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Explainer: क्यों खामेनेई के जनाजे में नहीं जा रहे PM मोदी? आखिर क्या है भारत की रणनीति?
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को हत्या के 131 दिन बाद सुपुर्द-ए-खाक किया जाना है. 2 दिन बाद राजकीय जनाजे में ईरान दुनिया भर से नेताओं को बुला रहा है. 23 जून को राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्योता दिया है.
भारतीय सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार ने एक डेलीगेशन भेजने का फैसला किया है, जिसमें ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हैं और न तो विदेश मंत्री शामिल है. आखिर न्योता मिलने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी खुद ईरान क्यों नहीं जा रहे हैं? भारत की ओर से ले. ज. (रि.) सैयद अता हसनैन और पबित्र मार्गरिटा ईरान जाने वाले हैं. आइये जानते हैं इनके बारे में भी.
????Preparations are in full swing for the funeral of Iran's late Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei in Tehran, with millions of mourners already present and several foreign dignitaries expected to attend
— The Tatva (@thetatvaindia) July 3, 2026
His body has arrived at Tehran's Grand Mosalla religious complex ahead of… pic.twitter.com/lthemHiSdM
खामेनेई के जनाजे में शामिल होने वाले दो राजनेता…
1. ले. ज. (रि.) सैयद अता हसनैन, बिहार के राज्यपाल
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन दूसरी पीढ़ी के आर्मी अफसर हैं. वे मेजर जनरल सैयद महदी हसनैन के बेटे हैं. सैयद 1974 में गढ़वाल राइफल्स में कमीशन हुए थे. उन्होंने जम्मू-कश्मीर, सियाचिन से लेकर नॉर्थ-ईस्ट और श्रीलंका तक में ड्यूटी की है. वे जम्मू-कश्मीर की 15वीं कोर की कमान संभाल चुके हैं. 40 साल तक सेना से सर्विस कर चुके सैयद को एंटी-टेररिज्म, स्ट्रैटजी और डिप्लोमेसी एक्सपर्ट माना जाता है. रिटायरमेंट के बाद, 2018 में वे सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर में चांसलर के रूप में पदस्थ हुए. 2020 में बतौर सदस्य नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी से जुड़े. वे वर्तमान में बिहार के राज्यपाल हैं.
डेलिगेशन में क्यों चुना गया: ईरान एक शिया बहुल इस्लामिक देश है. अयातुल्ला खामेनेई शियाओं के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता थे. सैयद अता हसनैन भी शिया हैं. वे रिटायर्ड आर्मी अफसर और राज्यपाल जैसा अहम संवैधानिक पद पर भी हैं.
2. पबित्र मार्गरिटा, केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री
पबित्र मार्गरिटा राजनीति में आने से पहले असमिया सिनेमा के मशहूर एक्टर, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर थे. 2014 में वे भाजपा से जुड़े हैं. पबित्र असम बीजेपी के संगठन में काम कर चुके हैं. सोशल मीडिया सेल के प्रभारी, प्रवक्ता और जिला प्रभारी रहे हैं. 2022 में वे राज्यसभा सांसद बने हैं. वर्तमान में पबित्र मोदी सरकार में विदेश और कपड़ा राज्यमंत्री हैं.
डेलिगेशन में क्यों चुना गया: सीधे विदेश मंत्रालय का हिस्सा हैं. ना ज्यादा हाई प्रोफाइल हैं और न ज्यादा लो-प्रोफाइल. ईरान को लेकर भारत के मौजूदा स्टैंड पर फिट बैठते हैं.
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पीएम मोदी का बुलावा था, फिर वो खुद क्यों नहीं गए?
पहले जाहिर वजहों की बात- पीएम मोदी का शेड्यूल पहले से तय है. 1 जुलाई से लेकर 3 जुलाई तक जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची भारत दौरे पर रहेंगी, जिनसे पीएम मोदी मुलाकात करेंगे. पीएम मोदी 4 जुलाई को राजस्थान के जोधपुर जाएंगे. इसके बाद, 6 से 11 जुलाई तक पीएम मोदी इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा करेंगे.
पीएम मोदी के ईरान न जाने के पीछे 3 वजहें और भी हैं. JNU में मिडिल-ईस्ट स्टडीज के प्रोफेसर पीआर कुमारस्वामी और इंटरनेशनल स्टडीज के एसोसिएट प्रोफेसर राजन कुमार के अनुसार,
काफी उग्र हो सकता है अंतिम यात्रा
खामेनेई की मौत एक हमले में हुई है. उनका जनाजा सिर्फ एक शोक सभा नहीं, बल्कि न्याय और प्रतिरोध का धार्मिक और राजनीतिक रूप ले लेगा. अंतिम संस्कार में 6 दिनों तक चलेगा, जिसमें मुहर्रम की तरह विलाप होगा और खुद को पीटा जाएगा. ये काफीउग्र होगा. इसमें शामिल होने का मतलब है कि पीएम मोदी खुलकर ईरान के प्रतिरोध के साथ हैं. ऐसे टैग से भारत बचना चाहता है.
बता दें, 1989 में ईरान के पहले सुप्रीम लीडर रुहुल्लाह खुमैनी का अंतिम संस्कार हुआ था, जिसमें 1 करोड़ से ज्यादा लोग शामिल हुए थे. शव दफनाने से पहले बैरियर गिर गया था और भगदड़ मच गई थी, जिसमें 56 लोगों की मौत हो गई थी.
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अचानक स्टैंड बदलने से आलोचना का खतरा
भारत ने खामेनेई की मौत पर चुप्पी साध रखी थी. 5 दिन बाद पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी, वह भी तब जब विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूतावास जाकर शोक जताया. ऐसे में 4 महीने बाद पीएम मोदी का अचानक खामेनेई के जनाजे में जाना, पूरी तरह से स्टैंड बदलना होगा.
साझेदार देशों को गलत मैसेज जाने की चिंता
पीएम मोदी की खामेनेई के जनाजे में मौजूदगी भारत के साझेदारों और ईरान के विरोधी देशों को नाराज कर सकती है, जिसमें अमेरिका, इजराइल के साथ-साथ सऊदी अरब, यूएई जैसे सुन्नी बहुल देश भी हैं.
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खामेनेई के अंतिम संस्कार में क्या-क्या होना है?
28 फरवरी को खामेनेई की मौत के बाद, 4 मार्च को उनका अंतिम संस्कार होना था. हालांकि, लगातार होते हमलों की वजह से इसे टाल दिया गया था. अब 4 जुलाई से अंतिम संस्कार कार्यक्रम की शुरूआत की जाएगी.
- खामेनेई के शव को 4 और 5 जुलाई को तेहरान में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा. कम-से-कम 24 घंटे तक ये कार्यक्रम चल सकता है.
- तेहरान से 6 जुलाई को उनका जुलूस निकालेगा, जिमसें तेहरान के मेयर अलीरेजा जकानी के मुताबिक करीब 2 करोड़ लोगों के शामिल हो सकते हैं.
- पार्थिव शरीर को 7 जुलाई को ईरान के धार्मिक शहर कोम ले जाया जाएगा. यह शिया इस्माल का बड़ा धार्मिक और शैक्षणिक केंद्र है.
- पार्थिव शरीर को यहां से इराक के दो पवित्र शहरों नजफ और करबला ले जाया जाएगा. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने खुद यहां की तैयारियों का जायजा लिया है।
- 9 जुलाई को शव फिर ईरान के मशहद जाया जाएगा. मशहद खामेनेई का जन्मस्थान और शिया मुसलमानों का प्रमुख धार्मिक केंद्र है. यहां शियाओं के आठवें इमाम, इमाम रजा का मकबरा है. इमाम रजा की दरगाह में ही खामेनेई को भी दफनाया जाएगा.
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