सकी. इस तरह के एक्सपीरियंस के बाद बड़े बैनर बिना इंश्योरेंस के फिल्म शुरू करने से बचते हैं.
क्या बॉडी पार्ट इंश्योरेंस पीआर का हिस्सा भी होता है?
एंटरटेनमेंट जगत के कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कई बार किसी स्टार के बॉडी पार्ट इंश्योरेंस की खबरें पीआर स्टंट का हिस्सी भी होती हैं. जब किसी फिल्म की रिलीज से पहले यह खबर आती है कि किसी एक्टर ने अपने हाथ, पैर या चेहरे का करोड़ों रुपये का इंश्योरेंस कराया है, तो इससे ऑडियंस के बीच एक्साइटमेंट बढ़ती है और कलाकार की ब्रांड वैल्यू को भी फायदा मिलता है. हालांकि इसके बावजूद इंश्योरेंस प्रोसेस पूरी तरह कानूनी और आर्थिक नियमों के अनुसार होती है. बड़े कलाकारों और प्रोड्यूसर के लिए यह केवल पब्लिसिटी नहीं, बल्कि जोखिम कम करने का असरदार तरीका भी है. इस तरह का बीमा करोड़ों रुपये के इन्वेस्ट वाले प्रोजेक्ट में किसी भी एक्सीडेंट से बचाव के लिए बहुत उपयोगी होता है.
आज क्यों जरूरी बन गया है इंश्योरेंस सिस्टम?
बॉलीवुड पहले के कम्पेरिजन में अब पूरी तरह कॉर्पोरेट मॉडल पर काम करता है. फिल्मों में बड़े इन्वेस्टमेंट , इंटरनेशनल रिलीज, ओटीटी राइट्स, ब्रांड डील और डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन ने जोखिम भी कई गुना बढ़ा दिया है. ऐसे में आर्टिस्ट का फेस, आवाज, फिटनेस और टाइम पर शूटिंग पूरी होना सीधे फिल्म की कमाई से जुड़ा होता है. इसी वजह से आज बॉडी पार्ट इंश्योरेंस और फिल्म प्रोडक्शन इंश्योरेंस फिल्म इंडस्ट्री के लिए जरूरी बन गया है. यह सिस्टम केवल सितारों की सिक्योरिटी के लिए नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के इन्वेस्टमेंट, हजारों कर्मचारियों की मेहनत और फिल्म की सिक्योरिटी के लिए होता है. यही वजह है कि आज बड़े स्टार और बड़े प्रोडक्शन हाउस किसी भी बड़ी फिल्म की शुरुआत से पहले इंश्योरेंस को प्रायोरिटी देते हैं.
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