Success story: स्कूल टीचर की नौकरी छोड़ सुचेता वाही ने 2004 में शुरू किया जूते का कारोबार, 10 से अधिक देशों में कर रहीं निर्यात
शिक्षिका सुचेता वाही ने 16 साल बाद नौकरी छोड़ 2004 में जूता कारोबार शुरू किया. उनकी यूनिट के सेफ्टी इंडस्ट्रियल शूज 10 से अधिक देशों में निर्यात होते हैं. सुचेता वाही बताती हैं कि जूते वे हमेशा पहनती थीं, लेकिन जूता कैसे बनता है, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी. यूनिट शुरू करने के बाद उन्होंने सैंपलिंग से लेकर उत्पादन तक की प्रक्रिया खुद समझी. धीरे-धीरे काम की बारीकियां सीखीं और यही सीख उनके कारोबार को आगे बढ़ाने में सबसे बड़ी ताकत बनी. आज उनकी यूनिट में तैयार होने वाले सेफ्टी इंडस्ट्रियल शूज 10 से अधिक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं.
आजादी की एक लड़ाई ऐसी भी, अंग्रेजों के महंगे बिस्कुट को जवाब देने के लिए बना था देसी ब्रांड Parle-G
Parle-G Success Story : सुबह-शाम की चाय हो या ऑफिस का ब्रेक. पारले-जी के प्रोडक्ट बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़ों तक की पसंद बन चुके हैं. वैसे तो आपने भी पारले बिस्कुट बहुत बार खाया होगा, लेकिन कभी सोचा है कि इसका नाम पारले क्यों पड़ा. आजादी से पहले शुरू हुआ यह ब्रांड आज भी दमदार तरीके से अपना कारोबार कैसे कर रहा है, जबकि इस दौरान हजारों कंपनियां बनीं और खत्म हो गईं.
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