IAS Transfer: ब्यूरोक्रेसी में हलचल, इन 4 आईएएस अधिकारियों का हुआ तबादला, आदेश जारी, देखें लिस्ट
कर्नाटक और गुजरात दोनों राज्यों में नौकरशाही बदलाव देखने को मिला है। गुजरात सरकार ने एक ही सप्ताह में दूसरी बार भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारियों का तबादला (IAS Transfer) किया है, दो आईएएस अफसरों को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। GAD के उप सचिव बदले गए हैं। वहीं कर्नाटक में भी दो आईएएस अधिकारियों के प्रभार में बदलाव हुआ है। स्थानांतरण और तबादले से संबंधित आदेश बुधवार को जारी किया गया है।
कर्नाटक सरकार ने बैच 2020 के आईएएस अधिकारी लविश ओर्डिया, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, जिला पंचायत यादगीर को कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (KPSC) के ज्वाइंट कंट्रोल ऑफ एग्जामिनेशन पद की जिम्मेदारी सौंपी है। तबादले का आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है।
KPSC के परीक्षा नियंत्रक भी बदले
बैच 2017 के आईएएस अधिकारी प्रसन्ना एच को अगले आदेश तक के लिए कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन बेंगलुरु के एग्जामिनेशन कंट्रोलर पद पर नियुक्त किया गया है। वह दिग्विजय बोडके का स्थान ग्रहण करने वाले हैं। इससे पहले वह एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कर्नाटक एग्जामिनेशन अथॉरिटी बेंगलुरु पद पर कार्यरत थे।
गुजरात में दो आईएएस अधिकारियों का तबादला हुआ
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार ने मेहसाणा के जिला विकास अधिकारी पद पर कार्यरत डॉ अंजु विल्सन को उपसचिव सामान्य प्रशासन विभाग सचिवालय गांधीनगर पद पर नियुक्त किया है। आईएएस अधिकारी पीवी राठौड़, निदेशक, स्किल डेवलपमेंट गांधीनगर को जिला विकास अधिकारी मेहसाणा पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
बता दें कि 11 अगस्त को भी राज्य में तीन आईएएस अधिकारियों का तबादला किया गया था। रंजीत कुमार जे को सचिव, गुजरात इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमिशन पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नागराजन एम को स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर समग्र शिक्षा अभियान पद पर नियुक्त किया गया है। जबकि तेजस दिलीप भाई परमार कलेक्टर सूरत को नगर आयुक्त सूरत नगर निगम के पद का अतिरिक्त प्रभार मिला है।
738_1_1_Transfer Orderजापान में मजदूरों की समस्या:किसान हो रहे बुजुर्ग, अब खेती बचाने के लिए रोबोट का सहारा ले रहे
जापान के ग्रामीण इलाकों में घटती आबादी और बुजुर्ग होते किसानों के बीच अब रोबोट खेती का सहारा बन रहे हैं। यामागाता प्रांत के निशिकावा कस्बे में किसानों की औसत उम्र 73 वर्ष है और पर्याप्त मजदूर नहीं हैं। यहां रोबोट चेरी के फूल तोड़ने, पैक करने और भालुओं को खेतों से दूर रखने जैसे काम कर रहे हैं। देश के ग्रामीण इलाकों से युवाओं का पलायन लगातार बढ़ा है। इसके अलावा जन्मदर 2025 में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई और आबादी 2060 तक 10 करोड़ से कम होने का अनुमान है। ऐसे में रोबोट ग्रामीण जापान की खेती और आजीविका बचाने की उम्मीद बनते जा रहे हैं। नौकरी के लिए जापानी सीख रहे भारतीय युवा देश में कामगारों की भारी कमी को पूरा करने के लिए जापानी सरकार अब विदेशी लोगों को बुला रही है। इसका असर भारत के नॉर्थ-ईस्ट तक दिख रहा है। मिजोरम, मणिपुर और असम के युवा जापानी भाषा सीख रहे हैं और स्किल टेस्ट दे रहे हैं। साथ ही केयरगिविंग व एग्रीकल्चर जैसी नौकरियों के लिए जापान जाने की तैयारी कर रहे हैं। असम सरकार ट्रेनिंग फीस पर सब्सिडी और रिलोकेशन सपोर्ट दे रही है। वहीं, मणिपुर और मिजोरम की यूनिवर्सिटी में भी जापानी भाषा सिखाने के लिए सेंटर शुरू किए गए हैं। टेक्नोलॉजी से समस्या का हल यामागाता प्रांत में, स्थानीय अधिकारियों ने जनसंख्या में गिरावट से निपटने के लिए रोबोट से जुड़े कई समाधानों को आजमाया है। निशिकावा प्रांत के 48 महापौर दाइशी कानो ने स्मार्ट कृषि के लिए करीब 38 लाख रुपए जुटाए। उन्होंने भी मजदूरों की समस्या हल करने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग करने का फैसला किया है।
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