Ayatollah Khamenei Funeral: पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई प्रक्रिया शुरू, 3 महीने बाद अब होंगे सुपुर्दे ख़ाक
ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के तीन महीनों बाद आखिरकार देश की धार्मिक सरकार ने उनके अंतिम दफन समारोह और बहुदिवसीय विदाई यात्रा को आयोजित करने का निर्णय लिया है। लगभग 40 वर्षों तक ईरान की सत्ता के शीर्ष पर रहे खामेनेई की हत्या 28 फरवरी को उस समय कर दी गई थी, जब अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था।
सुरक्षा कारणों और निरंतर जारी सैन्य संघर्ष के चलते उनकी अंतिम यात्रा को लंबे समय के लिए स्थगित कर दिया गया था। अब कतर में शुरू हुई तकनीकी वार्ताओं और अंतरिम शांति समझौते के बीच इस शोक यात्रा का खाका तैयार किया गया है, जिसे ईरान की जर्जर धर्मतांत्रिक सरकार के लिए जनसमर्थन जुटाने की एक बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
तेहरान से कर्बला तक का पूरा रूट मैप; जानिए किस दिन कहां रहेगा पार्थिव शरीर
सुरक्षा बलों और आधिकारिक आयोजन समिति द्वारा जारी रूट मैप के अनुसार, यह दफन समारोह कई दिनों तक बेहद कड़े सुरक्षा घेरे में संचालित होगा।
- शनिवार और रविवार: तेहरान ग्रैंड मोसल्ला
सर्वप्रथम अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को शनिवार और रविवार को देश की राजधानी तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में रखा जाएगा, ताकि देश के नागरिक और अर्धसैनिक बलों के जवान अपने दिवंगत नेता के अंतिम दर्शन कर सकें। - सोमवार और मंगलवार: तेहरान से शिया मदरसा शहर कोम का सफर
सोमवार को तेहरान की मुख्य सड़कों पर एक विशाल राजकीय जुलूस निकाला जाएगा, जिसके बाद ताबूत को दक्षिण में करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित शिया मदरसा शहर 'कोम' ले जाया जाएगा, जहां मंगलवार को धार्मिक गुरुओं द्वारा उन्हें विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। - बुधवार: पड़ोसी देश इराक के पवित्र शहर कर्बला में एंट्री
बुधवार को खामेनेई के पार्थिव शरीर को सीमा पार पड़ोसी देश इराक के ऐतिहासिक शहर कर्बला ले जाया जाएगा। कर्बला में पैगंबर मुहम्मद के पोते इमाम हुसैन का मकबरा है, जो सदियों से शिया समुदाय के लिए अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध का सबसे बड़ा केंद्र रहा है। विशेष बात यह है कि इसी बुधवार को ईरान में खामेनेई शासन के खिलाफ हुए राष्ट्रव्यापी हिंसक विरोध प्रदर्शनों की वर्षगांठ भी है।
धार्मिक दृष्टि से क्यों खास है मशहद का इमाम रजा तीर्थस्थल, जहां दफनाए जाएंगे खामेनेई?
इराक से वापस लाने के बाद अयातुल्ला खामेनेई को ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में स्थित विश्व प्रसिद्ध इमाम रजा तीर्थस्थल के परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। शिया इस्लाम में इमाम रजा तीर्थस्थल का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक है, क्योंकि इमाम रजा शिया संप्रदाय के आठवें पवित्र इमाम थे।
इस्लामिक हदीस और मान्यताओं के अनुसार, इस दरगाह पर आने से किसी भी दुखी व्यक्ति को कष्टों से और पापी को पापों से मुक्ति मिल जाती है। यही कारण है कि हर साल दुनिया भर से करोड़ों शिया तीर्थयात्री इस स्थान पर जियारत के लिए उमड़ते हैं। इस दरगाह परिसर में इतिहास के कई शीर्ष शिया धर्मगुरुओं और राष्ट्रीय नेताओं को दफनाया गया है, जिनमें ईरान के दिवंगत राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी भी शामिल हैं, जिनकी साल 2024 में एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।
साल 1989 में अयातुल्ला खुमैनी की अंत्येष्टि जैसी भगदड़ की आशंका, सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर
खामेनेई की इस अंतिम यात्रा में जुटने वाली लाखों की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने की है। खुफिया एजेंसियों को अंदेशा है कि यहाँ 6 जून, 1989 को हुए इस्लामी क्रांति के जनक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार जैसी भयावह स्थिति दोबारा उत्पन्न हो सकती है।
खुमैनी के दफन के समय स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो गई थी, जहां भीषण गर्मी में शोक मनाती लाखों की भीड़ सीधे ताबूत की तरफ झपट पड़ी थी, जिससे खुमैनी का शव कफन समेत जमीन पर गिर गया था। उस अफरा-तफरी में कम से कम आठ लोगों की कुचलने से मौत हुई थी और 11 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
उधर, खाड़ी देशों के कूटनीतिक गलियारों में इस यात्रा के राजनीतिक निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं। जून में हुए अंतरिम शांति समझौते के तहत अमेरिका और ईरान को युद्ध समाप्त करने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य व परमाणु कार्यक्रम के मुद्दों को सुलझाने के लिए 60 दिनों का समय मिला है, जिसकी कतर में तकनीकी वार्ता जारी है।
पीएम मोदी का न्यूजीलैंड दौरा तय: FTA और निवेश पर टिकीं निगाहें; रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती
PM Modi New Zealand visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह न्यूजीलैंड की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। इस यात्रा को भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इस दौरे की आधिकारिक घोषणा करते हुए इसे दोनों देशों की साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला कदम बताया है।
आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई गति
प्रधानमंत्री लक्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी साझा करते हुए भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भारत के 1.4 अरब लोगों के विशाल बाज़ार तक न्यूजीलैंड की पहुंच बढ़ाने, निर्यात को गति देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में सहायक होगी। यह दौरा अप्रैल में हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद संबंधों को और अधिक मज़बूत करेगा।
I’m delighted to announce Indian Prime Minister @narendramodi will make his first official visit to New Zealand next week.
— Christopher Luxon (@chrisluxonmp) July 3, 2026
India is one of the world’s largest and fastest-growing economies, and a country of enormous importance to New Zealand’s economic prosperity.
We are…
FTA पर केंद्रित रहेगा एजेंडा
भारत और न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) इस यात्रा का मुख्य केंद्र रहने की उम्मीद है। दोनों देशों ने अप्रैल में ही इस ऐतिहासिक समझौते को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था। इस समझौते का उद्देश्य कृषि उत्पादकता, निवेश, पर्यटन, खेल, कौशल विकास और प्रतिभाओं की आवाजाही जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है। इससे दोनों देशों के छोटे उद्यमियों (MSMEs), महिला उद्यमियों और छात्रों को बड़े पैमाने पर लाभ मिलने की उम्मीद है।
व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने हाल ही में विश्वास जताया था कि FTA के माध्यम से अगले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार दोगुना हो सकता है। न्यूजीलैंड सरकार की योजना अगले 15 वर्षों में भारत में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक का निवेश करने की है, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की गंभीरता को दर्शाता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह यात्रा?
पीएम मोदी का यह दौरा न केवल व्यापारिक वार्ताओं को नई गति प्रदान करेगा, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक संबंधों को भी गहरा करेगा। भारत की उभरती हुई अर्थव्यवस्था को देखते हुए न्यूजीलैंड इसे दीर्घकालिक विकास और बड़े उपभोक्ता बाज़ार तक पहुँचने के एक बड़े अवसर के रूप में देख रहा है। यह यात्रा मोदी और लक्सन के बीच पिछले कुछ महीनों में हुई उच्च-स्तरीय वार्ताओं की अगली कड़ी होगी, जो भारत-न्यूजीलैंड की साझेदारी को एक नई दिशा देगी।
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