Explainer: क्या होता है पॉलीग्राफी टेस्ट? जिसे करवाने के लिए मान गई सिया, क्या इससे सच सामने आ जाता है? जानिए कैसे काम करती है यह जांच
Explainer: जोड़ने में मुश्किल आती है, तब जांच एजेंसियां पॉलीग्राफी टेस्ट (Polygraph Test) का सहारा लेती हैं. हाल ही में एक हाई-प्रोफाइल हत्या मामले में मुख्य आरोपी सिया द्वारा पॉलीग्राफी टेस्ट के लिए सहमति दिए जाने के बाद यह तकनीक फिर चर्चा में है.
हालांकि आम लोगों के बीच इसे अक्सर "लाई डिटेक्टर टेस्ट" कहा जाता है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि पॉलीग्राफी टेस्ट किसी व्यक्ति के झूठ या सच को 100 प्रतिशत प्रमाणित नहीं करता. यह केवल व्यक्ति के शरीर में होने वाली शारीरिक प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण करता है, जिसके आधार पर विशेषज्ञ अपनी राय देते हैं.
क्या होता है पॉलीग्राफी टेस्ट?
पॉलीग्राफी टेस्ट एक वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया है, जिसमें किसी व्यक्ति से सवाल पूछे जाते हैं और उसी दौरान उसके शरीर में होने वाले जैविक (Physiological) बदलाव रिकॉर्ड किए जाते हैं.
इस टेस्ट के दौरान व्यक्ति के शरीर पर कई सेंसर लगाए जाते हैं, जो लगातार अलग-अलग संकेत रिकॉर्ड करते रहते हैं. इन संकेतों में मुख्य रूप से शामिल होते हैं...
-हृदय गति (Heart Rate)
-रक्तचाप (Blood Pressure)
-सांस लेने की गति (Respiration)
-त्वचा पर पसीने की मात्रा (Galvanic Skin Response)
-कभी-कभी शरीर की हलचल भी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति झूठ बोलते समय मानसिक तनाव महसूस करता है, तो उसके शरीर में इन संकेतों में बदलाव दिखाई दे सकता है.
पॉलीग्राफी टेस्ट कैसे किया जाता है?
पॉलीग्राफी टेस्ट अचानक शुरू नहीं कर दिया जाता. इसके लिए पूरी प्रक्रिया अपनाई जाती है.
1. प्रारंभिक बातचीत
सबसे पहले विशेषज्ञ आरोपी या संबंधित व्यक्ति से सामान्य बातचीत करते हैं. उसका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य समझा जाता है. उसे पूरी प्रक्रिया भी समझाई जाती है.
2. सेंसर लगाए जाते हैं
व्यक्ति के शरीर पर कई इलेक्ट्रॉनिक सेंसर लगाए जाते हैं, जो उसकी शारीरिक गतिविधियों को रिकॉर्ड करते हैं.
3. सामान्य सवाल
शुरुआत में ऐसे सवाल पूछे जाते हैं जिनके जवाब स्पष्ट हों, जैसे...
-आपका नाम क्या है?
-आपकी उम्र कितनी है?
-क्या आज सोमवार है?
इन सवालों से व्यक्ति की सामान्य शारीरिक प्रतिक्रियाओं का आधार (Baseline) तैयार किया जाता है.
4. घटना से जुड़े सवाल
इसके बाद मामले से जुड़े अहम सवाल पूछे जाते हैं.
उदाहरण के तौर पर...
-क्या आप घटना के समय मौके पर मौजूद थे?
-क्या आपने पीड़ित से आखिरी बार मुलाकात की थी?
-क्या आपने किसी सबूत को छिपाया?
इन सवालों के दौरान शरीर की प्रतिक्रियाओं की तुलना पहले दर्ज किए गए सामान्य आंकड़ों से की जाती है.
क्या पॉलीग्राफी टेस्ट सच पकड़ लेता है?
यही सबसे बड़ा सवाल है.
उत्तर है- नहीं, यह सच या झूठ का अंतिम प्रमाण नहीं है.
पॉलीग्राफ मशीन केवल यह रिकॉर्ड करती है कि किसी सवाल पर व्यक्ति की शारीरिक प्रतिक्रिया सामान्य से अलग हुई या नहीं.
लेकिन ऐसी प्रतिक्रिया कई कारणों से हो सकती है...
-घबराहट
-डर
-तनाव
-मानसिक दबाव
-बीमारी
-चिंता
यानी केवल प्रतिक्रिया बदल जाने से यह साबित नहीं होता कि व्यक्ति झूठ बोल रहा है. इसी कारण दुनियाभर के कई वैज्ञानिक इसे पूरी तरह भरोसेमंद तकनीक नहीं मानते.
क्या भारत में पॉलीग्राफी टेस्ट कानूनी है?
भारत में पॉलीग्राफी टेस्ट पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन इसके लिए सख्त कानूनी नियम बनाए गए हैं. किसी भी आरोपी का पॉलीग्राफी टेस्ट उसकी स्वैच्छिक सहमति (Consent) के बिना नहीं किया जा सकता. यदि व्यक्ति सहमत नहीं है, तो उसे जबरन टेस्ट कराने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है?
2010 में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया था कि...
-पॉलीग्राफी टेस्ट,
-नार्को एनालिसिस,
-ब्रेन मैपिंग
जैसी जांच किसी व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध नहीं की जा सकती. अदालत ने कहा कि ऐसा करना व्यक्ति के मौलिक अधिकारों और निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा.
क्या पॉलीग्राफी रिपोर्ट अदालत में सबूत बन सकती है?
यह एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है. भारत में पॉलीग्राफी टेस्ट की रिपोर्ट अपने आप में अंतिम या निर्णायक साक्ष्य नहीं मानी जाती. अदालत इसे केवल जांच में मिली एक सहायक जानकारी के रूप में देख सकती है.
यदि टेस्ट के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस को कोई नया भौतिक सबूत मिलता है. जैसे हथियार, मोबाइल फोन या अन्य महत्वपूर्ण वस्तु तो वह बरामदगी अलग से कानूनी महत्व रख सकती है. लेकिन केवल पॉलीग्राफी रिपोर्ट के आधार पर किसी को दोषी या निर्दोष नहीं ठहराया जा सकता.
पुलिस इस टेस्ट का सहारा क्यों लेती है?
जांच एजेंसियां पॉलीग्राफी टेस्ट का इस्तेमाल कई परिस्थितियों में करती हैं...
-जब आरोपी बार-बार बयान बदल रहा हो.
-जब कई संदिग्धों के बयान एक-दूसरे से मेल न खा रहे हों.
-जब किसी महत्वपूर्ण तथ्य की पुष्टि करनी हो.
-जब किसी छिपे हुए सबूत तक पहुंचने की संभावना हो.
-जब जांच किसी महत्वपूर्ण मोड़ पर अटक गई हो.
इस टेस्ट के जरिए जांचकर्ता यह समझने की कोशिश करते हैं कि किन बिंदुओं पर आगे गहन जांच की जरूरत है.
पॉलीग्राफी टेस्ट की सीमाएं क्या हैं?
हालांकि यह तकनीक जांच में उपयोगी हो सकती है, लेकिन इसकी कई सीमाएं भी हैं.
-यह 100 प्रतिशत सटीक नहीं होती.
- मानसिक रूप से मजबूत व्यक्ति अपनी प्रतिक्रियाओं को कुछ हद तक नियंत्रित कर सकता है.
- अत्यधिक तनाव में निर्दोष व्यक्ति भी संदिग्ध प्रतिक्रिया दे सकता है.
- बीमारी, दवाइयों या मानसिक स्थिति का भी परिणामों पर असर पड़ सकता है.
- अलग-अलग विशेषज्ञ एक ही डेटा की अलग व्याख्या कर सकते हैं.
इसी वजह से अधिकांश विशेषज्ञ मानते हैं कि पॉलीग्राफी को केवल एक जांच उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि अंतिम सत्य मानकर.
पॉलीग्राफी टेस्ट को अक्सर "सच पकड़ने वाली मशीन" कहा जाता है, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल है. यह मशीन झूठ को सीधे नहीं पकड़ती, बल्कि सवालों के दौरान शरीर में होने वाले शारीरिक बदलावों को रिकॉर्ड करती है. इन संकेतों के आधार पर विशेषज्ञ संभावित निष्कर्ष निकालते हैं, जिन्हें जांच का हिस्सा माना जाता है.
भारत में क्या नियम?
भारत में यह जांच केवल संबंधित व्यक्ति की सहमति से ही कराई जा सकती है और इसकी रिपोर्ट अकेले किसी अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं होती. इसलिए पॉलीग्राफी टेस्ट को जांच एजेंसियों के लिए एक सहायक वैज्ञानिक माध्यम माना जाता है, जो कई बार जांच की दिशा तय करने में मदद करता है, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा अदालत में उपलब्ध अन्य साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होता है.
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चंद्रचूड़ सिंह के घर के बाहर चला बुलडोजर, एक्टर की कोठी के पड़े-पौधो और दीवार को ढहाया, वीडियो आया सामने
Chandrachur Singh House Bulldozer: बॉलीवुड के 90 दशक के मशहूर एक्टर चंद्रचूड़ सिंह (Chandrachur Singh) के गुरुग्राम के घर के बाहर अवैध निर्माण पर अधिकारियों ने बुलडोजर चलाया है. जानकारी के मुताबिक, एक्टर 90 के दशक से गुरुग्राम के पॉश इलाके DLF Phase 3 में रह रहे हैं. आज इस इलाके में टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट की ओर से इलीगल कंस्ट्रक्शन के खिलाफ बड़े स्तर अभियान चलाया गया. जहां चंद्रचूड़ की कोठी के बाहर बनी अवैध दीवार और पेड़-पौधों को हटाया गया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है. जिसमें एक्टर अधिकारियों से इस कार्रवाई को लेकर बातचीत करते दिखे.हालांकि, वीडियो में दिखाई दिया कि वह इस कार्रवाई में अधिकारियों से सहयोग करते हुए दिखाई दिए. टीम ने अभियान के पहले ही दिन एरिया में कई इलीगल कंस्ट्रक्शन को ढहाया.
चंद्रचूड़ सिंह के घर के बाहर चला बुलडोजर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अधिकारियों की ओर से इस इलाके में अवैध निर्माण को हटाने के लिए एग्रिम नोट जारी किया था. हालांकि, तय समय के मुताबिक, स्वयं एक्शन नहीं लिया तो शुक्रवार को अधिकारी बुलडोजर के साथ गुरुग्राम के इस इलाके में अवेध निर्माण को ढहाने के लिए पहुंचे थे. जब अधिकारी पुलिस फोर्स के साथ यहां अवैध निर्माण को हटाने के लिए पहुंचे तो इलाके में हड़कंप मच गया. मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया. बिना किसी सवाल-जवाब के चंद्रचूड़ सिंह की कोठी (S20/5) के बाहर भी नियमों के उल्लंघन के चलते बुलडोजर चलवाया गया. बताया जा रहा है कि टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट की टीम ने कोठी के बाहर अवैध रूप से बने हुए रैंप को भी तोड़ दिया. जिससे एक्टर अपनी कोठी से मामले का जायजा लेने के लिए बाहर आ गए.
Gurugram: DLF Phase 3 में अभिनेता Chandrachur Singh के घर के बाहर चला DTP का बुलडोजर।
— Greater Noida West (@GreaterNoidaW) July 3, 2026
सड़क की जमीन पर बनी दीवार और पेड़-पौधे हटाए गए।
DTP Amit Madholia ने कार्रवाई की जानकारी फिल्म अभिनेता को दी। pic.twitter.com/crlubZDldu
चंद्रचूड़ सिंह ने अवैध निर्माण को लेकर अधिकारियों से की बात
जब चंद्रचूड़ सिंह की कोठी के बाहर बुलडोजर चल रहा था. तब एक्टर मौके पर मौजूद कुछ अफसरों से बातचीत करते हुए दिखाई दिए. हालांकि, उन्होंने कार्रवाई में किसी तरह की बांधा उत्पन्न नहीं की. लेकिन उन्होंने मामला का जायजा जरूर लिया. बताया जा रहा है कि उन्होंने अवैध कार्रवाई को लेकर मौके पर मौजूद अधिकारियों से जानकारी ली कि इसके आगे तो कार्रवाई नहीं की जाएगी. हालांकि, एक्टर इस दौरान काफी कैजुअल नजर आए. बताया जा रहा है कि इस अवैध कार्रवाई के बारे में डीटीपी अमित मधौलिया ने एक्टर को खुद जानकारी दी थी कि यहां पर सरकारी सड़क की जमीन पर दीवार बना रखी थी और साथ में पेड़-पौधे लगा रखे थे.
30 साल से रह हैं एक्टर इस कोठी में
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक्टर ने अवैध निर्माण हटाने आए अधिकारियों को बताया कि वह यहां पर करीब 30 साल से रहे हैं. उन्होंने कहा कि यहां पर कुछ न तोड़ कर चले जाते हैं ऐसा नहीं करना चाहिए था. इसके अलावा उन्होंने अपने घर को लेकर भी पूछा कि इसके अलावा तो कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. इस पर आधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया इसके आगे कोई कार्रवाई नहीं होगी. वहीं, अधिकारियों ने कहा कि वह पहले से ही जानते थे कि यह उनका घर है और वह काफी समय से यहां पर रहे हैं. एक्टर ने अधिकारियों को बताया कि वह अपनी फैमिली के साथ यहां पर 30 साल से रह रहे हैं.
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चंद्रचूड़ सिंह के बारे में जानिए
57 साल के चंद्रचूड़ सिंह ने बॉलीवुड में 90 दशक में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप अवारगी फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद वह 'तेरे मेरे सपने' में बतौर एक्टर नजर आए थे. हालांकि, उन्हें सबसे बड़ी पहचान 1996 में आई फिल्म 'माचिस' मिली थी, इस फिल्म में उन्होंने कृपाल सिंह नाम के शख्स का किरदार निभाया था. इस फिल्म में उनके काम के लिए बहुत तारीफ मिली थी और वह रातोंरात फेमस हो गए थे. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. बाद के सालों में उन्होंने बेताबी, दाग, जोश, मारुति मेरा दोस्त और चार दिन की चांदनी जैसी कई शानदार फिल्मों में काम किया. इसके अलावा वह टीवी के लिए भी काम कर चुके हैं. इस समय एक्टर बॉलीवुड की चकाचौंध से दूर गुरुग्राम में अपनी फैमिली के साथ समय बिता रहे हैं.
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